“ईरान की शर्तें पूरी होने तक कोई बातचीत नहीं होगी। बस, बात खत्म!”: मोहसिन रज़ाई
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) के सचिव मेजर जनरल मोहसिन रज़ाई ने कहा है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति के विरोधाभासी संकेतों से किसी को भी तेल और जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुई नई वास्तविकताओं से अपना ध्यान नहीं भटकाना चाहिए। उन्होंने कहा कि, तेहरान की शर्तें पूरी होने तक कोई बातचीत नहीं होगी।
रज़ाई ने सोमवार रात अपने आधिकारिक एक्स (X) अकाउंट पर एक पोस्ट में लिखा:
“अमेरिकी राष्ट्रपति के विरोधाभासी संकेतों से विचलित न हों—‘कोई बातचीत नहीं’ से लेकर ‘हम बातचीत के लिए तैयार हैं’ तक। तेल और जलडमरूमध्य को लेकर दांव अब बदल चुके हैं। नुकसान की भरपाई करने की कोशिशें भी आने वाली घटनाओं को नहीं रोक पाएंगी।”
उन्होंने आगे कहा:
“ईरान की शर्तें पूरी होने तक कोई बातचीत नहीं होगी। बस, बात खत्म!”
यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ट्रुथ सोशल पर किए गए उस पोस्ट के कुछ ही घंटों बाद आई, जिसमें उन्होंने लिखा था कि “ईरान जल्दी और बुरी तरह समझौता करना चाहता है।” ट्रंप ने यह भी कहा कि “अमेरिका बातचीत करेगा या नहीं, इसका फैसला मैं करूंगा,” हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि “इस विचार के लिए हम खुले हैं।”
ट्रंप का यह संदेश उनके पहले के बयान के बिल्कुल विपरीत था। अगस्त में उन्होंने लिखा था कि “ईरान के इस्लामी गणराज्य के साथ न तो कोई बातचीत या वार्ता चल रही है और न ही ऐसी कोई बातचीत तय है।” उन्होंने यह भी ज़ोर देकर कहा था कि नौसैनिक नाकाबंदी लागू है और ग़लत तरीक़े से दावा किया था कि, होर्मुज़ जलडमरूमध्य “खुला हुआ और सामान्य रूप से संचालित” है।
उसी दिन उनके दामाद और विशेष दूत जेरेड कुशनर ने कहा था कि, ईरान के साथ बातचीत “शायद पहले से कहीं अधिक व्यापक” थी।
ट्रंप ने इसके अलावा ईरान के तेल को “वेनेज़ुएला की तरह अपने क़ब्ज़े में रखने” की धमकी देने, ईरान द्वारा बातचीत के लिए “लगातार फोन किए जाने” का दावा करने और यह कहने के बीच यह भीकहा है कि, युद्ध अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद समाप्त होगा।
ईरानी अधिकारियों ने इन दावों को ख़ारिज करते हुए इन्हें प्रचार और फारस की खाड़ी में अपनी इच्छा थोपने में वॉशिंगटन की विफलता को छिपाने की कोशिश बताया है। पूर्व में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर रह चुके रज़ाई ने बार-बार स्पष्ट किया है कि, यह जलमार्ग अभी भी बंद है और ईरान के नियंत्रण में है।
उन्होंने कहा है कि स्थिति में कोई बदलाव तभी हो सकता है जब अमेरिका युद्ध और नाकाबंदी समाप्त करे, ईरान की जमी हुई संपत्तियां जारी करे और क्षेत्रव्यापी युद्ध-विराम के लिए सहमत हो—जिसमें लेबनान और ग़ाज़ा भी शामिल हों।
तेहरान का रुख़ है कि, बिना ठोस गारंटी के कूटनीति एक जाल है। वॉशिंगटन द्वारा इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने के बाद ईरानी अधिकारियों ने कहा कि विश्वास को दोबारा स्थापित करने के लिए काम करने की जरूरत है, न कि व्हाइट हाउस से आने वाले विरोधाभासी नारों पर भरोसा करने की।
रज़ाई के अनुसार, जब तक इन सभी शर्तों को पूरी तरह पूरा नहीं किया जाता, तब तक बातचीत का कोई सवाल ही नहीं है और नुकसान की भरपाई के लिए दिए जा रहे बयान ऊर्जा और समुद्री संतुलन में आए बदलाव को पलट नहीं सकते।


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