सीरिया संकट: जूलानी की आर्थिक नीतियों के ख़िलाफ़ लगातार दूसरे दिन विरोध प्रदर्शन

सीरिया संकट: जूलानी की आर्थिक नीतियों के ख़िलाफ़ लगातार दूसरे दिन विरोध प्रदर्शन

लगातार दूसरे दिन सीरिया में ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की बेतहाशा बढ़ती कीमतों के विरोध में व्यापक अशांति देखने को मिली। ये विरोध प्रदर्शन अब 8 शहरों और प्रांतों तक फैल गए हैं। प्रदर्शनकारियों और पुलिस केंद्रों के बीच सीधा टकराव तथा प्रमुख संपर्क मार्गों को बंद किए जाने की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस स्थिति से «अबू मोहम्मद अल-जूलानी के शासन» पर भारी दबाव पड़ा है और देश की संसद को भी हस्तक्षेप के लिए सक्रिय होना पड़ा है।

आना समाचार एजेंसी ने अल-मयादीन के हवाले से बताया कि सीरिया में आर्थिक नीतियों को लेकर जनता का ग़ुस्सा एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। रिपोर्टों के अनुसार, अलेप्पो, इदलिब, हमा, दमिश्क़ ग्रामीण क्षेत्र (रिफ़ दमिश्क़), दारा, रक्का, दीर अल-ज़ोर और हसका शहरों तथा क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करते हुए ख़राब होती आर्थिक और जीवन-यापन की स्थिति के ख़िलाफ़ अपना विरोध दर्ज कराया।

ये विरोध प्रदर्शन तेजी से टकराव का रूप लेते गए और प्रदर्शनकारियों ने वाहनों के टायर जलाने के साथ-साथ प्रमुख तथा अंतरराष्ट्रीय मार्गों को अवरुद्ध कर दिया।

हालिया विरोध प्रदर्शनों में सबसे महत्वपूर्ण बात प्रदर्शनकारियों के नारों में आया बदलाव है। पिछले प्रदर्शनों के विपरीत, इस बार प्रदर्शनकारियों ने सीधे तौर पर «अबू मोहम्मद अल-जूलानी के शासन» को ख़राब आर्थिक परिस्थितियों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया और इस व्यवस्था को गिराने के समर्थन में नारे लगाए। मैदानी रिपोर्टों में विभिन्न शहरों में कई पुलिस केंद्रों पर प्रदर्शनकारियों के हमले की भी जानकारी दी गई है। यह स्थिति इस बात का संकेत मानी जा रही है कि सुरक्षा तंत्र जनता के बढ़ते ग़ुस्से को नियंत्रित करने में विफल हो रहा है।

इन तनावपूर्ण परिस्थितियों के जवाब में सीरिया के ऊर्जा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इस संकट की जड़ को तकनीकी और वैश्विक कारकों से जोड़ने की कोशिश की। मंत्रालय ने कहा कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि «ऊर्जा की वैश्विक आपूर्ति की असाधारण रूप से बढ़ी लागत» और साथ ही «बानियास रिफाइनरी को बड़े स्तर पर आवश्यक मरम्मत के लिए बंद किए जाने» के कारण हुई है।

हालांकि, ऐसा प्रतीत होता है कि अब तक ये स्पष्टीकरण नाराज़ जनता को संतुष्ट करने में सफल नहीं हुए हैं। उत्पन्न गंभीर स्थिति का असर संसद के राजनीतिक माहौल पर भी पड़ा है। इसी सिलसिले में सीरिया की संसद के कई सदस्यों ने एक संयुक्त अनुरोध पर हस्ताक्षर करते हुए देश के ऊर्जा मंत्री «मुहम्मद अल-बशीर» के साथ तत्काल बैठक बुलाने की मांग की है।

इन सांसदों ने ज़ोर देकर कहा कि, सरकार को परिवहन और खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में वृद्धि से पैदा हुई अस्थिरता को फैलने से रोकने के लिए तत्काल और व्यावहारिक समाधान पेश करना चाहिए, क्योंकि इन क़ीमतों में वृद्धि का सीधा असर समाज के निम्न आय वर्गों की आजीविका पर पड़ रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि, ईंधन संकट के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में जारी आर्थिक मंदी ने सीरिया को एक «संकट के भंवर» में धकेल दिया है।

आवागमन के मार्गों का बंद होना और शहरी केंद्रों में अस्थिरता यह संकेत देती है कि यदि सरकार अल्पावधि में सब्सिडी अथवा आपातकालीन ईंधन आपूर्ति जैसे उपायों के माध्यम से मध्यम और निम्न वर्गों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव को कम करने में विफल रहती है, तो मौजूदा विरोध प्रदर्शन दमिश्क़ में सत्ता के ढांचे के लिए एक स्थायी सुरक्षा चुनौती में बदल सकते हैं।

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