नीट पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, सरकार से तीखे सवाल

नीट पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, सरकार से तीखे सवाल

नीट-यूजी 2026 का प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा रद्द किए जाने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) से कड़े सवाल पूछे और उसे यूपीएससी जैसे संस्थानों से सीख लेने की सलाह दी। जवाब में एनटीए ने अदालत को आश्वस्त करने की कोशिश करते हुए कहा कि अब इस पूरे मामले की निगरानी स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं।

जवाबदेही तय करना जरूरी

हालांकि अदालत ने स्पष्ट कहा कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं की जाएगी, तब तक समस्या का समाधान नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी इस मामले में जवाबदेही तय करने तथा शिक्षा मंत्री और एनटीए प्रमुख के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

शुक्रवार को न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि, “वास्तविक समस्या तब तक समाप्त नहीं होगी, जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं की जाती।”

अदालत ने कहा कि केवल यह कह देने से कि कोई व्यक्ति जिम्मेदार होगा, कुछ हासिल नहीं होगा। प्रभावी कार्रवाई तब होगी जब यह स्पष्ट किया जाए कि वास्तव में किस व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है। जब तक जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान नहीं की जाएगी, तब तक केवल समितियों की बैठकें होती रहेंगी।

केंद्र सरकार से छह सप्ताह में हलफनामा मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह छह सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल करे, जिसमें यह बताया जाए कि भविष्य में प्रत्येक वर्ष परीक्षा आयोजित करने और उसे सफलतापूर्वक संपन्न कराने की प्रक्रिया किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी।

इसके साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में निर्धारित की।

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि एनटीए को यूपीएससी जैसे संस्थानों से सीखना चाहिए, जिन्होंने इतने बड़े पैमाने पर परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित की हैं और कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।

उन्होंने कहा:

“हमारे संस्थानों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे अस्थायी व्यवस्थाओं (एड-हॉक व्यवस्था) पर चलते हैं। किसी एक सक्षम अधिकारी की नियुक्ति कर दी जाती है और पूरा तंत्र उसी पर निर्भर हो जाता है। देशभर में यही स्थिति है, जबकि आवश्यकता इस बात की है कि संस्थान किसी व्यक्ति विशेष पर निर्भर न हों, बल्कि स्वयं संस्थागत क्षमता विकसित करें।”

इसरो के पूर्व अध्यक्ष से भी सवाल

अदालत ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन से भी बातचीत की, जो 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित निगरानी समिति के प्रमुख हैं।

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने पूछा:

“यदि समिति की निगरानी के बावजूद नीट प्रश्नपत्र लीक हो गया, तो आखिर विफलता कहां हुई?”

अदालत के लगातार तीखे सवालों के जवाब में राधाकृष्णन ने बताया कि विशेषज्ञ समिति ने 2025 और 2026 की परीक्षाओं के लिए 60 सिफारिशें दी थीं, जिनमें 35 दीर्घकालिक सुझाव शामिल थे। उनके अनुसार अधिकांश सिफारिशें लागू की जा चुकी हैं, जबकि कुछ पर अभी काम जारी है।

उन्होंने कहा कि मुख्य समस्या प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में उत्पन्न हुई।

“मोदी जी स्वयं मामले की निगरानी कर रहे हैं”

अदालत ने कहा कि जो कुछ हुआ है, वह लाखों छात्रों के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है, क्योंकि उन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा दी थी।

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा:

“हमें अपने युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए। यह अत्यंत संवेदनशील मामला है।”

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर है।

उन्होंने अदालत को बताया कि 21 जून को आयोजित होने वाली नीट की पुनर्परीक्षा के लिए नए सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं और:

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं व्यक्तिगत रूप से इसकी निगरानी कर रहे हैं।”

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