हिज़्बुल्लाह ने हमें दो हज़ार साल पीछे धकेल दिया है: किर्यात शिमोना के निवासी

हिज़्बुल्लाह ने हमें दो हज़ार साल पीछे धकेल दिया है: किर्यात शिमोना के निवासी

क़िर्यात शिमोना नामक यहूदी बस्ती के निवासियों ने इस क्षेत्र की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को लेकर गहरी निराशा व्यक्त की और कहा कि हिज़्बुल्लाह ने “हमें दो हज़ार साल पीछे लौटा दिया है।”

क़िर्यात शिमोना की नगरपालिका ने आज सुबह आम हड़ताल की घोषणा की और अधिकांश नगर सेवाओं को निलंबित कर दिया। इसी बीच, दर्जनों निवासी यरुशलम में इज़राली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के कार्यालय के सामने एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करते हुए दिखाई दिए और उन्होंने युद्धविराम समझौते की निंदा करते हुए तख्तियां उठाई थीं।

क़िर्यात शिमोना मोना के मेयर “अवीखाय स्टर्न” ने एक तख्ती उठा रखी थी, जिस पर लिखा था: “हिज़्बुल्लाह ट्रंप का धन्यवाद करता है।” यह उस समझौते के विरोध में था जो ट्रंप की निगरानी में, ईरान के दबाव के चलते हिज़्बुल्लाह के साथ युद्धविराम के रूप में किया गया।

क़िर्यात शिमोना की एक निवासी “ताली कोहेन” ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा: “यह बिना किसी संदेह के एक बड़ी गलती है। यह गुस्सा दिलाने वाला और शर्मनाक है।”

क़िर्यात शिमोना के निवासियों की नाराज़गी दरअसल उस सुरक्षा ढांचे पर सवाल है, जिसका दावा बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) की सरकार लंबे समय से करती रही है। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को बार-बार संघर्ष, डर और आर्थिक ठहराव का सामना करना पड़ रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सख्त सैन्य नीति के बावजूद स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकी है।

दूसरी ओर, हिज़बुल्लाह (Hezbollah) को उसके समर्थक एक “प्रतिरोध शक्ति” के रूप में देखते हैं, जो क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने का दावा करती है। उनका तर्क है कि अगर ऐसा प्रतिरोध न हो, तो एकतरफा दबाव और सैन्य कार्रवाई और अधिक बढ़ सकती है।

पूरे परिदृश्य में, कुछ विश्लेषक मानते हैं कि, हिज़्बुल्लाह का दबाव ही वह कारण बना, जिसने इज़रायल को युद्धविराम जैसे क़दम उठाने पर मजबूर किया—जिसे वे “रणनीतिक संतुलन” के रूप में देखते हैं।

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