दुनिया में हर 13वाँ व्यक्ति भूख का शिकार, हर साल 105 करोड़ टन भोजन बर्बाद: रिपोर्ट

दुनिया में हर 13वाँ व्यक्ति भूख का शिकार, हर साल 105 करोड़ टन भोजन बर्बाद: रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और अन्य संबंधित वैश्विक संस्थाओं की रिपोर्ट ‘द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड 2026’ के अनुसार, दुनिया में भूख का सामना करने वाले लोगों की संख्या 2025 में घटकर लगभग 64 करोड़ 50 लाख रह गई, जो वैश्विक आबादी का 7.8 प्रतिशत है। इससे पहले 2024 में लगभग 65 करोड़ 90 लाख लोग भूख का शिकार थे। हालाँकि, इस कमी को सकारात्मक प्रगति माना गया है, लेकिन वैश्विक संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि, सुधार की गति धीमी है और दुनिया अब भी 2030 तक भूख समाप्त करने के लक्ष्य से दूर है।

वैश्विक स्तर पर भूख की समस्या केवल भोजन की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध लोगों की आय, खाद्य पदार्थों की कीमतों, युद्धों, जलवायु परिवर्तन और भोजन के न्यायसंगत वितरण से भी है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2025 में दुनिया की लगभग एक-तिहाई आबादी पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन खरीदने में सक्षम नहीं थी। इसका अर्थ यह है कि बहुत से लोगों को खाने के लिए कुछ न कुछ तो मिल जाता है, लेकिन वे ऐसा भोजन प्राप्त नहीं कर पाते, जिसमें शरीर के विकास और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक पोषक तत्त्व उचित मात्रा में मौजूद हों।

दूसरी ओर, भोजन की बर्बादी वैश्विक खाद्य व्यवस्था की एक बड़ी समस्या बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की ‘फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट 2024’ के अनुसार, वर्ष 2022 के दौरान दुनिया में 105 करोड़ टन भोजन बर्बाद हुआ। यह उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कुल भोजन का लगभग 19 प्रतिशत था। इस अनुमान में घरों, रेस्तराँ और खुदरा बिक्री के क्षेत्र में बर्बाद होने वाला भोजन शामिल है, जबकि खेतों से बाजार तक पहुँचने के दौरान होने वाली खाद्य हानि का हिसाब अलग है।

रिपोर्ट के अनुसार, बर्बाद होने वाले भोजन में सबसे बड़ा हिस्सा घरों का था। घरों में लगभग 63 करोड़ 10 लाख टन भोजन बर्बाद हुआ, जो कुल बर्बादी का लगभग 60 प्रतिशत है। रेस्तराँ और अन्य खाद्य सेवाओं के क्षेत्र में 29 करोड़ टन, जबकि खुदरा बाजारों में 13 करोड़ 10 लाख टन भोजन बर्बाद हुआ। ये आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि भोजन की बर्बादी की समस्या केवल दुकानों या बड़े व्यावसायिक संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे रोकने के लिए घरेलू स्तर पर भी प्रयास करना आवश्यक है।

भोजन की बर्बादी के प्रभाव केवल भूख और कुपोषण तक सीमित नहीं रहते। भोजन के उत्पादन के लिए जमीन, पानी, ऊर्जा, उर्वरक, श्रम और परिवहन जैसे संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है। जब तैयार भोजन खाने के बजाय कूड़े में फेंक दिया जाता है, तो इन सभी संसाधनों का एक हिस्सा भी व्यर्थ हो जाता है।

यूएनईपी के अनुसार, भोजन की बर्बादी और खाद्य हानि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 8 से 10 प्रतिशत का योगदान करती हैं। इसके अलावा, कचरे में सड़ने वाले भोजन से मीथेन गैस पैदा होती है, जो जलवायु परिवर्तन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए सरकारों, खाद्य उत्पादक कंपनियों, सुपरमार्केट, रेस्तराँ और आम उपभोक्ताओं को मिलकर कदम उठाने होंगे। भोजन के बेहतर भंडारण, आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था में सुधार, अतिरिक्त भोजन को ज़रूरतमंदों तक पहुँचाने की प्रभावी व्यवस्था तथा घरों में खरीदारी और भोजन के इस्तेमाल की बेहतर योजना बनाकर बर्बादी को कम किया जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में 2030 तक खुदरा बिक्री और उपभोक्ता स्तर पर प्रति व्यक्ति भोजन की बर्बादी को आधा करने का लक्ष्य शामिल है। हालाँकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भोजन की बर्बादी का सही आकलन करना और देशों द्वारा प्रभावी नीतियों को लागू करना आवश्यक है।

popular post

अंसारुल्लाह: सऊदी अरब के सरकारी ठिकाने हमारे वैध निशाने हैं, हमले और तेज़ होंगे

अंसारुल्लाह: सऊदी अरब के सरकारी ठिकाने हमारे वैध निशाने हैं, हमले और तेज़ होंगे यमन

संयुक्त अरब अमीरात ने इस्राईली नागरिकों को वीज़ा देना किया शुरू

कुछ दिनों पहले इस्राईल के साथ अपने संबंधों को सार्वजनिक कर कई समझौते पर हस्ताक्षर

4 दिसंबर भारतीय नौसेना दिवस

4 दिसंबर भारतीय नौसेना दिवस हर देश किसी न किसी तारीख़ को नौसेना दिवस मनाया

कल से शुरू होगी टी-20 सीरीज, जानिए कितने बजे खेला जाएगा मैच

कल से शुरू होगी टी-20 सीरीज, जानिए कितने बजे खेला जाएगा मैच भारतीय टीम फ़िलहाल

कुछ हफ़्तों में मेड इन इंडिया कोरोना वैक्सीन आने की उम्मीद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

कोरोना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह एक सर्वदलीय बैठक की. पीएम मोदी ने

महाराष्ट्र में बीजेपी को विधान परिषद चुनाव में लगा तगड़ा झटका, सिर्फ एक सीट पर मिल सकी जीत

महाराष्ट्र में बीजेपी को विधान परिषद चुनाव में तगड़ा झटका लगा है. विधान परिषद की

5वें दौर की बैठक: किसानों का दो टूक जवाब हम सरकार से चर्चा नहीं, बल्कि ठोस जवाब चाहते हैं वो भी लिखित में,

कृषि कानूनों को लेकर पिछले 9 दिनों से धरने पर बैठे किसानों के साथ केंद्र

रूस की नसीहत, वेस्ट बैंक में एकपक्षीय कार्रवाई से बचे इस्राईल

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने मेडिटरेनीयन डायलॉग्स बैठक को संबोधित करते हुए कहा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *