इस्राईली जेलों में पत्रकार बुशरा अल-तवील के साथ दुर्व्यवहार; 50 दिनों से एकांत कारावास में
इस्राईली जेलों में बंद फ़िलिस्तीनी क़ैदियों की बिगड़ती स्थिति को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। फ़िलिस्तीनी क़ैदी क्लब के अनुसार, पत्रकार बुशरा अल-तवील को लगभग 50 दिनों से एकांत कारावास में रखा गया है। उन्हें कथित तौर पर बार-बार मारपीट, गैस के छिड़काव, गाली-गलौज और बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
संगठन ने हालिया मुलाक़ात के बाद बताया कि सुरक्षाकर्मी उनकी कोठरी में बार-बार प्रवेश करते हैं और उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। अल-तवील ने बताया कि उनकी कोठरी में चौबीसों घंटे निगरानी की जाती है। उनकी आँखों, त्वचा और हाथों में सूखापन है, जबकि हथकड़ियों के कारण हाथों में सुन्नपन भी महसूस होता है। वह पहले खुजली की बीमारी से भी पीड़ित थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें पर्याप्त भोजन, साफ पानी, अतिरिक्त कपड़े और कपड़े धोने की सुविधा नहीं मिल रही है। नल के पानी का रंग पीला होने के बावजूद उन्हें इसे पीना पड़ रहा है। बिस्तर और कंबल की खराब स्थिति ने उनकी परेशानियाँ और बढ़ा दी हैं।
अल-तवील को पहले दामून जेल से रामले जेल के एकांत कारावास में भेजा गया था। बाद में, 4 अक्टूबर 2026 को स्थानांतरण संबंधी दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कराने के बावजूद उन्हें बेयरशेबा स्थित ओहेली ओज़ जेल के एकांत कारावास में भेज दिया गया। इस्राईली अधिकारियों ने उनकी प्रशासनिक हिरासत चार महीने और बढ़ा दी है।
क़ैदी क्लब ने अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति सहित मानवाधिकार संगठनों से तत्काल हस्तक्षेप, एकांत कारावास समाप्त करने, चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और उनकी रिहाई सुनिश्चित करने की अपील की है।
ओफ़र और जानोत जेलों में भी गंभीर आरोप
इस बीच, फ़िलिस्तीनी क़ैदी मामलों के आयोग ने ओफ़र जेल में बीमार कैदियों को दवाइयों और आवश्यक उपचार से वंचित रखने तथा त्वचा रोग फैलने का आरोप लगाया है। क़ैदियों को कथित तौर पर अपर्याप्त और खराब भोजन, कपड़ों की कमी तथा सफ़ाई की सामग्री के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। जेल में छापेमारी, मारपीट और बाहर निकलने तथा नहाने के समय में कटौती की शिकायतें भी सामने आई हैं।
वहीं, जानोत जेल में क़ैदियों ने चिकित्सा केंद्र और वकीलों से मुलाक़ात के लिए ले जाते समय अपमानजनक व्यवहार किए जाने की शिकायत की है। क़ैदी मामलों के मीडिया कार्यालय ने क़ैदियों की गरिमा, चिकित्सा सेवाओं और कानूनी सहायता तक उनकी पहुँच सुनिश्चित करने की माँग की है।


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