शिक्षा और नैतिकता को अमेरिका और इस्राईल की आक्रामकता के ख़िलाफ़ ‘लोहे की ढाल’ बनाएं छात्र: मुजतबा ख़ामेनेई
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह सैय्यद मुजतबा ख़ामेनेई ने छात्रों से ज्ञान, कौशल और नैतिकता हासिल करने का आग्रह किया है। उन्होंने शिक्षा को अमेरिका और इस्राईल की आक्रामकता के ख़िलाफ़ एक रक्षा साधन बताया। मंगलवार को स्कूलों और विश्वविद्यालयों के दोबारा खुलने के अवसर पर जारी एक संदेश में सुप्रीम लीडर मुजतबा ख़ामेनेई ने कहा कि, आस्था और नैतिकता से जुड़ा ज्ञान एक ऐसी “लोहे की ढाल” का काम कर सकता है, जो अमेरिका और इस्राईल की आक्रामकता का मुकाबला करने में सक्षम हो।
उन्होंने कहा:
“आज, ऐसे दौर में जब वर्चस्ववादी व्यवस्था की क्रूरता—विशेष रूप से आपराधिक अमेरिकी सरकार और गढ़े हुए इस्राईली शासन की—चरम पर है, ज्ञान पर आधारित और धर्मपरायणता तथा नैतिकता से जुड़ी शक्ति एक ऐसी लोहे की ढाल और एक तेज़ तलवार है, जो मानवता के ख़िलाफ़ आक्रमण करने वालों के हाथ काट सकती है।”
यह संदेश ईरान में नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत के अवसर पर जारी किया गया। सुप्रीम लीडर ने ईरान के भविष्य को आकार देने में युवा पीढ़ी की भूमिका पर ज़ोर दिया।
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि, वे स्कूलों और विश्वविद्यालयों में बिताए अपने वर्षों का उपयोग अपने ज्ञान का विस्तार करने, व्यावहारिक कौशल विकसित करने और अपने परिवारों, साथी नागरिकों तथा समाज के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए करें। उन्होंने कहा कि, छात्रों की जिम्मेदारी है कि वे ज्ञान की सीमाओं को आगे बढ़ाकर तथा वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति हासिल करके ईरान की उन्नति में योगदान दें।
उन्होंने छात्रों को आलोचनात्मक सोच और रचनात्मकता विकसित करने के साथ-साथ अपनी राष्ट्रीय पहचान, सांस्कृतिक स्वतंत्रता, फ़ारसी भाषा और इस्लामी गणराज्य के प्रतीकों को संरक्षित रखने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
हालिया युद्ध का उल्लेख करते हुए मुजतबा ख़ामेनेई ने छात्रों से ईरान के स्कूलों और विश्वविद्यालयों से जुड़े उन लोगों को याद रखने का आह्वान किया, जो मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के दोबारा खुलने पर कुछ छात्रों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों की अनुपस्थिति महसूस होगी।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इस्राईल के हमलों में ईरान के 296 छात्र और 65 से अधिक शिक्षक मारे गए हैं। युद्ध के पहले दिन हुए सबसे घातक हमलों में से एक में अमेरिकी बलों ने मीनाब स्थित शजरे तैय्यबा प्राथमिक विद्यालय पर दोहरा हमला किया, जिसमें 160 से अधिक छात्र और शिक्षक मारे गए। सुप्रीम लीडर ने कहा कि, इस वर्ष उन शहीद छात्रों, प्रोफेसरों और शिक्षकों की अनुपस्थिति महसूस होगी।
उन्होंने आगे कहा:
“यह शोक हमारे मन को अच्छाई और बुराई के बीच वास्तविक संघर्ष तथा सत्य और असत्य के बीच लड़ाई की वास्तविक प्रकृति की ओर निर्देशित करेगा। उन्होंने शिक्षकों और विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों की भूमिका की भी सराहना की और कहा कि लगातार पीढ़ियों को शिक्षित करने में उनके योगदान को अधिक मान्यता मिलनी चाहिए।
अयातुल्लाह ख़ामेनेई ने शिक्षकों की आजीविका को लेकर मौजूद चिंताओं को भी स्वीकार किया और उम्मीद जताई कि उनकी आर्थिक परिस्थितियों में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली पीढ़ियों के वे छात्र, जिन्होंने ईरान की रक्षा की थी, अब स्कूलों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश करने वाली नई पीढ़ी के लिए उदाहरण के रूप में काम करेंगे।
मुजतबा ख़ामेनेई ने छात्रों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों को नए शैक्षणिक वर्ष की बधाई दी और आशा व्यक्त की कि युवा पीढ़ी विज्ञान, शिक्षा और राष्ट्रीय विकास के क्षेत्र में और अधिक सफलता हासिल करेगी।


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