ईरान, अमेरिका के साथ दोबारा युद्ध शुरू होने की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है: अराक़ची

ईरान, अमेरिका के साथ दोबारा युद्ध शुरू होने की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है: अराक़ची

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने कहा है कि, ईरान अमेरिका के साथ संभावित रूप से दोबारा युद्ध शुरू होने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसके बावजूद वह कूटनीति के जरिए विवाद का समाधान निकालने की कोशिश जारी रखे हुए है।

रविवार को NBC News को दिए एक साक्षात्कार में अराक़ची ने कहा कि ईरान किसी भी नए अमेरिकी आक्रमण का सामना करने के लिए तैयार है, चाहे स्थिति बेहद विनाशकारी युद्ध तक ही क्यों न पहुंच जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि, शांति और बातचीत का रास्ता अभी भी खुला है और इसका चुनाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को करना है।

यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें कहा गया था कि, ट्रंप अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई या बमबारी शुरू करने पर विचार कर सकते हैं। अराक़ची ने कहा कि, ईरान ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान बैठकों और अन्य संपर्कों के माध्यम से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए हर संभव कूटनीतिक रास्ता आजमाया है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य मौजूदा संकट का एक प्रमुख मुद्दा है। अराक़ची के अनुसार, ईरान युद्ध समाप्त करने वाले किसी समझौते के हिस्से के रूप में इसे फिर से खोलने के लिए तैयार है। इसके बदले ईरान अपने जमे हुए धन और परिसंपत्तियों को जारी किए जाने तथा अपने तेल की बिक्री जारी रखने की अनुमति चाहता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उन्होंने ईरान के प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया है। हालांकि, अराक़ची का कहना है कि इस अस्वीकृति की आधिकारिक सूचना मध्यस्थों के जरिए अभी तक ईरान को नहीं मिली है। उन्होंने ट्रंप के संदेशों को “विरोधाभासी” बताया।

अराक़ची ने जून में पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए एक समझौता ज्ञापन का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इसमें अस्थायी युद्ध-विराम की योजना थी, लेकिन कुछ ही दिनों में यह समझौता विफल हो गया क्योंकि अमेरिका ने अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं किया।

अराक़ची ने कहा कि ईरान अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की परवाह नहीं करता और उसका ध्यान अपने राष्ट्रीय हितों पर है। उन्होंने जोर दिया कि सम्मान, न्याय और ईरानी जनता के वैध अधिकारों को सुनिश्चित करने वाली बातचीत ही आगे का रास्ता है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि ईरान सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर अपनी क्षमता तथा प्रतिबंधों का सामना करने की क्षमता पहले ही प्रदर्शित कर चुका है।

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