ईरानी सेना ने जॉर्डन में अमेरिकी लड़ाकू विमानों और ईंधन-टैंकर विमानों को निशाना बनाया
ईरान की इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी/सिपाह-ए-पासदारान) ने दावा किया है कि ‘नस्र-2’ अभियान की 14वीं लहर के दौरान जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया।
सिपाह के अनुसार, पिछले वर्ष क़तर के अल-उदीद एयरबेस पर हुए हमले के बाद अमेरिकी सेना ने अपना क्षेत्रीय कमान केंद्र (सेंटकॉम) क़तर से हटाकर जॉर्डन के अल-अज़रक सैन्य अड्डे पर स्थानांतरित कर दिया था। बयान में कहा गया कि इसी अड्डे से फ़िलिस्तीन, ईरान और लेबनान के विरुद्ध अमेरिकी सैन्य अभियानों का संचालन किया जाता है। इसके अलावा वहाँ अमेरिकी वायुसेना के एफ-35, एफ-15, एफ-16 लड़ाकू विमान तथा कई ईंधन-टैंकर विमान भी तैनात हैं।
सिपाह ने आरोप लगाया कि बीती रात अमेरिकी सेना ने जॉर्डन स्थित अपने ठिकानों से ईरान के दक्षिणी शहर बंदर अब्बास में कई पुलों, रिहायशी इलाकों और एक जल पंपिंग केंद्र सहित नागरिक ठिकानों पर हमला किया।
बयान के अनुसार, इसके जवाब में ‘या साहिब-अज़-ज़मान (अ.स.) अदरिक्नी’ के नारे के साथ दो चरणों में कई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से अमेरिकी विमानों को निशाना बनाया गया। सिपाह का दावा है कि इस हमले में कई अमेरिकी ईंधन-टैंकर और लड़ाकू विमान नष्ट हो गए तथा कई अन्य गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए।
सिपाह ने अपने बयान में जॉर्डन की जनता और सेना से अमेरिकी सैन्य हितों के विरुद्ध कार्रवाई करने की भी अपील की।
आईआरजीसी ने जॉर्डन के नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा:
“जॉर्डन के सम्मानित नागरिकों! आप उस पवित्र भूमि के निवासी हैं जहाँ अनेक ईशदूतों के पदचिह्न हैं। आप दुनिया के उन लोगों में हैं जिनका फ़िलिस्तीन से सबसे गहरा संबंध है और जो ग़ाज़ा तथा पश्चिमी तट के पीड़ितों के दर्द को सबसे अच्छी तरह समझते हैं।
पिछले वर्ष क़तर के अल-उदीद सैन्य अड्डे पर हमारे हमले के बाद, अमेरिकी सेना ने अपने क्षेत्रीय कमान केंद्र (सेंटकॉम) को भारी हमलों के खतरे से बचाने के लिए क़तर से हटाकर जॉर्डन के अल-अज़रक क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया। तब से फ़िलिस्तीन और अन्य इस्लामी देशों के विरुद्ध अमेरिकी सैन्य अभियानों का संचालन वहीं से किया जा रहा है।
नस्र-2 अभियान की 15वीं लहर: कुवैत में HIMARS और अमेरिकी ठिकानों पर हमला
सिपाह-ए-पासदारान ने एक अन्य बयान में दावा किया कि ‘नस्र-2’ अभियान की 15वीं लहर के दौरान उसकी जमीनी सेना ने “या महदी अदरिक्नी” के नारे के साथ कुवैत में तैनात अमेरिकी HIMARS मिसाइल प्रणालियों और उनके लॉन्चरों को निशाना बनाया।
बयान के अनुसार, ड्रोन और मिसाइलों से किए गए इस हमले में कुवैत स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों तथा अमेरिका और इस्राईल समर्थित बताए गए सरकार-विरोधी समूहों के ठिकानों पर भी प्रहार किया गया।
सिपाह का दावा है कि इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में सरकार-विरोधी लड़ाके और अमेरिकी विशेष बलों के सैनिक मारे गए। बयान में यह भी कहा गया कि जवाबी सैन्य अभियान आगे भी जारी रहेगा।


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