अमेरिका की जनता के नाम, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड का पत्र

अमेरिका की जनता के नाम, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड का पत्र

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के प्रवक्ता सरदार मोहिब्बी ने कहा है कि, उनके संगठन ने अमेरिका की जनता के नाम एक विस्तृत पत्र तैयार किया है। उन्होंने कहा, “सबसे पहले मैं यह कहना चाहता हूँ कि यह एक तार्किक, संवेदनशील, वास्तविक और साथ ही विस्तृत पत्र है। यह मीडिया में माहौल बनाने के लिए किया गया कोई प्रचार नहीं है।

अगर संघर्षों का रूप बदला, तो नए हथियार के साथ मैदान में उतरेंगे

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि, अगर संघर्षों का रूप बदलता है, तो हम नए हथियार के साथ मैदान में उतरेंगे। मोहिब्बी के अनुसार, अमेरिका के पास दुनिया भर में सैकड़ों सैन्य ठिकाने हैं और उसका सैन्य बजट बहुत बड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि, अगर अमेरिका का उद्देश्य केवल अपने देश की रक्षा करना है, तो उसे इतने विदेशी सैन्य ठिकानों और इतने बड़े सैन्य ख़र्च की ज़रूरत क्यों है। उन्होंने दावा किया कि, ईरान का सैन्य बजट अमेरिका के मुक़ाबले बहुत कम है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि, अमेरिका अफगानिस्तान और यमन जैसे मामलों में अपने सैन्य उद्देश्यों को हासिल नहीं कर सका। उनके अनुसार, अमेरिकी सेना के पास बहुत अधिक हथियार और पैसा होने के बावजूद उसे कई जगहों से पीछे हटना पड़ा है।

मोहिब्बी ने अमेरिका की आंतरिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका प्राकृतिक संसाधनों और आर्थिक ताकत से संपन्न देश है, फिर भी वहां लाखों लोग ग़रीबी में रहते हैं और बड़ी संख्या में लोग बेघर हैं। उन्होंने अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था की भी आलोचना की और कहा कि कई लोगों के लिए इलाज और एंबुलेंस का ख़र्च बड़ी समस्या हो सकता है।

ग़ाज़ा नरसंहार का उल्लेख

ग़ाज़ा के मुद्दे पर उन्होंने अमेरिका पर इस्राईल को सैन्य सहायता देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि, अमेरिकी जनता को यह सोचना चाहिए कि, उनके देश की विदेश नीति और सैन्य सहायता का असर दूसरे देशों के आम लोगों पर क्या पड़ता है। उन्होंने ग़ाज़ा में मारे गए लोगों और बच्चों की संख्या के बारे में भी कई दावे किए।

मोहिब्बी ने IRGC को आतंकवादी संगठन कहे जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पत्र में IRGC के गठन, उसकी गतिविधियों और ईरान के लोगों के लिए किए गए कामों के बारे में जानकारी दी गई है। उनका कहना था कि, अमेरिकी जनता को खुद इन बातों को पढ़कर समझना चाहिए।

परमाणु कार्यक्रम के बारे में उन्होंने अमेरिका के पुराने आरोपों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि, अमेरिका लंबे समय से दावा करता रहा है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने पर भी सवाल उठाया और कहा कि अगर समझौते का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था, तो अमेरिका उससे बाहर क्यों निकला?

अमेरिका का असली उद्देश्य परमाणु मुद्दा नहीं, बल्कि ईरान पर राजनीतिक और आर्थिक नियंत्रण स्थापित करना है

मोहिब्बी ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका का असली उद्देश्य केवल परमाणु मुद्दा नहीं, बल्कि ईरान पर राजनीतिक और आर्थिक नियंत्रण स्थापित करना है। यह उनका आरोप है, जिसका अमेरिका अलग दृष्टिकोण रखता है।

अमेरिका के दबावों और सैन्य कार्रवाइयों के बावजूद ईरान पीछे नहीं हटा

अंत में उन्होंने कहा कि ईरान संभावित नए सैन्य संघर्षों के लिए तैयार है और ज़रूरत पड़ने पर नए हथियारों का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने दावा किया कि, अमेरिका के कई दबावों और सैन्य कार्रवाइयों के बावजूद ईरान पीछे नहीं हटा और भविष्य में भी अपने देश की रक्षा करता रहेगा। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार अंततः अमेरिका को अपनी सैन्य नीति बदलकर क्षेत्र से पीछे हटना पड़ेगा।

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