एक ही नंबर के कई-कई वोटर कार्ड, TMC का चुनाव आयोग को अल्टीमेटम
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने एक ही नंबर के कई वोटर पहचान पत्र के मामले को “वोटर लिस्ट घोटाला” करार देते हुए चुनाव आयोग से 24 घंटे के भीतर अपनी गलती स्वीकार करने, 100 दिनों के भीतर मतदाता सूची को गलतियों से मुक्त करने और तत्काल जांच शुरू करने की मांग की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने सागरिका घोष और कीर्ति आज़ाद के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐसे कई मामलों का हवाला दिया, जिनमें अलग-अलग लोगों के पहचान पत्र का नंबर एक ही है।
TMC ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के रानीनगर विधानसभा क्षेत्र और हरियाणा के बरोवाला क्षेत्र से ऐसी 129 उदाहरण पेश किए, जहां अलग-अलग लोगों के पहचान पत्र का नंबर एक ही है। पार्टी ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग द्वारा रविवार को दी गई सफाई को अस्वीकार कर दिया और चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे में आयोग ने अपनी गलती स्वीकार नहीं की, तो मंगलवार को ऐसे और दस्तावेज़ पेश किए जाएंगे, जो चुनाव आयोग के लिए शर्मिंदगी और बदनामी का कारण बनेंगे।
TMC ने जनता के सामने पेश किए सबूत
TMC नेताओं ने सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनता के सामने दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत किए। एक मामले में, एक ही नंबर के पहचान पत्र हरियाणा और बंगाल में तीन अलग-अलग मतदाताओं को जारी किए गए थे। दो कार्ड एक ही नाम से हरियाणा और बंगाल में अलग-अलग जारी किए गए थे, जबकि तीसरे व्यक्ति का कार्ड पश्चिम बंगाल के रानीनगर क्षेत्र से जारी हुआ था।
डेरेक ओ’ब्रायन ने बताया कि इस तरह के कई मामले सामने आए हैं, जहां बीजेपी-शासित राज्यों के वोटर आईडी कार्ड और पश्चिम बंगाल के वोटर आईडी कार्ड के नंबर समान हैं। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि केवल पश्चिम बंगाल के मतदाता ही राज्य में मतदान करें। यदि अन्य राज्यों से लोगों को लाकर मतदान कराया जाएगा, तो यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।
निर्माण मजदूरों का बतौर वोटर पंजीकरण
डेरेक ओ’ब्रायन ने यह भी खुलासा किया कि चुनाव से पहले निर्माण परियोजनाओं की घोषणा की जाती है और अन्य राज्यों से निर्माण मजदूरों को लाया जाता है, ताकि वे मतदान कर सकें। उन्होंने चुनाव आयोग को मंगलवार सुबह 9 बजे तक का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि आयोग इस अवधि में अपनी गलती स्वीकार नहीं करता, तो और अधिक दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएंगे, जिससे उसकी और अधिक बदनामी होगी।
उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा रविवार को दी गई सफाई को खारिज करते हुए कहा, “चुनाव आयोग ग़लती स्वीकार कर रहा है, लेकिन उसे मान नहीं रहा है। यदि उसने अपनी गलती को स्वीकार नहीं किया, तो हम मंगलवार सुबह 9 बजे एक दस्तावेज़ पेश करेंगे। हमारा केवल इतना ही अनुरोध है कि मार्च, अप्रैल और मई के तीन महीनों में 100 दिनों के भीतर मतदाता सूची को पूरी तरह साफ किया जाए।”
घोटाले की जांच का आदेश दिया जाए
TMC नेता सागरिका घोष ने इसे बड़ा घोटाला बताते हुए तत्काल जांच की मांग की। उन्होंने कहा, “यह घोटाला, स्कैंडल और एक आपराधिक कृत्य है। केवल अखबार में बयान देना पर्याप्त नहीं है। पूरी तरह से जांच होनी चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि बीजेपी में कौन इसका मास्टरमाइंड है?” कीर्ति आज़ाद ने कहा, “चुनाव आयोग सरकार के हाथों की कठपुतली बनकर रह गया है।”
चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?
चुनाव आयोग ने रविवार को यह स्वीकार किया कि विभिन्न राज्यों में एक ही नंबर वाले अलग-अलग पहचान पत्र जारी किए गए हैं, लेकिन उसने सफाई दी कि इसका मतलब यह नहीं कि वे डुप्लीकेट या फर्जी मतदाता हैं। चुनाव आयोग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि “संख्या भले ही एक जैसी हो, लेकिन अन्य विवरण, जैसे विधानसभा क्षेत्र और मतदान केंद्र अलग-अलग होते हैं।”
आयोग ने दावा किया कि इस वजह से किसी भी मतदाता के लिए यह संभव नहीं है कि वह अपने निर्धारित विधानसभा क्षेत्र और मतदान केंद्र के अलावा किसी अन्य स्थान पर मतदान कर सके। चुनाव आयोग ने यह भी आश्वासन दिया कि “एक ही नंबर के दो पहचान पत्रों के किसी भी मामले को नए, अनूठे नंबर जारी कर हल किया जा सकता है।” TMC ने चुनाव आयोग की इस सफाई को “कबूलनामा” करार देते हुए कहा कि “चुनाव आयोग द्वारा जारी नोट, ममता बनर्जी द्वारा उठाए गए मुद्दे की पुष्टि करता है।”
गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को उठाया था और बताया था कि बंगाल के कई मतदाताओं के पहचान पत्र के नंबर वही हैं, जो हरियाणा, गुजरात और राजस्थान में मतदाताओं के पहचान पत्रों के हैं। ममता बनर्जी का तर्क है कि यह ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण के जरिए संभव हुआ है। उन्होंने दो कंपनियों के नाम भी लिए, जिनके बारे में उनका दावा है कि बीजेपी ने उन्हें मतदाता सूची में हेरफेर करने के लिए नियुक्त किया है।


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