ईरान-इज़रायल युद्ध के बीच तेल अवीव और अबू धाबी के बीच सैन्य सहयोग में इज़ाफ़ा
फ़िलिस्तीनी मुद्दे पर अरब दुनिया की एकजुटता आखिर किस दिशा में जा रही है। जिस इज़रायल पर ग़ाज़ा, लेबनान और क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाने के आरोप लगते रहे हैं, उसी के साथ संयुक्त अरब अमीरात का बढ़ता सैन्य सहयोग पश्चिम एशिया की राजनीति में नई चिंताएँ पैदा कर रहा है। उन्नत हथियार और प्रणालियों, लेज़र रक्षा तकनीक और सैन्य विशेषज्ञों की तैनाती यह संकेत देती है कि अबू धाबी केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा और सैन्य क्षेत्र में भी गहरे सहयोग की राह पर आगे बढ़ रहा है।
ब्रिटिश अख़बार Financial Times ने रिपोर्ट दी है कि इज़रायली शासन ने अपने कुछ हथियार सिस्टम, जिनमें एक लेज़र प्रणाली भी शामिल है, संयुक्त अरब अमीरात को भेजी है।
दो जानकार सूत्रों के अनुसार, इज़रायली शासन ने “स्पेक्ट्रो” (Spectro) नामक एक हल्का खोज एवं निगरानी तंत्र यूएई को सौंपा है, जो 20 किलोमीटर तक की दूरी से ड्रोन की पहचान और निगरानी करने में सक्षम है। इसके अलावा उसने अपनी लेज़र रक्षा प्रणाली “मागेन ओर” (Magen Or) का एक संस्करण भी यूएई को भेजा है।
इज़रायली शासन ने इस लेज़र प्रणाली—जिसका उपयोग कम दूरी की मिसाइलों और ड्रोन को रोकने के लिए किया जाता है—का पहली बार इसी वर्ष की शुरुआत में कब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों के शहरों को हिज़्बुल्लाह (Hezbollah) के मिसाइल हमलों से बचाने के लिए इस्तेमाल किया था।
आलोचकों का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में हथियारों की होड़ को तेज कर सकता है और खाड़ी देशों को ऐसे सामरिक गठबंधनों में बाँध सकता है, जिनके परिणाम व्यापक अस्थिरता के रूप में सामने आ सकते हैं। साथ ही, फ़िलिस्तीन के समर्थन का दावा करने वाले अरब नेतृत्व के सामने यह एक नैतिक और राजनीतिक प्रश्न भी खड़ा करता है कि क्या क्षेत्रीय हितों और सुरक्षा समझौतों के नाम पर फ़िलिस्तीनी जनता के मुद्दे को पीछे धकेला जा रहा है??
अबू धाबी की यह नीति अरब जनमत के एक बड़े हिस्से में असंतोष और आलोचना को जन्म दे सकती है। एक जानकार सूत्र ने बताया कि इस खाड़ी देश में और भी हथियार प्रणालियाँ तैनात की गई हैं। साथ ही, अधिक इज़रायली सैन्यकर्मियों को भी वहाँ भेजा गया है। सूत्र के अनुसार, “वहाँ मौजूद बलों की संख्या कम नहीं है।”


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