दुश्मन सैनिकों के लिए युद्धबंदी शिविर तैयार कर दिए गए हैं: आईआरजीसी
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने एक बयान जारी कर ऑपरेशन ईगल क्लॉ में अमेरिका की अपमानजनक विफलता की वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए कहा कि दक्षिण इस्फहान में अमेरिकियों की हार और तथाकथित “तीसरे थोपे गए युद्ध” के बीच मिली असफलता, व्हाइट हाउस के लिए एक और अपमान तथा वैश्विक घमंड की शक्तियों की ईरानी राष्ट्र के सामने तयशुदा पराजय का प्रतीक है।
बयान में चेतावनी दी गई है कि, इस देश के दुश्मनों की ओर से किसी भी नए आक्रमण का जवाब उनकी अपेक्षा से कहीं अधिक कड़ा और रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता के स्तर पर दिया जाएगा।
बयान में कहा गया कि मातृभूमि की रक्षा के लिए तैनात सेनाएं सभी मोर्चों पर—रक्षा, सुरक्षा और खुफिया स्तर पर—पूर्ण रूप से तैयार हैं। इसमें दावा किया गया कि ईरान की सशस्त्र सेनाओं की खुफिया पकड़ और सैन्य शक्ति इतनी व्यापक है कि दुश्मन की विभिन्न योजनाओं, यहां तक कि संभावित जमीनी हमले के मुकाबले के लिए भी विस्तृत तैयारी कर ली गई है। बयान के अनुसार, हालात का अनुमान लगाकर इस स्तर तक तैयारी की गई है कि संभावित आक्रमणकारियों के स्वागत के लिए युद्धबंदी शिविर तक तैयार कर दिए गए हैं।
अमेरिका को नेतन्याहू के हाथों का खिलौना बनने से बचना चाहिए
आगे कहा गया कि, अमेरिकियों को वास्तविकता स्वीकार कर लेनी चाहिए और स्वयं को अपराधी तथा बच्चों के हत्यारे बताए गए बेंजामिन नेतन्याहू के हाथों का खिलौना बनने से बचना चाहिए। बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिका को क्षेत्र में अपने उन सैन्य अड्डों की स्थिति पर भी नज़र डालनी चाहिए जो ईरानी सशस्त्र बलों के निर्णायक और विनाशकारी हमलों के बाद कथित रूप से जलकर तबाह हो चुके हैं और अब उनके पुनर्निर्माण की कोई संभावना नहीं बची।
इसमें दावा किया गया कि अमेरिका के सामने अब केवल एक ही विकल्प है—अपने मानव और सैन्य अवशेष समेटकर बिना किसी शर्त के क्षेत्र से शीघ्र निकल जाना।
बयान के अंत में इस बात पर जोर दिया गया कि ईरान अपनी सैन्य रणनीतियों को आगे भी जारी रखेगा, विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य के नियंत्रण और प्रबंधन को। बयान के मुताबिक, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखना और उसके प्रतिरोधक प्रभाव की छाया अमेरिका तथा उसके क्षेत्रीय सहयोगियों पर कायम रखना, ईरान की निश्चित रणनीति है।
साथ ही कहा गया है कि, भविष्य में सभी देशों के व्यापारिक जहाजों और नौकाओं के आवागमन को सुगम बनाया जाएगा, लेकिन अमेरिकी, इज़रायली और उनके सहयोगियों से जुड़े जहाज इस व्यवस्था से बाहर रहेंगे।


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