सिर्फ़ दोस्ती नहीं, अब समझौता भी: अज़रबैजान और इज़रायल के रिश्ते पर ट्रंप की मुहर

सिर्फ़ दोस्ती नहीं, अब समझौता भी: अज़रबैजान और इज़रायल के रिश्ते पर ट्रंप की मुहर

अब जबकि अज़रबैजान और इज़रायल के संबंध वर्षों से रणनीतिक सहयोग से आगे बढ़ चुके हैं, अब खबरें आ रही हैं कि, ट्रंप सरकार बाकू को अब्राहम समझौतों में शामिल करने की कोशिश कर रही है। फार्स न्यूज़ एजेंसी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के अनुसार, अज़रबैजान और इज़रायल के रिश्ते अब एक औपचारिक चरण में प्रवेश करने के कगार पर हैं।

रॉयटर्स को मिली जानकारी के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप की सरकार बाकू के साथ अब्राहम समझौतों में शामिल होने को लेकर बातचीत कर रही है, एक प्रतीकात्मक लेकिन अर्थपूर्ण क़दम जो वर्षों पुरानी दोस्ती को एक बहुपक्षीय समझौते में बदल सकता है। पाँच विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि, अज़रबैजान के साथ हो रही बातचीत इस समझौते को विस्तार देने के सबसे गंभीर प्रयासों में से एक मानी जा रही है, और आने वाले हफ्तों या महीनों में समझौता संभव हो सकता है।

हालाँकि अज़रबैजान और कुछ मध्य एशियाई देशों जैसे कज़ाकिस्तान पहले से ही इज़रायल के साथ राजनयिक संबंध रखते हैं, लेकिन यह नई योजना सैन्य, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को गहराई देने पर केंद्रित है। इस रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप सरकार की दृष्टि में मध्य एशिया के मुस्लिम देशों को अब्राहम समझौतों में जोड़ना एक व्यावहारिक रणनीति है, विशेषकर तब जब सऊदी अरब अभी भी संबंध सामान्य बनाने को एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना से जोड़कर देखता है, और ग़ाज़ा युद्ध के चलते पूरे इस्लामी जगत में विरोध की लहर है।

फिर भी, अज़रबैजान और आर्मेनिया के बीच का विवाद इस प्रक्रिया में एक बड़ी रुकावट है। तीन सूत्रों ने पुष्टि की है कि ट्रंप प्रशासन की नज़र में बाकू को समझौतों में शामिल करने से पहले यरवन के साथ विवाद सुलझाना ज़रूरी है। इसी संदर्भ में, ट्रंप के पश्चिम एशिया मामलों के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ ने बीते मार्च में बाकू का दौरा किया और राष्ट्रपति इल्हाम अलीएव से मुलाकात की। साथ ही, उनके वरिष्ठ सलाहकार आर्ये लाइटस्टोन ने इसी साल वसंत में अज़रबैजान के राष्ट्रपति के साथ अब्राहम समझौतों पर चर्चा की थी।

रिपोर्टों के अनुसार, बाकू ने इस योजना को मध्य एशिया में फैलाने की संभावनाएं जानने के लिए कज़ाकिस्तान, जैसे देशों से भी संपर्क किया है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उज़्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान या किर्गिज़स्तान इस बातचीत में शामिल हैं या नहीं। जहाँ अमेरिकी विदेश मंत्रालय अब्राहम समझौतों के विस्तार को व्हाइट हाउस की प्राथमिकता बता रहा है, वहीं अज़रबैजान सरकार, ट्रंप प्रशासन, इज़रायली विदेश मंत्रालय और वॉशिंगटन में कज़ाकिस्तान के दूतावास ने इस रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

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