नेतन्याहू की पार्टी ने अरब दलों पर निकाली भड़ास, चुनाव में धांधली का लगाया आरोप
नई सरकार बनाने के लिए आवश्यक सीटें हासिल करने में नाकाम रहने के बाद नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने अरब दलों पर चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया। पार्टी का दावा है कि, उसके पास रिश्वतखोरी, जालसाज़ी, धमकी और मतदान केंद्रों पर अनियमितताओं से जुड़े सैकड़ों सबूत मौजूद हैं।
फार्स न्यूज़ एजेंसी के अंतरराष्ट्रीय समूह के अनुसार, हिब्रू मीडिया ने बताया कि विपक्षी दलों, जिनका नेतृत्व गादी आइज़ेनकोट कर रहे हैं, की तुलना में आगे रहने के बावजूद नेतन्याहू अपनी संसदीय गठबंधन की ताकत में 11 सीटें गंवा बैठे। दोनों पक्ष इस्राईल में नई सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत हासिल करने में नाकाम रहे हैं। ऐसे में इस शासन को आने वाले हफ्तों में राजनीतिक टकराव के एक लंबे दौर का सामना करना पड़ सकता है।
नेतन्याहू के नेतृत्व वाली लिकुड पार्टी ने बुधवार को अरब दलों के खिलाफ अपना अभियान जारी रखा। पार्टी ने उन पर गंभीर चुनावी अनियमितताओं के जरिए ‘चुनाव में चोरी’ करने का आरोप लगाया। इन कथित अनियमितताओं में रिश्वतखोरी, धमकी देना, हिंसा और मतपत्रों में जालसाज़ी करना शामिल है।
लिकुड पार्टी ने इस्राईली पुलिस, शाबाक (आंतरिक सुरक्षा एजेंसी) और इस शासन के केंद्रीय चुनाव आयोग से इन आरोपों की जांच करने की मांग की है। ये आरोप पिछले मंगलवार को हुए चुनाव के बाद लगाए गए हैं। चुनाव के शुरुआती अनुमानों और मतगणना के प्रारंभिक परिणामों में अरब प्रतिनिधियों की मौजूदगी और उनके समर्थन में बढ़ोतरी के संकेत मिले थे।
लिकुड पार्टी ने अपने बयान में दावा किया, “इस्राईल में चुनाव अरब दलों द्वारा गंभीर अनियमितताएं करके चुरा लिया गया है। ये दल आतंकवाद और यहूदी राज्य के विनाश का समर्थन करते हैं। इन अनियमितताओं में रिश्वतखोरी, धमकी, हिंसा, जालसाजी और मतदाताओं को मतदान के लिए जुटाने हेतु प्रतिबंधित कार्यक्रमों का इस्तेमाल शामिल है।”
पार्टी के बयान के अनुसार, इन आरोपों में संयुक्त अरब सूची (अल-क़ाइमह अल-मुवह्हदा) से संबंधित नकदी और मतपत्रों वाले हजारों लिफाफे मिलने का दावा भी शामिल है। इसके अलावा, मतदान केंद्रों पर तैनात समितियों के सदस्यों को धमकाने और उनके साथ हिंसा किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
चुनाव प्रचार के दौरान भी नेतन्याहू ने दक्षिणपंथी मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने की कोशिश करते हुए अरब समुदाय, यानी वर्ष 1948 के कब्जे वाले क्षेत्रों में रहने वाले फिलिस्तीनियों, के बीच बढ़ते मतदान प्रतिशत को लेकर चेतावनी दी थी।
चुनाव के शुरुआती अनुमानों के सामने आने के बाद भी नेतन्याहू ने अरब दलों के खिलाफ अपना अभियान जारी रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका विरोधी राजनीतिक खेमा उन लोगों के समर्थन के सहारे सरकार बनाने की कोशिश कर रहा है, जिन्हें वह ‘इस्राईल का दुश्मन’ कहता है।
इस्राईल के केंद्रीय चुनाव आयोग ने कुछ घंटे पहले घोषणा की कि 85.6 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक नेतन्याहू के खेमे को 53 सीटें, आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को 48 सीटें और अरब दलों को 19 सीटें मिली हैं।
इस प्रकार, शुरुआती मतगणना के आंकड़ों के अनुसार, कोई भी खेमा सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका है। इसके चलते इस्राईल की राजनीतिक स्थिति और अधिक जटिल होने की आशंका है।


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