यूरोपीय देशों की सेनाएं, आतंकवादी मानी जाएंगी: क़ालिबाफ़

यूरोपीय देशों की सेनाएं, आतंकवादी मानी जाएंगी: क़ालिबाफ़

ईरान की संसद (मजलिस) के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालिबाफ़ ने यूरोपीय संघ द्वारा ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के ख़िलाफ़ उठाए गए क़दम को अमेरिका के दबाव में लिया गया फ़ैसला बताया और कहा कि, ईरानी क़ानून के अनुसार अब यूरोपीय देशों की सेनाएँ आतंकवादी मानी जाएँगी और इसके परिणामों की ज़िम्मेदारी यूरोप की होगी।

महर समाचार एजेंसी के अनुसार, क़ालिबाफ़ ने आज (1 फ़रवरी 2026 ) संसद के सत्र में इस्लामी क्रांति की वर्षगांठ और ईरान के स्वर्गीय सर्वोच्च धार्मिक नेता इमाम ख़ुमैनी की ईरान वापसी की सालगिरह पर सांसदों और ईरानी जनता को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रांति की जीत वह दिन था जब विदेशी ताक़तों का ईरान पर से कब्ज़ा खत्म हुआ। इमाम ख़ुमैनी ने उस राष्ट्र को दोबारा हिम्मत दी जिसने ब्रिटेन के कब्ज़े, अमेरिका समर्थित तख़्तापलट और देश की ज़मीन खोने का दर्द झेला था। उन्होंने जनता को सिखाया कि देश को फिर से ऐसी घटनाओं का शिकार होने से कैसे बचाया जाए और अलगाववादियों व देश बेचने वालों के सामने कैसे डटा जाए।

क़ालिबाफ़ ने कहा कि एक मज़बूत, स्वतंत्र और एकजुट ईरान ही वैश्विक वर्चस्ववादी ताक़तों की दीर्घकालिक योजनाओं के रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट है, और इसी कारण इस्लामी क्रांति से दुश्मनी की जाती है।

उन्होंने इमाम ख़ुमैनी की वसीयत का हवाला देते हुए कहा कि क्रांति की सफलता और स्थायित्व का रहस्य एक ही है, ईश्वरीय उद्देश्य और जनता की एकता। अगर यह उद्देश्य भुला दिया गया और मतभेद बढ़े, तो वही हार का कारण बनेंगे। क़ालिबाफ़ ने ज़ोर देकर कहा कि अधिकारी और जनता दोनों इस वसीयत के प्रति ज़िम्मेदार हैं। राष्ट्रीय हित को राजनीतिक गुटबाज़ी से ऊपर रखना और 9 करोड़ की एकजुट जनता पर विश्वास रखना मौजूदा कठिन हालात से निकलने की शर्त है।

उन्होंने अफ़सोस जताया कि जैसे ही हालात थोड़े शांत होते हैं, कुछ लोग फिर राष्ट्रीय मुद्दों को भूलकर गुटीय राजनीति शुरू कर देते हैं। उनका कहना था कि प्राथमिकता जनता की आजीविका, आर्थिक समस्याओं के समाधान और उनके जायज़ विरोधों को सुनने की होनी चाहिए।

यूरोपीय संघ के IRGC के ख़िलाफ़ क़दम पर प्रतिक्रिया देते हुए क़ालिबाफ़ ने कहा कि यह अमेरिका के राष्ट्रपति और ज़ायोनी शासन के नेताओं के आदेशों का पालन है और इससे वैश्विक व्यवस्था में यूरोप की अहमियत और घटेगी।

ईरानी जनता IRGC को अपने शरीर का हिस्सा मानती है
क़ालिबाफ़ ने कहा कि ईरानी जनता IRGC को अपने शरीर का हिस्सा मानती है, जिसने प्राकृतिक आपदाओं, कोरोना महामारी, पुनर्निर्माण और सुरक्षा के हर मोर्चे पर जनता का साथ दिया है। ऐसे हमले उल्टा जनता और IRGC के बीच एकजुटता को और मज़बूत करेंगे।

यूरोप ने उस संस्था पर हमला किया है जो यूरोप में आतंकवाद को रोकने में सबसे बड़ी बाधा थी
क़ालिबाफ़ ने कहा कि यूरोप ने उस संस्था पर हमला किया है जो यूरोप में आतंकवाद के फैलाव को रोकने में सबसे बड़ी बाधा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोप अमेरिका की अंधी आज्ञा मानकर अपने ही लोगों के हितों के ख़िलाफ़ फ़ैसले ले रहा है। उन्होंने कहा कि यूरोप अमेरिका को खुश करना चाहता है ताकि वह उनकी क्षेत्रीय अखंडता को धमकी न दे, लेकिन अमेरिका अपने सहयोगियों को कोई महत्व नहीं देता।

IRGC दुनिया की सबसे अनोखी आतंकवाद-विरोधी संस्था है
क़ालिबाफ़ के अनुसार, IRGC दुनिया की सबसे अनोखी आतंकवाद-विरोधी संस्था है, जिसने क्षेत्रीय जनता की मदद से आईएसआईएस की सत्ता को गिराया और वैश्विक आतंकवादी ख़तरे को खत्म किया। इस रास्ते में उसने सैकड़ों शहीद दिए, जिनमें जनरल क़ासिम सुलेमानी भी शामिल हैं।

IRGC और मज़बूत होकर अहंकारी ताक़तों के सामने डटा रहेगा
उन्होंने कहा कि ईरानी जनता और दुनिया के उत्पीड़ितों के समर्थन से IRGC और मज़बूत होगा और घमंडी ताक़तों के सामने डटा रहेगा। अंत में क़ालिबाफ़ ने कहा कि क़ानून के अनुच्छेद 7 के अनुसार, यदि IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित किया जाता है, तो यूरोपीय देशों की सेनाएँ भी आतंकवादी मानी जाएँगी और इसके परिणामों की ज़िम्मेदारी यूरोपीय संघ की होगी।

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