यूपी में राहुल की न्याय यात्रा का प्रियंका करेंगी स्वागत, अखिलेश, पल्लवी पटेल भी होंगे शामिल

यूपी में राहुल की न्याय यात्रा का प्रियंका करेंगी स्वागत, अखिलेश, पल्लवी पटेल भी होंगे शामिल

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी 16 फरवरी 2024 को चंदौली उत्तर प्रदेश से, राहुल गांधी के साथ भारत जोड़ो न्याय यात्रा में शामिल होंगी। चंदौली में यात्रा का स्वागत कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा करेंगी। वह उत्तर प्रदेश में राहुल की यात्रा में साथ रहेंगी।

अखिलेश यादव के बाद पल्लवी पटेल ने भी राहुल गांधी की यात्रा में शामिल होने का ऐलान किया है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो प्रियंका चंदौली के साथ ही अमेठी और रायबरेली में भी न्याय यात्रा में शामिल होंगी ।दरअसल इस खबर के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

सोनिया गांधी के अगला लोकसभा चुनाव न लड़ने के ऐलान के बाद से ही उत्तर प्रदेश की रायबरेली सीट पर सबकी निगाहें टिकी हैं। उन्होंने बुधवार को राज्यसभा चुनाव के लिए राजस्थान से नामांकन दाखिल किया।उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली की जनता के नाम एक भावुक पत्र लिखकर कहा वह स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के चलते आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी।

कांग्रेस की दिग्गज नेता सोनिया गांधी का लोकसभा से राज्यसभा में चले जाना, यानी उत्तर प्रदेश की रायबरेली सीट का प्रतिनिधित्व करने के स्थान पर राजस्थान से राज्यसभा में प्रवेश करना, कांग्रेस पार्टी की रणनीति में वड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

सवाल यह है कि रायबरेली से कांग्रेस का कौन-सा सदस्य मैदान में उतरेगा। सबसे ज़्यादा प्रचलित अटकल यह है कि सोनिया गांधी की पुत्री प्रियंका गांधी वाड्रा ही पार्टी की पसंद बनेंगी और उस सीट से चुनावी करियर शुरू करेंगी, जिसका प्रतिनिधित्व उनके दादा-दादी और मां करते रहे हैं. वैसे, भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और प्रियंका के चेहरे-मोहरे में आश्चर्यजनक समानता को मद्देनज़र रखते हुए यह विकल्प काफी अच्छा लगता है।

प्रियंका के अलावा इकलौता संभावित विकल्प राहुल गांधी ही हैं, जिन्होंने पिछले आम चुनाव में केरल की वायनाड सीट से जीतकर अमेठी हार की भरपाई कर ली थी। हालांकि फिलहाल इस बात के कोई संकेत नहीं हैं कि ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ में व्यस्त राहुल इस समय उत्तर प्रदेश की अस्थिर राजनीति में लौटने के बारे में सोच भी रहे हैं।

रायबरेली सीट से कांग्रेस सिर्फ़ तीन बार हारी है। पहली बार कांग्रेस को 1977 में यहां हार का सामना करना पड़ा था, जब आपातकाल के बाद हुए आम चुनाव में जनता ने यह सीट इंदिरा गांधी से छीनकर जनता पार्टी को दे दी थी। इसके बाद, BJP के अशोक सिंह ने 1996 और 1998 में लगातार चौंकाने वाली जीत हासिल की, जब इंदिरा गांधी के चचेरे भाई और बहन विक्रम कौल और दीपा कौल को मैदान में उतारा गया था।

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