बिहार में SIR से जुड़े ’सुप्रीम कोर्ट‘ के फैसले का कांग्रेस ने स्वागत किया

बिहार में SIR से जुड़े ’सुप्रीम कोर्ट‘ के फैसले का कांग्रेस ने स्वागत किया

बिहार में एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में लाखों मतदाताओं के नाम काट दिए जाने का विवाद पिछले कई महीनों से सुर्खियों में रहा। इस पर कई राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए थे कि चुनाव आयोग किस आधार पर इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं को सूची से बाहर कर रहा है। इस मामले पर अब सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप किया है और अपने फैसले में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की है।

14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि हटाए गए मतदाताओं की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए और हर एक नाम हटाने का कारण स्पष्ट बताया जाए। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि जिन मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं, उन्हें आधार कार्ड को पहचान पत्र मानकर वोट देने की अनुमति दी जाएगी। अदालत ने अपने पहले दिए गए आदेश को दोहराते हुए साफ कहा कि, आधार कार्ड को वैध पहचान पत्र मानना चुनाव आयोग की बाध्यता होगी।

कांग्रेस ने किया स्वागत
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का कांग्रेस ने खुले तौर पर स्वागत किया है। कांग्रेस का कहना है कि यह फैसला, लोकतंत्र को बचाने वाला कदम है और इससे साबित हुआ कि चुनाव आयोग अब तक पारदर्शी ढंग से काम नहीं कर रहा था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा—

“आज सुप्रीम कोर्ट ने लोकतंत्र की रक्षा की है। चुनाव आयोग अब तक मतदाताओं के अधिकारों के खिलाफ काम करता रहा है, लेकिन अदालत ने अब राजनीतिक दलों को भी इस प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया है। यह एक ऐतिहासिक कदम है।”

लोकतंत्र पर “हमले” से बचाव
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह फैसला उस “कठोर हमले” को रोकने वाला है, जो लोकतांत्रिक ढांचे पर किया गया था। उनका मानना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट समय पर दखल न करता तो लाखों लोग अपने मताधिकार से वंचित हो जाते। यह न केवल मतदाताओं के अधिकारों का हनन होता, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठते।

कांग्रेस का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अब चुनाव आयोग को मजबूर करेगा कि वह हर कार्रवाई को पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से करे। साथ ही राजनीतिक दलों को भी यह अधिकार मिला है कि वे मतदाता सूची की प्रक्रिया पर नज़र रखें और अनियमितताओं को उजागर कर सकें। पार्टी का मानना है कि यह फैसला भविष्य में होने वाले चुनावों को अधिक निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाएगा।

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