अमेरिका-इस्राइल की ‘नूरा-कुश्ती’ और ईरान के ख़िलाफ़ बड़े युद्ध की तैयारी
पश्चिम एशिया (Middle East) में शांति को भंग करने और अपनी साम्राज्यवादी आधिपत्य को बनाए रखने के लिए अमेरिका और इस्राइल का गठजोड़ एक बार फिर बेनकाब हो गया है। हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा तेल अवीव की दिखावे के लिए की गई आलोचना और दोनों देशों के बीच कथित “तनाव” की खबरें कुछ और नहीं, बल्कि दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए रचा गया एक मनोवैज्ञानिक भ्रम (Psychological Smokescreen) है।
जेडी वेंस का बयान
अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध इस्राईली सरकार के ख़िलाफ़ एक महत्वपूर्ण बयान दिया है।उन्होंने कहा, मुझे पता है कि इस्राईल सरकार के भीतर कुछ लोग अमेरिका की जनमत को प्रभावित करने और इस युद्ध को अनिश्चितकाल तक जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं।
इस्राइली-अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक अलोन मिज़राही के हालिया खुलासे ने इस घिनौनी साजिश की परतों को खोलकर रख दिया है। यह तथाकथित मतभेद वास्तव में ईरान के खिलाफ एक बड़े, विनाशकारी युद्ध की जमीन तैयार करने का जरिया है।
नूरा-कुश्ती का सच: छद्म मतभेद और आगामी सैन्य दुस्साहस
राजनीतिक विश्लेषक अलोन मिज़राही ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच जो तनाव मीडिया में दिखाया जा रहा है, वह असल में दोनों देशों के बीच गहरे सैन्य और कूटनीतिक समन्वय को छिपाने का एक मुखौटा है।
तनाव बढ़ाने की गुप्त तैयारी: अमेरिका और इस्राइल मिलकर इस क्षेत्र में तनाव को एक खतरनाक स्तर पर ले जाने की तैयारी कर चुके हैं। बहुत संभव है कि ईरान और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ एक बड़े जमीनी सैन्य अभियान (Ground Invasion) का निर्णय पर्दे के पीछे लिया जा चुका है।
गर्मी का निर्णायक दौर: साम्राज्यवादी ताकतें इस गर्मी को एक निर्णायक मोड़ के रूप में देख रही हैं, जहां वे सैन्य ताकत के बल पर पूरे क्षेत्र का भूगोल बदलने का दुस्साहस करना चाहती हैं।
मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare): खुद को ‘शांतिदूत’ दिखाने के लिए अमेरिका सार्वजनिक रूप से इस्राइल को डांटने का नाटक करता है, ताकि जब युद्ध भड़के, तो वह वैश्विक आक्रोश से बच सके और इस्राइल को रक्षात्मक मोर्चे पर दिखा सके।
शांति वार्ताओं को बाधित करने की घिनौनी साजिश
खुद अमेरिकी उपराष्ट्रपति का यह कबूलनामा इस बात का पुख्ता सबूत है कि इस्राइल कभी भी शांति नहीं चाहता। अमेरिकी प्रशासन के भीतर से आई इस आवाज ने साफ कर दिया है कि:
“इस्राइल में कुछ ताकतें ऐसी हैं जो ‘अनंत युद्ध’ (Eternal War) को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों डॉलर का एक सुनियोजित और प्रभावशाली अभियान चला रही हैं।”
इस भारी-भरकम फंडिंग का एकमात्र उद्देश्य ईरान के साथ चल रही राजनयिक वार्ताओं को हमेशा के लिए दफन करना है। ईरान हमेशा से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तर्कसंगत और शांतिपूर्ण कूटनीति का पक्षधर रहा है, लेकिन पश्चिमी-जायोनी (Zionist) लॉबी को शांति बर्दाश्त नहीं है। वे जानते हैं कि यदि ईरान पर से अवैध प्रतिबंध हटते हैं और वह आर्थिक रूप से मजबूत होता है, तो क्षेत्र में अमेरिकी-इस्राइली दादागिरी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। इसीलिए, बातचीत की हर मेज को इस्राइली पैसे और अमेरिकी शह के दम पर तोड़ दिया जाता है।
ईरान: साम्राज्यवादी ताकतों के खिलाफ अडिग और न्यायसंगत प्रतिरोध
इस पूरे परिदृश्य में ईरान का रुख बेहद साहसी, न्यायसंगत और सराहनीय रहा है। दशकों से पश्चिमी प्रतिबंधों, आर्थिक नाकेबंदी और लगातार सैन्य धमकियों का सामना करने के बावजूद, ईरान ने अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया।
ईरान ने बार-बार साबित किया है कि वह युद्ध का समर्थक नहीं है, लेकिन यदि उसकी सीमाओं या उसके सहयोगियों पर साम्राज्यवादी ताकतों द्वारा हमला किया जाता है, तो वह मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी क्षमता रखता है। इस्राइल और अमेरिका का यह नया ड्रामा दरअसल ईरान की बढ़ती ताकत और उसके मजबूत होते प्रतिरोध नेटवर्क (Axis of Resistance) से पैदा हुई बौखलाहट का नतीजा है।
निष्कर्ष
दुनिया को पहचानना होगा असली दुश्मन
यह साफ है कि अमेरिका और इस्राइल के बीच का यह “विवाद” केवल एक नाटक है। असली सच्चाई यह है कि दोनों देश मिलकर एक नए सैन्य दुस्साहस की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं, जिसका शिकार वे ईरान को बनाना चाहते हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि साम्राज्यवादी ताकतें अपनी साजिशों में जितनी मर्जी चालें चल लें, न्याय की लड़ाई लड़ने वाले देशों के हौसलों को नहीं डिगा सकतीं।
दुनिया को अब इस अमेरिकी पाखंड और इस्राइली आक्रामकता के खिलाफ एकजुट होना होगा और ईरान के संप्रभु अधिकारों तथा उसकी शांतिपूर्ण नीतियों का खुलकर समर्थन करना होगा।


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