अंसारुल्लाह की सैन्य प्रगति के सामने, सऊदी अरब के विकल्प सीमित: सीएनएन
सीएनएन ने अपनी एक रिपोर्ट में यमन में अंसारुल्लाह की तेज़ी से बढ़ती सैन्य प्रगति के सामने सऊदी अरब के सीमित विकल्पों पर चर्चा की है। रिपोर्ट के अनुसार, अंसारुल्लाह ने पिछले वर्षों के दौरान अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत किया है, उसे सामाजिक समर्थन भी अधिक मिला है और अब वह ऐसी स्थिति में पहुंच चुका है कि उसके ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई करना रियाद के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
रियाद के विकल्प सीमित
सऊदी अरब सैन्य कार्रवाई तेज़ करने और राजनीतिक समाधान तलाशने के बीच फंसा हुआ है। युद्ध को और तेज़ करने से एक नए लंबे और थकाऊ संघर्ष का रास्ता खुल सकता है, जबकि यमन के अंसारुल्लाह के साथ समझौता करने की भी सऊदी अरब को भारी राजनीतिक और सुरक्षा क़ीमत चुकानी पड़ सकती है।
यमनी आसानी से पीछे हटने वाले नहीं
वर्षों तक हवाई हमलों और सीमा-पार युद्ध के बावजूद सऊदी अरब अंसारुल्लाह को खत्म करने में सफल नहीं हो सका। इसके विपरीत, इस समूह ने न केवल अपना अस्तित्व बनाए रखा, बल्कि अपनी सैन्य और सामरिक क्षमताओं का भी विस्तार किया है।
इस्राईल पर हमले के बाद, यमन की लोकप्रियता बढ़ी
ग़ाज़ा युद्ध के दौरान इस्राईल पर हमलों के बाद मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में यमनी पक्ष को अधिक लोकप्रियता मिली। इससे क्षेत्र में उनकी स्थिति और मज़बूत हुई है।
यमनी अपना एजेंडा खुद तय करते हैं
ईरान के साथ अंसारुल्लाह के करीबी संबंधों का यह मतलब नहीं है कि वह पूरी तरह ईरान पर निर्भर है। इस समूह की मांगों की जड़ सऊदी अरब के साथ लंबे समय से चले आ रहे विवाद में है। वह अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों और अन्य पाबंदियों को समाप्त करने की मांग कर रहा है।
अमेरिका ने रियाद का अनुरोध ठुकराया
सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रंप से दो बार संपर्क किया और अमेरिका से यमन पर हमला करने का अनुरोध किया, लेकिन ट्रंप ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। इससे यमन के खिलाफ प्रतिक्रिया देने के मामले में रियाद के विकल्प और सीमित हो गए हैं।
अमेरिकी ख़ुफ़िया मदद भी सीमित
वॉशिंगटन ने सऊदी अरब में लगभग 100 सैन्य सलाहकार भेजे हैं, लेकिन सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार रियाद को जिस ख़ुफ़िया सहायता की उम्मीद थी, वह भी अब तक सीमित रही है।
बाब अल-मंदब नया तुरुप का पत्ता
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पेरिम द्वीप और बंदरगाह शहर मोखा पर क़ब्ज़े के बाद अंसारुल्लाह ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जहां वह बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर सकता है। ऐसा क़दम यमन के संघर्ष से आगे बढ़कर अंसारुल्लाह के क्षेत्रीय महत्व को काफी बढ़ा सकता है।
रियाद की प्रतिक्रिया युद्ध को व्यापक बना सकती है
सऊदी अरब का पूर्ण पैमाने पर हमला केवल अंसारुल्लाह के खिलाफ एक सैन्य अभियान नहीं होगा। इससे सऊदी अरब अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक होते संघर्ष में सीधे एक पक्ष के रूप में शामिल हो सकता है।
राजनीतिक रास्ता भी मुश्किल
विशेषज्ञों के अनुसार, सऊदी अरब ने पिछले कुछ महीनों में ‘रणनीतिक धैर्य’ की नीति अपनाने की कोशिश की है, लेकिन यमनी हमले और उनकी सैन्य प्रगति जारी रही। परिणामस्वरूप, राजनीतिक स्तर पर रियाद के लिए उपलब्ध विकल्प और भी सीमित हो गए हैं।
सऊदी अरब के सामने समस्या केवल हमले या बातचीत में से किसी एक को चुनने की नहीं है। असली समस्या यह है कि युद्ध के अनुभव, अंसारुल्लाह की बढ़ती सैन्य क्षमता और अमेरिका की प्रत्यक्ष हस्तक्षेप की अनिच्छा—इन तीनों कारणों ने रियाद के लिए दोनों ही रास्तों को महंगा और जोखिम भरा बना दिया है।


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