दुश्मन की हताशा ईरान के राष्ट्रीय प्रतिरोध का परिणाम है: मुजतबा ख़ामेनेई
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद मुजतबा ख़ामेनेई ने युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की शर्तों को सुनिश्चित करने और ‘न युद्ध, न शांति’ की स्थिति को समाप्त करने की आवश्यकता पर विशेष ज़ोर दिया है।
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च परिषद (एसएनएससी) के सचिव मेजर जनरल मोहसिन रेज़ाई के साथ एक बैठक के दौरान आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च परिषद और उसका सचिवालय नीति-निर्माण के विभिन्न पहलुओं को जोड़ने वाले एक ‘महत्वपूर्ण केंद्र’ के रूप में कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि ठोस और दृढ़ निर्णय लेने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना आवश्यक है, जिसमें किसी भी कार्रवाई के शुरुआती चरण से लेकर उसके अंतिम परिणाम तक के प्रत्येक चरण को ध्यान में रखा जाए। बैठक में होर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रबंधन के माध्यम से राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा करने तथा स्थायी पारस्परिक हितों के आधार पर पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मज़बूत करने के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श किया गया।
आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने कहा कि, दुश्मन की हताशा ईरान के राष्ट्रीय प्रतिरोध का परिणाम है। उन्होंने देश और उसकी राजनीतिक व्यवस्था की रक्षा में जनता की भागीदारी बनाए रखने के लिए समय पर और सक्रिय रूप से जनसंचार किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
‘न युद्ध, न शांति’ की स्थिति को समाप्त करने की आवश्यकता
उन्होंने कहा कि ईरानी जनता और प्रतिरोध मोर्चे के अधिकारों एवं हितों की रक्षा के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। इसके लिए युद्ध समाप्त करने और ‘न युद्ध, न शांति’ की स्थिति को ख़त्म करने के संबंध में ईरानी अधिकारियों द्वारा घोषित शर्तों को पूरा करना आवश्यक है।
बैठक के दौरान जनरल रेज़ाई ने ईरान के विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति और वहां किए जा रहे उपायों के बारे में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च परिषद के सचिवालय में चल रही प्रमुख पहलों में से एक इस्लामी गणराज्य की उस रणनीति को आगे बढ़ाना है, जिसके तहत क्षेत्रीय व्यवस्थाओं को बाहरी शक्तियों पर निर्भर रहने के बजाय क्षेत्र के देशों की अपनी क्षमताओं के आधार पर स्थापित किया जाना है। इस रणनीति को ‘क्षेत्रीय स्वदेशी व्यवस्थाओं की स्थापना’ कहा गया है।
जून 2025 में अमेरिका और इस्राईल ने ईरान के ख़िलाफ़ अपना पहला आक्रामक युद्ध छेड़ा था, जो 12 दिनों तक चला। उनका दूसरा हमला 28 फरवरी, 2026 को शुरू हुआ और अप्रैल की शुरुआत में 40 दिनों के बाद अस्थायी रूप से रुक गया।
दोनों ही युद्धों में ईरान के प्रतिरोध और निर्णायक जवाबी सैन्य अभियानों ने हमलावरों को युद्ध-विराम स्वीकार करने के लिए मजबूर कर दिया। दूसरे युद्ध के शुरुआती दिनों से ही ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपना कड़ा नियंत्रण बनाए रखा है।
जुलाई में अमेरिका ने ईरान पर कई चरणों में भीषण हवाई हमले किए और देश की नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी। यह कदम इस्लामी गणराज्य ईरान के साथ 17 जून को हस्ताक्षरित इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) का उल्लंघन था। इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य युद्ध समाप्त करना था।
इसके जवाब में ईरानी सशस्त्र बलों ने पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिका के रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हमले किए और होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी प्रकार के समुद्री यातायात के लिए बंद करने की घोषणा कर दी।


popular post
पुतिन ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की पश्चिमी देशों की कोशिशों की कड़ी आलोचना की
पुतिन ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की पश्चिमी देशों
संयुक्त अरब अमीरात ने इस्राईली नागरिकों को वीज़ा देना किया शुरू
कुछ दिनों पहले इस्राईल के साथ अपने संबंधों को सार्वजनिक कर कई समझौते पर हस्ताक्षर
4 दिसंबर भारतीय नौसेना दिवस
4 दिसंबर भारतीय नौसेना दिवस हर देश किसी न किसी तारीख़ को नौसेना दिवस मनाया
कल से शुरू होगी टी-20 सीरीज, जानिए कितने बजे खेला जाएगा मैच
कल से शुरू होगी टी-20 सीरीज, जानिए कितने बजे खेला जाएगा मैच भारतीय टीम फ़िलहाल
कुछ हफ़्तों में मेड इन इंडिया कोरोना वैक्सीन आने की उम्मीद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
कोरोना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह एक सर्वदलीय बैठक की. पीएम मोदी ने
महाराष्ट्र में बीजेपी को विधान परिषद चुनाव में लगा तगड़ा झटका, सिर्फ एक सीट पर मिल सकी जीत
महाराष्ट्र में बीजेपी को विधान परिषद चुनाव में तगड़ा झटका लगा है. विधान परिषद की
5वें दौर की बैठक: किसानों का दो टूक जवाब हम सरकार से चर्चा नहीं, बल्कि ठोस जवाब चाहते हैं वो भी लिखित में,
कृषि कानूनों को लेकर पिछले 9 दिनों से धरने पर बैठे किसानों के साथ केंद्र
रूस की नसीहत, वेस्ट बैंक में एकपक्षीय कार्रवाई से बचे इस्राईल
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने मेडिटरेनीयन डायलॉग्स बैठक को संबोधित करते हुए कहा