“मैं चाहूँगा कि, खार्ग द्वीप हमारे नियंत्रण में हो: डोनाल्ड ट्रंप

“मैं चाहूँगा कि, खार्ग द्वीप हमारे नियंत्रण में हो: डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “निकट भविष्य में हम खार्क द्वीप (ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र) और अन्य तेल संबंधी बुनियादी ढाँचों पर नियंत्रण स्थापित करेंगे तथा उनके तेल और गैस बाज़ार पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लेंगे। ठीक उसी तरह जैसे हमने वेनेज़ुएला के साथ किया है।”

ईरान के रणनीतिक महत्व वाले खार्क द्वीप पर नियंत्रण स्थापित करने की इच्छा जताने वाला बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ईरान की सैन्य प्रतिक्रियाओं ने अमेरिकी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उन्होंने कहा, “मैं ईरान से निराश नहीं हुआ हूँ। यह समझौता अच्छा है और संभव है कि यह इतिहास का सबसे बड़ा समझौता साबित हो।” ट्रंप ने दावा किया, “मैं चाहूँगा कि खार्क द्वीप हमारे नियंत्रण में हो। हमने अभी तक ईरान पर पर्याप्त हमले नहीं किए हैं।”

खार्क द्वीप पर नियंत्रण को लेकर ट्रंप के बदले हुए बयान

ट्रंप ने आगे कहा, “मैं खार्क द्वीप पर कब्ज़ा करना पसंद करूँगा, लेकिन मुझे नहीं पता कि वास्तव में हम ऐसा करना चाहेंगे या नहीं।”उन्होंने यह भी कहा, “ईरान का मुद्दा लगभग समाप्त हो चुका है और हम चाहें तो कल ही अपनी सेनाएँ वहाँ भेज सकते हैं, लेकिन मैं ज़मीनी सैनिकों को तैनात नहीं करना चाहता।”

ट्रंप का यह कहना कि “हमने अभी तक ईरान पर पर्याप्त हमले नहीं किए हैं” और “हम चाहें तो कल ही अपनी सेनाएँ वहाँ भेज सकते हैं”, क्षेत्र में तनाव को और बढ़ाने वाला बयान माना जा रहा है। दूसरी ओर, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह ज़मीनी सैनिकों को भेजने के पक्ष में नहीं हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि किसी बड़े युद्ध की संभावित कीमत और जोखिम को लेकर वॉशिंगटन में भी चिंताएँ मौजूद हैं।

आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ट्रंप प्रशासन की आक्रामक भाषा उस स्थिति में सामने आई है जब ईरान के जवाबी हमलों ने अमेरिका की क्षेत्रीय शक्ति की छवि को चुनौती दी है।

ईरान समर्थक सूत्रों का दावा है कि कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब और जॉर्डन सहित विभिन्न देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमलों ने अमेरिकी सैन्य वर्चस्व के दावों को कमजोर किया है और क्षेत्र में अमेरिका के “अजेय शक्ति” वाले प्रचार को झटका दिया है। उनके अनुसार, इन घटनाओं के बाद अमेरिकी नेतृत्व में बेचैनी और बौखलाहट साफ़ दिखाई दे रही है।

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