ईरान के बुनियादी ढांचे पर हालिया हमलों में सऊदी अरब, यूएई और क़तर की कथित भूमिका
ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) वेबसाइटों और विमानन निगरानी केंद्रों के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी लड़ाकू विमानों को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), क़तर और सऊदी अरब स्थित ठिकानों से विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की गई।
कुछ समाचार स्रोतों ने दावा किया है कि बुधवार तड़के ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका द्वारा किए गए हमलों में यूएई के ईंधन-भराई (एयर-टैंकर) विमानों ने सहयोग किया। हवाई यातायात निगरानी के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ईरान के विरुद्ध हवाई अभियान में दो बहुउद्देश्यीय एयर-टैंकर (MRTT) विमानों की मौजूदगी दर्ज की गई।
इन विमानों का संचालन संयुक्त अरब अमीरात द्वारा किया जाता है, हालांकि अब तक यूएई ने इन आरोपों की न तो पुष्टि की है और न ही उनका खंडन किया है।
समाचार में यह भी कहा गया है कि “रमज़ान युद्ध” के दौरान ईरान ने सऊदी अरब के अल-खर्ज़ सैन्य अड्डे पर तैनात कई अमेरिकी ईंधन-भराई विमानों तथा एक अमेरिकी AWACS (हवाई चेतावनी एवं निगरानी विमान) को नष्ट कर दिया था।
फ्लाइटराडार (FlightRadar) के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार तड़के अमेरिका के हमले के दौरान क़तर के अल-उदीद एयरबेस से उड़ान भरने वाले ईंधन-भराई विमानों की गतिविधि दर्ज की गई।
फ़ार्स के रक्षा एवं सुरक्षा संवाददाता के अनुसार, सैन्य सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि क़तर, यूएई, जॉर्डन और सऊदी अरब ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों को रसद (लॉजिस्टिक) सहायता प्रदान की।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 48 घंटों के दौरान इन देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों का उपयोग ईरान पर हमलों के लिए किया गया।
समाचार में दावा किया गया है कि गुरुवार तड़के अमेरिका ने ईरान के उत्तर-पूर्व और दक्षिणी क्षेत्रों में रेलवे तथा तेल उद्योग से जुड़े कम से कम तीन बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया। इसके अलावा चाबहार हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे और असलूयेह में मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर हमले को भी इस्लामाबाद समझौते का गंभीर उल्लंघन बताया गया है।
सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ अब्दुलरेज़ा सदीक़ के अनुसार, चीन के साथ व्यापार से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाकर अमेरिका ने एक “बड़ी लाल रेखा” पार कर दी है।
ख़ातम-अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने बुधवार रात कहा कि अमेरिका की ओर से ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर किसी भी प्रकार के हमले में सहयोग करने वाला कोई भी स्रोत ईरानी सशस्त्र बलों के लिए वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, “रमज़ान युद्ध” से पहले भी ईरान ने फ़ारस की खाड़ी के तटीय देशों के नेताओं को लिखित रूप में सूचित किया था कि यदि उनके देशों से ईरान पर हमला किया गया, तो वह उन ठिकानों को निशाना बनाएगा। समाचार में दावा किया गया है कि बाद में ईरान ने इस चेतावनी पर अमल भी किया।
संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता रज़ाई के अनुसार, सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ की पूर्व घोषणा के मद्देनुसार, यदि अमेरिका द्वारा पिछले 48 घंटों में किए गए हमलों का जवाब दिया जाता है, तो सऊदी अरब, कुवैत, यूएई, क़तर, जॉर्डन और बहरीन में स्थित समुद्री, रेल, हवाई अड्डों तथा तेल एवं गैस से संबंधित बुनियादी ढांचे ईरान के लिए “वैध लक्ष्य” माने जाएंगे।


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