इराक़ के पवित्र शहर नजफ़ में आयतुल्लाह ख़ामेनेई को अलविदा कहने के लिए लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा
ईरान के शहीद सुप्रीम लीडर “आयतुल्लाह ख़ामेनेई” की अंतिम यात्रा के अवसर पर इराक़ के पवित्र शहर नजफ़ में लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इराक़ के विभिन्न प्रांतों से आए लोगों के साथ-साथ ईसाई समुदाय के लोगों ने भी पार्थिव शरीर के स्वागत में भाग लेकर श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरे शहर में शोक, सम्मान और प्रतिरोध के भाव स्पष्ट दिखाई दिए।
इस अवसर पर मेजर जनरल रज़ाई ने कहा कि “प्रतीकात्मक प्रतिशोध” का अर्थ अमेरिका का पश्चिम एशिया से बाहर होना है। उनके अनुसार, जब तक अमेरिका इस क्षेत्र से नहीं जाता, तब तक क्षेत्र के देशों के लिए स्वतंत्र विकास और प्रगति का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि इसके अतिरिक्त “शहीद नेता” के दो कथित हत्यारों को भी अपने अपराध की सज़ा से बचने नहीं दिया जाना चाहिए।
रज़ाई ने कहा कि इराक़ की जनता आज उस व्यक्ति को अंतिम विदाई देने के लिए एकत्र हुई है, जिसने उनके अनुसार दाइश (आईएसआईएस) के हाथों बग़दाद के पतन को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि यह अंतिम यात्रा ईरान और इराक़ के बीच संबंधों को और अधिक मज़बूत करेगी तथा दोनों देशों की जनता और सरकारों की एकता पश्चिम एशिया को इस्राईल और अमेरिका के प्रभाव से स्वतंत्र बनाने की दिशा में सहायक होगी।
हम दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर देंगे: इराक़ी युवा
नजफ़ में आयोजित शोक समारोह के दौरान अनेक श्रद्धालुओं के हाथों में हज़रत आयतुल्लाह सैयद मुजतबा ख़ामेनेई की तस्वीरें दिखाई दीं। वहीं इराक़ी युवाओं ने अपने वस्त्रों पर भी “शहीद नेता” की तस्वीरें लगा रखी थीं, जिन पर लिखा था—”हम दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर देंगे।”
समारोह के दौरान इराक़ी श्रद्धालुओं ने “कल्ला, कल्ला अमेरिका” (अमेरिका नहीं) और “नअम, नअम लिल-ईरान” (ईरान के समर्थन में हाँ) जैसे नारे लगाए। इन नारों के माध्यम से उन्होंने अमेरिका का विरोध तथा ईरान और प्रतिरोध मोर्चे के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
हज़रत इमाम अली (अ.) के पवित्र हरम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पार्थिव शरीर के आगमन की प्रतीक्षा करते रहे। बाद में पार्थिव शरीर को लेकर चल रहा वाहन हरम परिसर में पहुँचा, जहाँ उपस्थित जनसमूह ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
शहीद सुप्रीम लीडर की अंतिम यात्रा के मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए कताइब हिज़्बुल्लाह के सुरक्षा बलों को नजफ़ और कर्बला के बीच विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया था। वहीं अंतिम यात्रा शुरू होने से पहले बैनुल हरमैन क्षेत्र में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण शोकमय बना रहा।
ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान और विदेश मंत्री अराक़ची की इमाम अली (अ.) के हरम में उपस्थिति
इस अवसर पर ईरान के राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची भी हज़रत इमाम अली (अ.) के पवित्र हरम पहुँचे और “शहीद नेता” को श्रद्धांजलि अर्पित की।


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