ट्रंप ने खार्ग पर AI वीडियो द्वारा ‘काल्पनिक हमले’ के ज़रिए भ्रम फैलाया

ट्रंप ने खार्ग पर AI वीडियो द्वारा ‘काल्पनिक हमले’ के ज़रिए भ्रम फैलाया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ख़िलाफ़ अपनी आक्रामक बयानबाज़ी को एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए आगे बढ़ाया है। ट्रंप ने खार्ग द्वीप की तेल सुविधाओं में कथित विस्फोट और भीषण आग दिखाने वाला एक वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर साझा किया और दावा किया— “खार्ग द्वीप को धराशायी किया जा रहा है!!!”

हालांकि, सामने आया वीडियो किसी वास्तविक सैन्य हमले की प्रत्यक्ष तस्वीर के बजाय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार किया गया वीडियो बताया जा रहा है। ऐसे में ट्रंप द्वारा इस तरह की कृत्रिम तस्वीर को बिना स्पष्ट संदर्भ के साझा करना सवालों के घेरे में है। एक अमेरिकी राष्ट्रपति से यह अपेक्षा की जाती है कि वह युद्ध, सैन्य कार्रवाई और किसी देश की महत्वपूर्ण ऊर्जा सुविधाओं से जुड़े संवेदनशील दावों को बेहद सावधानी और प्रमाण के साथ सार्वजनिक करे। इसके विपरीत, AI-निर्मित दृश्य को नाटकीय अंदाज़ में पेश करना जनता के बीच भ्रम और भय पैदा कर सकता है।

ट्रंप का पोस्ट भी इसी राजनीतिक शैली को दर्शाता है। उन्होंने वीडियो के साथ किसी विस्तृत सैन्य रिपोर्ट, स्वतंत्र पुष्टि या हमले के प्रमाण की जानकारी देने के बजाय केवल यह दावा किया कि खार्ग द्वीप “धराशायी” किया जा रहा है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या सोशल मीडिया पर एक नाटकीय दृश्य दिखाना वास्तविक सैन्य स्थिति की जानकारी देने से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

खार्ग द्वीप ईरान के लिए केवल एक सामान्य भौगोलिक क्षेत्र नहीं है। यह देश के महत्वपूर्ण तेल निर्यात ढांचे से जुड़ा हुआ है। इसलिए खार्ग जैसे रणनीतिक ऊर्जा केंद्र पर हमले का दावा स्वाभाविक रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता पैदा कर सकता है। ऐसे में यदि किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से साझा की गई तस्वीर वास्तविक घटना के बजाय AI-निर्मित हो, तो उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं।

ट्रंप की ताज़ा बयानबाज़ी ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बेहद संवेदनशील स्थिति में बताया जा रहा है। एक तरफ कूटनीतिक समझौते और बातचीत की संभावनाओं की चर्चा होती है, तो दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों की खबरें सामने आती हैं। इस विरोधाभास ने ट्रंप की ईरान नीति पर भी सवाल खड़े किए हैं।

ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की भाषा और साथ ही समझौते की कोशिश

इन दोनों रुखों के बीच लगातार बदलाव से यह धारणा मजबूत हो सकती है कि अमेरिकी नीति में स्पष्टता का अभाव है। यदि एक ओर बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात की जाती है और दूसरी ओर सोशल मीडिया पर युद्ध को और अधिक भयावह रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो इससे तनाव कम होने के बजाय बढ़ने का खतरा रहता है।

अमेरिका ने रविवार रात ईरान के लार्क द्वीप से जुड़े कुछ ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके बाद ईरानी सशस्त्र बलों की ओर से जवाबी कार्रवाई की गई। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि जवाब में जॉर्डन स्थित दो अमेरिकी ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया।

ऐसी परिस्थितियों में ट्रंप का AI-निर्मित विस्फोटक दृश्य साझा करना केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं माना जा सकता। राष्ट्रपति के स्तर पर की गई ऐसी पोस्ट का असर अंतरराष्ट्रीय जनमत, बाजारों और क्षेत्रीय तनाव पर पड़ सकता है। खासकर तब, जब संबंधित वीडियो वास्तविक हमले की तस्वीर न हो।

ट्रंप पहले भी अपनी राजनीतिक शैली में बेहद आक्रामक और नाटकीय भाषा के इस्तेमाल के लिए जाने जाते रहे हैं। लेकिन युद्ध और सैन्य संघर्ष के मामलों में यही शैली खतरनाक साबित हो सकती है। युद्ध की वास्तविक तस्वीर और डिजिटल रूप से तैयार किए गए प्रचारात्मक दृश्य के बीच अंतर स्पष्ट रखना बेहद जरूरी है।

ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई की खबर को लेकर स्वतंत्र और विश्वसनीय पुष्टि महत्वपूर्ण है। केवल सोशल मीडिया पोस्ट, AI-निर्मित वीडियो या राजनीतिक दावों के आधार पर किसी बड़े हमले को वास्तविक मान लेना जनता को गलत सूचना दे सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दुनिया को वास्तविक सैन्य स्थिति की जानकारी दी जा रही है, या फिर सोशल मीडिया के जरिए एक ऐसा राजनीतिक नैरेटिव तैयार किया जा रहा है जिसमें भय, शक्ति प्रदर्शन और युद्ध की छवियों को प्राथमिकता दी जा रही है। ट्रंप का खार्ग को लेकर किया गया यह पोस्ट इसी बहस को और तेज़ करता है।

ऐसे समय में जिम्मेदार राजनीतिक नेतृत्व से अपेक्षा होती है कि वह तनावपूर्ण परिस्थितियों में तथ्यों को प्राथमिकता दे, अपुष्ट या कृत्रिम सामग्री को वास्तविक घटना के रूप में पेश न करे और कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को कमजोर करने वाले कदमों से बचे। इसके विपरीत, AI-निर्मित युद्ध दृश्य के जरिए विरोधी देश के ख़िलाफ़ आक्रामक संदेश देना केवल राजनीतिक प्रचार का हिस्सा दिखाई दे सकता है और क्षेत्रीय तनाव को और भड़का सकता है।

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