सऊदी बमबारी से हम अपने रास्ते से पीछे नहीं हटेंगे: STC
यमन की दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (STC) ने हज़रमूत में अपनी सेनाओं के ठिकानों पर सऊदी अरब की हवाई हमले के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी है और ज़ोर देकर कहा है कि वह अपने अलगाववादी रास्ते पर चलना जारी रखेगी।
फार्स न्यूज़ एजेंसी के अंतरराष्ट्रीय समूह के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन से काम करने वाली दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद ने हज़रमूत में अपनी सेनाओं के ठिकानों पर सऊदी लड़ाकू विमानों द्वारा किए गए हवाई हमले की निंदा की है। इसी दौरान, परिषद की सेनाओं ने अरब सागर के तट पर स्थित इस प्रांत के उत्तर-पूर्वी हिस्से में कबीलाई इलाकों पर व्यापक सैन्य अभियान शुरू कर दिया है।
अरबी वेबसाइट अरबी 21 के अनुसार, सऊदी लड़ाकू विमानों ने गुरुवार को वादी नहब में स्थित एक शिविर को निशाना बनाया। यह इलाका घईल बिन यमीन में है, जो हज़रमूत की राजधानी मुकल्ला शहर के उत्तर-पूर्व में स्थित है। यह वही शिविर था जिस पर संक्रमणकालीन परिषद की सेनाओं ने “हज़रमूत की कबीलाई गठबंधन” से संघर्ष के बाद कब्ज़ा किया था।
दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद ने अपने बयान में कहा कि यह हमला “किसी भी आपसी समझ के रास्ते को मजबूत नहीं करता और न ही दक्षिण के लोगों को उनके पूर्ण अधिकारों की बहाली के संघर्ष से रोक सकता है।”
संघर्ष की पृष्ठभूमि
परिषद ने दावा किया कि, हज़रमूत और महरा में उसके सैन्य अभियान दक्षिणी जनता की उस मांग के जवाब में हैं, जिनमें सुरक्षा खतरों से निपटने और उन तस्करी मार्गों को बंद करने की बात कही गई है, जिनका इस्तेमाल अंसारुल्लाह पिछले दस वर्षों से करता आ रहा है।
गुरुवार को परिषद की सेनाओं ने घईल बिन यमीन और अश-शिहर के कबीलाई इलाकों पर हमला किया, लेकिन वे एक भारी घात में फँस गईं और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके जवाब में, परिषद ने हज़रमूत के कबीलों के ठिकानों के खिलाफ व्यापक सुरक्षा अभियान शुरू किया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हज़रमूत के तेल-समृद्ध क्षेत्रों में लोगों के घरों पर छापे मारे गए, तलाशी ली गई और कई नागरिकों को गिरफ्तार किया गया।
हज़रमूत के कबीलाई गठबंधन के बयान में कहा गया कि “परिषद की सेनाओं ने घरों में घुसपैठ की, उनकी पवित्रता को भंग किया, महिलाओं और बच्चों को डराया, और अंधाधुंध गोलीबारी की, जिससे कई लोग मारे गए और घायल हुए।”
हज़रमूत कबीलों का रुख
हज़रमूत कबीलाई गठबंधन ने “हदरमी एलीट फोर्स” (जिसका गठन 2016 में राष्ट्रपति आदेश से हुआ था) से अपील की कि वे कबीलों और हज़रमूत की जनप्रतिरोध के साथ खड़े हों और प्रांत की रक्षा करें। साथ ही, उन लोगों से भी आग्रह किया गया जो संघर्ष में शामिल नहीं होना चाहते कि वे तटस्थ रहें, ताकि हज़रमूत को और अधिक संकट में न झोंका न जाए।
सऊदी अरब की प्रतिक्रिया
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद की सेनाओं से हज़रमूत और महरा से पीछे हटने की मांग की। मंत्रालय ने ज़ोर देकर कहा कि “दक्षिण का मुद्दा न्यायसंगत है और उसका समाधान केवल सभी यमनी पक्षों के बीच व्यापक राजनीतिक संवाद के ज़रिये ही संभव है।”
सऊदी अरब ने यह भी कहा कि परिषद की सैन्य कार्रवाइयाँ राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद और गठबंधन कमान के साथ समन्वय के बिना की गईं, जिससे तनाव बढ़ा है और यमन की जनता के हितों तथा गठबंधन के प्रयासों को नुकसान पहुँचा है।
ज़मीनी हालात
तीन दिसंबर से, दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद की सेनाओं ने हज़रमूत पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह नियंत्रण हज़रमूत कबीलों और पहले सैन्य क्षेत्र (जो आधिकारिक सरकार से संबद्ध है) की सेनाओं के साथ संघर्ष के बाद हासिल किया गया। इससे पहले भी, सऊदी–अमीराती प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई वार्ताओं में परिषद ने हज़रमूत और महरा से पीछे हटने के अनुरोध को खारिज कर दिया था।


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