सऊदी अरब ने युद्ध शुरू किया; उम्मत-ए-इस्लाम ज़ायोनीवाद के ख़िलाफ़ एकजुट हो: यमन
यमन सरकार के प्रवक्ता ने शेख़-उल-अज़हर की अपील का स्वागत करते हुए कहा कि सऊदी अरब ने युद्ध की शुरुआत की थी और यमन अपना बचाव कर रहा है। क्षेत्रीय संघर्षों को समाप्त करने के लिए अल-अज़हर के शेख़ अहमद अल-तैयब की अपील पर यमन की ओर से लगातार आधिकारिक प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। इसी सिलसिले में यमन सरकार के प्रवक्ता डॉ. उमर अल-बुख़ैती ने इस अपील का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि शेख़-उल-अज़हर की अपील इस्लामी उम्मत के हित में है। यह उम्मत के संसाधनों की रक्षा करने और उसके विभिन्न देशों के लोगों के बीच एकता को मज़बूत करने में मदद करती है। ऐसा उस समय विशेष रूप से ज़रूरी है, जब एक आसन्न ख़तरा सभी को अपनी चपेट में लेने की आशंका पैदा कर रहा है।
उमर अल-बुख़ैती ने कहा कि इस्लामी उम्मत के सामने सबसे बड़ा ख़तरा ज़ायोनी शासन, उसके अमेरिकी समर्थक और क्षेत्र का नक्शा बदलने की उनकी घोषित परियोजना से है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य उस चीज़ को स्थापित करना है, जिसे वे ‘ग्रेटर इस्राईल’ कहते हैं।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यमन की सरकार और जनता, दोनों इस्लामी उम्मत के देशों के प्रयासों को एकजुट करके इस उम्मत के वास्तविक दुश्मन का मुक़ाबला करने का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि यमन हमेशा न्यायपूर्ण शांति के लिए किए जाने वाले सभी प्रयासों का स्वागत करता रहा है।
यमन के इस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सऊदी दुश्मन की ओर से इन सभी प्रयासों को विफल करने की खुली कोशिशों के बावजूद यमन ने ऐसी न्यायपूर्ण और सम्मानजनक शांति हासिल करने के प्रयास किए हैं, जो यमन के हितों की गारंटी दे सके।
यमन सरकार के प्रवक्ता ने कहा:
“हम पिछले 12 वर्षों से अपनी रक्षा की स्थिति में हैं। हम पर बिना किसी औचित्य के, विश्वासघाती तरीके से और यमन की संप्रभुता का अवैध उल्लंघन करते हुए हमला किया गया।”अल-बुख़ैती ने कहा कि यमन के ख़िलाफ़ सऊदी दुश्मन की अवैध और क्रूर आक्रामकता शुरू होने के बाद से शहीदों की संख्या 40,000 से अधिक हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश महिलाएँ और बच्चे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि यमन पर थोपी गई अन्यायपूर्ण नाकाबंदी के कारण 14 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। ये वे लोग थे, जिन्हें दवाइयाँ उपलब्ध नहीं थीं और इलाज के लिए विदेश यात्रा करने से भी वंचित कर दिया गया था।
अल-अज़हर की अपील का सकारात्मक और रचनात्मक जवाब देने के लिए तैयार है
यमन के इस अधिकारी ने आगे कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद सनआ अब भी अल-अज़हर की अपील का सकारात्मक और रचनात्मक जवाब देने तथा संबंधित समितियों का स्वागत करने के लिए तैयार है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि अरब और इस्लामी देशों के बीच समस्याओं को हल करने के लिए युद्ध कभी भी सबसे अच्छा विकल्प नहीं होता।
उन्होंने कहा कि यमन ने अपनी रक्षा के लिए अन्य सभी रास्ते आज़माने के बाद ही सैन्य विकल्प अपनाने के लिए ख़ुद को मजबूर पाया।
अंत में उन्होंने उम्मीद जताई कि इस ईमानदार और नेकनीयत अपील पर अन्य पक्ष भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देंगे। उन्होंने कहा कि ये प्रयास अरब देशों के बीच पैदा हुई दरार को भरने, मतभेदों को सुलझाने, उम्मत के देशों के बीच संबंधों को मज़बूत करने और आपसी विवादों को समाप्त करने का अच्छा संकेत साबित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इन तमाम प्रयासों का उद्देश्य ऐसे समाधान तक पहुँचना होना चाहिए, जो पूरी अरब और इस्लामी उम्मत के हितों को पूरा कर सके।


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