सना की चेतावनी: यमन में सऊदी अरब का दौर ख़त्म होने की कगार पर है
यमन और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यमन सरकार के उप सूचना मंत्री मुहम्मद मंसूर ने कहा है कि, सऊदी अरब को अल-जौफ प्रांत में किए गए हमले का यमन की ओर से “निर्णायक जवाब” मिलने का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यमन के ख़िलाफ़ तनाव बढ़ाने की कोशिश सऊदी अरब के लिए “आत्मघाती” साबित हो सकती है।
मुहम्मद मंसूर के मुताबिक़, यमनी सशस्त्र बलों द्वारा सऊदी सीमा के पास स्थित अल-वदीआ शिविर पर की गई हालिया कार्रवाई सऊदी अरब की सैन्य और हथियार प्रणाली के लिए एक रणनीतिक झटका थी। उनका दावा है कि यह कोई सामान्य सैन्य ठिकाना नहीं था, बल्कि सऊदी अरब की हथियारों से जुड़ी योजना और सैन्य अभियानों के संचालन के लिए महत्वपूर्ण केंद्र था।
उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई के दौरान यमनी बलों ने हथियारों से लदे सऊदी ट्रकों और शिविर के कमांड एवं कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाया, जिससे शिविर की सैन्य क्षमता प्रभावित हुई। मंसूर ने ताइज़ और अन्य मोर्चों पर सऊदी समर्थित लड़ाकों के ठिकानों के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाइयों का भी उल्लेख किया और दावा किया कि इन अभियानों ने यमनी सेना की सैन्य क्षमता और सटीक हमले करने की क्षमता को प्रदर्शित किया है।
अल-जौफ़ में सऊदी हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए मंसूर ने सऊदी अरब पर नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि इस हमले में 14 नागरिकों, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, की मौत हुई। उनके अनुसार, सना की सेनाएं नागरिक इलाकों को निशाना नहीं बनातीं और केवल सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई करती हैं। उन्होंने कहा कि, यमन के नागरिकों के ख़िलाफ़ सऊदी हमले जारी रहे तो उनका जवाब दिया जाएगा।
मंसूर ने कहा कि यमन की रणनीति “नाकाबंदी के बदले नाकाबंदी और तनाव के बदले तनाव” पर आधारित है। उनके अनुसार, यह रणनीति केवल मिसाइलों और ड्रोन की सैन्य क्षमता पर निर्भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे सैन्य तैयारी, लॉजिस्टिक क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति भी है।
यमनी अधिकारी ने दावा किया कि सऊदी अरब लंबे समय से यमन के ख़िलाफ़ अपनी सैन्य योजनाएं तैयार करता रहा है, लेकिन हालिया घटनाओं ने उसकी कई गणनाओं को विफल कर दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सऊदी अरब ने अमेरिका से यमन के ख़िलाफ़ सैन्य तनाव में शामिल होने का अनुरोध किया था, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
मंसूर ने आगे कहा कि, सऊदी अरब अब यमन में अपनी मौजूदगी को लंबे समय तक बनाए रखने की स्थिति में नहीं है और उसे अंततः पीछे हटना पड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि, रियाद यमनी हमलों से अपनी सैन्य और तेल प्रतिष्ठानों को हुए नुक़सान को छिपाने की कोशिश कर रहा है।


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