यमन की सशस्त्र सेनाएँ सऊदी शासन के साथ निर्णायक लड़ाई लड़ रही हैं: अंसारुल्लाह

यमन की सशस्त्र सेनाएँ सऊदी शासन के साथ निर्णायक लड़ाई लड़ रही हैं: अंसारुल्लाह

अंसारुल्लाह के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा है कि, यमन की सशस्त्र सेनाएँ सऊदी अरब के साथ चल रहे संघर्ष में एक निर्णायक चरण से गुज़र रही हैं और टकराव बढ़ने की स्थिति में सैन्य कार्रवाई के दायरे तथा संभावित लक्ष्यों में भी विस्तार हो सकता है।

अंसारुल्लाह के राजनीतिक कार्यालय के सदस्य हिज़ाम अल-असद ने यमन और सऊदी नेतृत्व वाले पक्ष के बीच जारी सैन्य टकराव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, यमनी सशस्त्र सेनाएँ इस समय एक “निर्णायक लड़ाई” लड़ रही हैं।

अल-असद ने कहा:

“हमारी सशस्त्र सेनाएँ, सर्वशक्तिमान ईश्वर की सहायता से, आक्रामक सऊदी शासन के साथ एक निर्णायक लड़ाई लड़ रही हैं। टकराव का दायरा बढ़ने के साथ-साथ लक्ष्यों के चयन में विकल्पों का विस्तार और उनमें विविधता लाना भी अनिवार्य हो जाएगा।”

अंसारुल्लाह के इस बयान में यह संकेत दिया गया है कि संगठन संघर्ष को केवल सीमित सैन्य टकराव के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि संभावित रूप से इसके व्यापक होने की स्थिति के लिए भी अपनी सैन्य क्षमताओं और विकल्पों को तैयार मानता है।

बयान में विशेष रूप से “लक्ष्यों के चयन में विकल्पों के विस्तार और विविधता” की बात कही गई है। इसका अर्थ यह है कि यदि संघर्ष का दायरा बढ़ता है, तो अंसारुल्लाह के अनुसार यमनी सशस्त्र बल अपनी सैन्य कार्रवाई के लिए अधिक व्यापक विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब यमन से जुड़ा संघर्ष लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा और मध्य-पूर्व की राजनीति का एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। अंसारुल्लाह स्वयं यमन के संघर्ष में एक प्रमुख पक्ष है और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य हस्तक्षेप का लंबे समय से विरोध करता रहा है।

अंसारुल्लाह अपने सैन्य अभियानों को यमन की संप्रभुता और विदेशी सैन्य हस्तक्षेप के विरोध से जोड़कर प्रस्तुत करता है, जबकि उसके विरोधी उसके सैन्य अभियानों को क्षेत्रीय अस्थिरता और सुरक्षा के लिए ख़तरा बताते हैं। इसलिए संगठन के नेताओं के बयानों को उसके अपने राजनीतिक और सैन्य दृष्टिकोण के संदर्भ में समझना आवश्यक है।

हिज़ाम अल-असद के ताज़ा बयान का मुख्य संदेश यही है कि, अंसारुल्लाह संघर्ष को निर्णायक चरण के रूप में देख रहा है और टकराव के विस्तार की स्थिति में अपनी सैन्य प्रतिक्रिया के दायरे को बढ़ाने की चेतावनी दे रहा है।

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