सऊदी मीडिया ने इज़रायल विरोधी रुख क्यों अपनाया है?
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक रिपोर्ट में इस सवाल की जांच की है कि हाल के महीनों में सऊदी मीडिया ने इज़रायल के खिलाफ कड़ा रुख क्यों अपनाया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि हाल के महीनों में सऊदी अरब की सरकारी और सरकार के करीबी मीडिया संस्थानों ने इज़रायल के खिलाफ अपनी भाषा को तेज़ कर दिया है।
यह बदलाव मध्य पूर्व की इन दो शक्तियों के बीच कूटनीतिक संबंधों के सामान्यीकरण की संभावना के कमजोर होने का एक और संकेत माना जा रहा है। यह मीडिया बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब इससे पहले, “अब्राहम समझौते” के तहत सऊदी अरब का इज़रायल के साथ संबंध सामान्य करना अमेरिका और इज़रायल के प्रमुख क्षेत्रीय लक्ष्यों में शामिल था। जनवरी में, सऊदी अख़बार “अल-रियाद” में प्रकाशित एक संपादकीय में इज़रायल पर अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रभुता की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया। लेख में कहा गया था: “जहाँ भी इज़रायल मौजूद होता है, वहाँ केवल तबाही और विनाश ही बचता है।” यह संदेश सिर्फ मीडिया तक सीमित नहीं रहा। कुछ सऊदी धर्मगुरुओं ने भी इसे और तीखा किया।
दिसंबर में मक्का की ग्रैंड मस्जिद के इमाम शेख सालेह बिन हमीद ने अपने ख़ुतबे में कहा:
“हे ईश्वर, उन यहूदियों से निपट जो क़ब्ज़ा और अतिक्रमण करते हैं, क्योंकि वे तेरी शक्ति से बच नहीं सकते।”
सऊदी अरब के इज़रायल-विरोधी रुख में यूएई की भूमिका
सऊदी अधिकारियों के अनुसार, इस बदले हुए लहजे का एक कारण सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच बढ़ता सार्वजनिक मतभेद है। यूएई, खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक नेतृत्व के लिए सऊदी अरब का मुख्य प्रतिद्वंद्वी माना जाता है और कई क्षेत्रीय संघर्षों में उसने सऊदी अरब से अलग या कभी-कभी विरोधी रुख अपनाया है।
यूएई, अमेरिका समर्थित अब्राहम समझौतों का सबसे प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता भी है। सऊदी सूत्रों के अनुसार, हालिया सऊदी मीडिया अभियान विशेष रूप से यूएई और इज़रायल के रिश्तों को निशाना बना रहा है, क्योंकि इन्हें आसानी से जनभावनाओं को भड़काने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
सऊदी स्तंभकार अहमद बिन उस्मान अल-तुवैजरी ने अख़बार “अल-जज़ीरा” में लिखा:
“अबू धाबी का शासक यह मानता है कि पुराने हिसाब चुकाने और सऊदी अरब के प्रति ईर्ष्या व हीन भावना का इलाज ज़ायोनिज़्म की गोद में शरण लेना और यूएई को अरब दुनिया में इज़रायल का ट्रोजन हॉर्स बनाना है।”
सरकारी समन्वय से इनकार, लेकिन जनाक्रोश की स्वीकारोक्ति
सऊदी अरब सरकार इस बात से इनकार करता है कि यह मीडिया कवरेज सरकारी स्तर पर निर्देशित है। हालांकि, वह यह स्वीकार करतीा है कि, इज़रायल के प्रति जनता का गुस्सा स्पष्ट रूप से बढ़ा है, जिससे संबंध सामान्य करने को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा है। पिछले वर्षों में सऊदी अरब में इज़रायल की छवि सुधारने और 3.5 करोड़ की आबादी को संभावित कूटनीतिक संबंधों के लिए मानसिक रूप से तैयार करने के प्रयास किए गए थे।
ग़ाज़ा युद्ध से बदली रियाद की दिशा
लेकिन ग़ाज़ा युद्ध ने समीकरण बदल दिए हैं। सऊदी और इज़रायली अधिकारियों के अनुसार, युद्ध में हुई मौतों और व्यापक तबाही ने इज़रायल के प्रति नजरिये को और कठोर बना दिया है और सऊदी अरब की जल्दबाज़ी को कम कर दिया है। रियाद अब भी कहता है कि, यदि फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना की ओर कोई स्पष्ट रास्ता दिखता है, तो वह इज़रायल से संबंध सामान्य करने पर विचार करेगा, लेकिन फिलहाल उसकी विदेश नीति में अन्य प्राथमिकताएँ अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं।
वॉल स्ट्रीट जर्नल लिखता है कि भले ही तीखी मीडिया भाषा सीधे तौर पर गहरी विदेश नीति प्राथमिकताओं को न दर्शाए, लेकिन यह रुख सऊदी अरब में इज़रायल के प्रति संवेदनशीलता कम करने के वर्षों पुराने प्रयासों के विपरीत है। पहले, सऊदी मीडिया ने खाड़ी देशों द्वारा इज़रायल से संबंध सामान्य करने के फैसलों पर अपेक्षाकृत तटस्थ रुख अपनाया था और कई बार ग़ाज़ा युद्ध की शुरुआत और जारी रहने के लिए हमास की भूमिका की कड़ी आलोचना भी की थी।
अमेरिका में बढ़ती परेशानी
इस बदलाव ने अमेरिका में भी सऊदी अरब के लिए समस्याएँ पैदा की हैं। एंटी-डिफेमेशन लीग (ADL) ने सऊदी प्रमुख हस्तियों द्वारा “यहूदियों, इज़रायल और अब्राहम समझौतों के खिलाफ बढ़ती अपमानजनक टिप्पणियों” पर चिंता जताई है।
अमेरिकी रक्षा विभाग के पूर्व अधिकारी डैनियल शापिरो ने कहा:
“यह सवाल उठता है कि क्या मोहम्मद बिन सलमान अब भी उस उदारवादी रास्ते के प्रति प्रतिबद्ध हैं, जिस पर ट्रंप और बाइडेन दोनों ने निवेश किया था।”
सऊदी अरब का जवाब और भविष्य की तस्वीर
अमेरिका में सऊदी दूतावास ने कहा है कि, देश यहूदी-विरोध को अस्वीकार करता है और यदि इज़रायल फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए प्रतिबद्ध होता है, तो वह संबंध सामान्य करने को तैयार है। हाल ही में सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने वाशिंगटन का दौरा किया और यहूदी समूहों से मुलाकात में क्षेत्रीय एकीकरण और सहयोग के प्रति सऊदी प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया।
मार्क डुबोविट्ज़, फाउंडेशन फ़ॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज़ के अध्यक्ष के अनुसार, सऊदी अधिकारियों ने महसूस किया है कि यूएई के साथ उनका विवाद तेज़ इज़रायल -विरोधी रुख में बदल गया है, जिससे वाशिंगटन में उनके लिए गंभीर समस्याएँ पैदा हो रही हैं। इस बीच, मोहम्मद बिन सलमान सऊदी अरब की रूढ़िवादी छवि को आधुनिक बनाने की परियोजना जारी रखे हुए हैं, जिनमें शराब बिक्री पर प्रतिबंध हटाना जैसे कदम भी शामिल हैं।
इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि तेल अवीव सऊदी अरब में हो रहे बदलावों पर नज़र रखे हुए है और उम्मीद करता है कि जो देश शांति या सामान्यीकरण चाहता है, वह शांति-विरोधी ताक़तों के साथ खड़ा न हो।


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