ग़ाज़ा के अस्पतालों में इलाज के संसाधन होते, तो हज़ारों जानें बच सकती थीं: अमेरिकी डॉक्टरों का बयान
ग़ाज़ा में जारी युद्ध और चिकित्सा संसाधनों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट का सामना कर रही है। अमेरिकी डॉक्टरों के बयानों के अनुसार, यदि अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयाँ, आधुनिक चिकित्सा उपकरण और अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध होतीं, तो गंभीर रूप से घायल हज़ारों फ़िलिस्तीनियों की जान बचाई जा सकती थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयेसस ने 24 सितंबर को बताया था कि ग़ाज़ा के 36 अस्पतालों में से केवल 19 आंशिक रूप से काम कर रहे हैं और एक भी अस्पताल पूरी तरह से चालू नहीं है। दवाइयों, जाँच उपकरणों और ईंधन की कमी ने मरीजों का इलाज बेहद मुश्किल बना दिया है।
समय पर इलाज न मिलने से बच्चों की जान ख़तरे में
आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. नूर शरफ़ ने जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच तीन बार ग़ाज़ा का दौरा किया। उन्होंने आलिया नाम की दो वर्षीय बच्ची का उदाहरण दिया, जो विस्फोट के कारण इमारत की दूसरी मंज़िल से गिर गई थी। डॉक्टरों को उसके मस्तिष्क में रक्तस्राव होने का संदेह था, लेकिन सीटी स्कैन कराने में चार घंटे लग गए। जाँच में रक्तस्राव की पुष्टि होने तक बच्ची की जान बचाने का समय निकल चुका था। एक न्यूरोसर्जन ने बताया कि समय पर अस्पताल पहुँचने के बावजूद ऑपरेशन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं थे।
डॉ. शरफ़ के अनुसार, अल-शिफ़ा अस्पताल के अस्थायी आपातकालीन विभाग में एक समय में 300 तक घायल मरीज पहुँचते थे। चेस्ट ट्यूब जैसी आवश्यक सामग्री समाप्त हो जाने पर चिकित्सा कर्मचारियों को वैकल्पिक उपकरण तैयार करने पड़े। हृदय रोगों की जाँच के लिए आवश्यक सुविधाओं और स्टेंट की भी कमी थी।
पुराने उपकरणों से जटिल ऑपरेशन
रीढ़ की हड्डी के सर्जन डॉ. मोहम्मद अदील ख़लील ने अप्रैल 2024 से अगस्त 2025 के बीच तीन बार ग़ाज़ा का दौरा किया। उन्होंने बताया कि गोली लगने से घायल एक युवक की रीढ़ की हड्डी को स्थिर करने के लिए बंद पड़े अस्पताल से मिले अलग-अलग प्रकार के स्क्रू का इस्तेमाल करना पड़ा। कुछ मामलों में मृत मरीजों के शरीर से धातु की पिनें निकालकर संक्रमणमुक्त करने के बाद दोबारा इस्तेमाल किया गया। इसके बावजूद, उन्होंने एक 18 वर्षीय लकवाग्रस्त लड़की का सफल ऑपरेशन किया, जिसके बाद वह दोबारा चलने-फिरने में सक्षम हुई।
चिकित्सा सामग्री पर प्रतिबंधों का आरोप
दोनों डॉक्टरों ने ग़ाज़ा में चिकित्सा उपकरण ले जाने पर इस्राईली प्रतिबंधों को गंभीर समस्या बताया। डॉ. ख़लील के अनुसार, इस्राईली अधिकारियों ने उनकी टीम के उपकरण ज़ब्त कर लिए और उन्हें दोबारा ग़ाज़ा में प्रवेश करने से रोक दिया। ‘फिज़िशियन्स फ़ॉर ह्यूमन राइट्स’ संगठन ने एनेस्थेटिक्स, चेस्ट ट्यूब और हड्डियों की सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले स्क्रू पर प्रतिबंधों का दस्तावेज़ीकरण किया है। मार्च 2026 में ‘वायर्ड’ पत्रिका की जाँच में भी सर्जिकल उपकरणों को आवश्यक अनुमति न होने के कारण ज़ब्त किए जाने का मामला सामने आया।
कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट बताती है कि ग़ाज़ा में चिकित्सा संसाधनों की कमी और उपकरणों की आवाजाही पर प्रतिबंधों के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। परिणामस्वरूप, ऐसी चोटों और बीमारियों से भी लोगों की जान जा रही है, जिनका सामान्य परिस्थितियों में इलाज संभव होता।


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