लेबनान सरकार की आत्मसमर्पणवादी नीति ने इस्राईली हमलों का रास्ता खोला: हिज़्बुल्लाह

लेबनान सरकार की आत्मसमर्पणवादी नीति ने इस्राईली हमलों का रास्ता खोला: हिज़्बुल्लाह

लेबनान की संसद में  के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि अली अम्मार ने कल शुक्रवार शाम देश की स्थिति पर बोलते हुए इस्राईल के लगातार हमलों और लेबनानी सरकार की निष्क्रियता के बीच दक्षिणी लेबनान के शहर दैर मिमास में लेबनानी सेना के ठिकानों पर इस्राईली सेना के हमले की कड़ी निंदा की।

अली अम्मार ने कहा:

“इस्राईली सेना का यह निर्लज्ज आक्रमण एक और प्रमाण है कि आक्रमणकारी शासन, लेबनान में ऐसी मज़बूत सेना नहीं चाहता, जो अपनी राष्ट्रीय भूमिका निभाते हुए देश की भूमि और सीमाओं की रक्षा कर सके।”

उन्होंने कहा कि, लेबनानी सरकार ने तथाकथित ‘फ्रेमवर्क समझौते’ के माध्यम से इस्राईल के आक्रमण और क़ब्ज़े को वैधता प्रदान की है, जबकि इस्राईल ने पहले ही दिन से इस समझौते का उल्लंघन किया है।

इस हिज़्बुल्लाह प्रतिनिधि ने जोर देकर कहा कि, इस्राईल लेबनानी सरकार पर अपनी शर्तें थोप रहा है और खुद को यह अधिकार दे रहा है कि वह लेबनानी सेना के बारे में निर्णय ले—यह तय करे कि सेना कहाँ तैनात हो सकती है, किन क्षेत्रों में प्रवेश कर सकती है और किन इलाकों के क़रीब जा सकती है।

उन्होंने कहा कि, लेबनानी सरकार ने साबित कर दिया है कि वह अपनी सेना की गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए निर्णय लेने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि, दैर मिमास में जो हुआ, उसे लेबनानी अधिकारियों को इस्राईल के सामने लगातार रियायतें देने की नीति समाप्त करने तथा अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर आँख मूँदकर निर्भरता छोड़ने के लिए मजबूर करना चाहिए।

लेबनानी सांसद ने कहा कि दैर मिमास में लेबनानी सेना पर इस्राईली हमला लेबनान की संप्रभुता और उसके राष्ट्रीय संस्थानों की गरिमा पर एक स्पष्ट और निर्लज्ज हमला है।

उन्होंने कहा:

“दैर मिमास में जो हुआ, वह पूरे लेबनान पर हमला है और इसे अधिकारियों को अपनी नीतियों और विकल्पों पर पुनर्विचार करने तथा दुश्मन के साथ बेकार की बातचीत बंद करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।”

हिज़्बुल्लाह के इस प्रतिनिधि ने आगे कहा कि यह गंभीर घटना लेबनानी अधिकारियों से खतरे की घंटी बजाने और यह समझने की मांग करती है कि इस्राईल का यह निर्लज्ज आक्रमण उस ग़लत और अपमानजनक रास्ते का स्वाभाविक परिणाम है, जिसे लेबनानी सरकार ने अपनाया है और जिसके तहत वह लगातार दुश्मन को मुफ्त में रियायतें देती जा रही है।

उन्होंने चेतावनी दी:

“लेबनानी अधिकारियों को समझना चाहिए कि इस्राईल और उसके पीछे खड़े अमेरिकी चाहते हैं कि लेबनान एक कमजोर देश बने, जिसके पास ऐसी सेना न हो जो अपनी संप्रभुता की रक्षा करने में सक्षम हो। वे एक कमजोर, आज्ञाकारी और अपनी रक्षा करने की शक्ति से वंचित लेबनान चाहते हैं।”

रेज़िस्टेंस गुट के इस प्रतिनिधि ने अपने भाषण के अंत में कहा कि इस समय आवश्यकता इस बात की है कि लेबनानी सेना लेबनान, उसकी संप्रभुता और उसके लोगों की रक्षा में अपनी वास्तविक भूमिका निभा सके। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में लेबनानी सरकार का दायित्व है कि वह सेना को राजनीतिक और सैन्य रूप से मज़बूत करे और किसी भी तरह के दबाव या संरक्षकता के सामने उसके राष्ट्रीय निर्णय की रक्षा करे।

दैर मिमास में क्या हुआ?

एक दिन पहले लेबनानी मीडिया ने रिपोर्ट दी थी कि इस्राईली सैनिक दक्षिणी लेबनान के नबातियेह क्षेत्र में स्थित दैर मिमास कस्बे के आसपास आगे बढ़े। यह इलाका लेबनानी सेना की हाल ही में स्थापित एक चौकी के निकट है। रिपोर्टों के अनुसार, इस्राईली सैनिकों ने लेबनानी सेना के जवानों की ओर पाँच से अधिक साउंड ग्रेनेड (ध्वनि/स्टन ग्रेनेड) फेंके।

खबर के अनुसार, कब्ज़ा करने वाले इस्राईल के ये हमले ऐसे समय में भी जारी हैं जब लेबनान की सरकार ने इस्राईली हमलों को रोकने के लिए कोई क़दम उठाने के बजाय उनके साथ सीधी बातचीत और समझौते की प्रक्रिया जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।

लेबनानी सरकार और इस्राईल के बीच 26 जून को वॉशिंगटन में तथाकथित ‘फ्रेमवर्क समझौते’ पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद से, लेबनानियों—विशेषकर दक्षिणी क्षेत्रों के लोगों—को हमलों, तबाही और अधिक विनाश के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ है।

वे अधिकारी, जिन्होंने ‘फ्रेमवर्क समझौते’ को राजनीतिक और कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश करने में जल्दबाजी की थी, अब दक्षिणी लेबनान के गांवों में रोज़ाना हो रही तबाही के बीच असहाय नजर आ रहे हैं, जबकि इस्राईल के हमले लगातार जारी हैं।

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