सऊदी अरब की वॉशिंगटन से शिकायत: ईरान पर यूएई के हमलों को लेकर चिंता
सऊदी अरब ने अप्रैल की शुरुआत में संयुक्त राज्य अमेरिका से शिकायत की थी कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सैन्य कार्रवाइयाँ ईरान को क्षेत्र की ऊर्जा अवसंरचनाओं पर जवाबी हमले करने के लिए उकसा सकती हैं। ऐसा होने पर तेल बाज़ारों में अस्थिरता पैदा हो सकती है और वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल द्वारा उद्धृत इन वार्ताओं से परिचित सूत्रों के अनुसार, सऊदी अधिकारियों ने वॉशिंगटन से अनुरोध किया था कि वह अबू धाबी पर हमलों के दायरे को सीमित करने के लिए दबाव डाले। साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया कि क्षेत्र के कई देशों द्वारा तनाव कम करने के लिए चलाए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दी जाए।
सऊदी अरब का मानना था कि सैन्य कार्रवाई के विस्तार से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को खतरा हो सकता है, इसलिए टकराव बढ़ाने के बजाय संवाद और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करने पर ज़ोर दिया जाना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, रियाद ने वॉशिंगटन से आग्रह किया था कि वह अबू धाबी पर दबाव डालकर उसकी सैन्य कार्रवाइयों के दायरे को सीमित करे। सऊदी नेतृत्व का मानना था कि यूएई की आक्रामक नीति पूरे क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है। विशेष रूप से, यदि ईरान ने प्रतिशोध में खाड़ी देशों की ऊर्जा सुविधाओं या समुद्री मार्गों को निशाना बनाया, तो वैश्विक तेल बाज़ारों में भारी उथल-पुथल मच सकती है और तेल की कीमतों में तेज़ वृद्धि हो सकती है।
रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब और अन्य क्षेत्रीय देशों ने उस समय कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से तनाव कम करने की कोशिश की थी, लेकिन यूएई की सैन्य कार्रवाइयों ने इन प्रयासों को कमजोर करने का जोखिम पैदा कर दिया। रियाद का मानना था कि किसी भी एकतरफा सैन्य कदम से पूरे क्षेत्र को उसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं, जबकि संवाद और कूटनीति ही दीर्घकालिक स्थिरता का रास्ता है।
सऊदी अधिकारियों की इस शिकायत को खाड़ी देशों के भीतर भी रणनीतिक मतभेदों के संकेत के रूप में देखा गया, जहाँ कुछ देश टकराव के बजाय राजनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहे थे, जबकि यूएई पर क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने के आरोप लग रहे थे।


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