लेबनान में किसी भी प्रकार का युद्धविराम लागू नहीं है: शेख नईम कासिम

लेबनान में किसी भी प्रकार का युद्धविराम लागू नहीं है: शेख नईम कासिम

हिज़्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम ने लेबनान के ताज़ा हालात पर जारी एक बयान में कहा कि प्रतिरोध, अपने लोगों और समर्थकों के साथ, सीमित संख्या और साधनों के बावजूद अमानवीय ताकतों के अत्याचार के सामने डटकर खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रतिरोध ने अपने शहीदों की सर्वोच्च और गौरवपूर्ण कुर्बानियां पेश की हैं, दुश्मन को उसके उद्देश्यों तक पहुंचने से रोका है और आगे भी इसी मार्ग पर डटा रहेगा।

उन्होंने कहा कि आज यह क्षेत्र और आने वाली पीढ़ियां इतिहास के एक बेहद खतरनाक दौर से गुजर रही हैं, जहां ज़ायोनी दुश्मन अमेरिकी समर्थन और नेतृत्व में तथा अन्य उपनिवेशवादी देशों की मदद से इस क्षेत्र पर हमला कर रहा है।

शेख नईम कासिम ने स्पष्ट कहा कि लेबनान में  किसी भी प्रकार का युद्धविराम लागू नहीं है। जो कुछ हो रहा है, वह इज़राइल-अमेरिका का लगातार जारी आक्रमण है। उन्होंने कहा कि लेबनान हमला झेलने वाला पक्ष है और अपनी सुरक्षा तथा संप्रभुता की रक्षा के लिए उसे ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी की आवश्यकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इज़राइली पक्ष ने युद्धविराम समझौते की एक भी शर्त लागू नहीं की, बल्कि दस हज़ार से अधिक बार उसका उल्लंघन किया है।

प्रतिरोध का प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा; पीठ पीछे वार न करें

शेख नईम कासिम ने कहा कि दुश्मन तथाकथित “ग्रेटर इज़रायल” के अपने लक्ष्य की दिशा में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सका है और न ही कभी इस उद्देश्य में सफल होगा, चाहे दुनिया की तमाम आक्रामक ताकतें उसके साथ क्यों न खड़ी हो जाएं।

दक्षिण लेबनान की स्थिति पर उन्होंने कहा कि लेबनानी सेना लितानी नदी के दक्षिण में समझौते के पालन के लिए तैनात है, जबकि प्रतिरोध ने मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप अपनी रणनीति और तरीके अपनाए हैं।

उन्होंने इज़रायली शासन की ओर से किसी भी पूर्व शर्त, योजना या तथाकथित “रेड लाइन” को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि न कोई रेड लाइन है और न ही कोई बफर ज़ोन मौजूद है, और न भविष्य में बनने दिया जाएगा।

अंत में उन्होंने प्रतिरोध सेनानियों और लेबनान की जनता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा दास्तानवी और ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है, जिसने मित्र और शत्रु—दोनों को हैरान कर दिया। साथ ही, उन्होंने बेरूत में बैठे राजनेताओं को संबोधित करते हुए कहा: “प्रतिरोध की पीठ में खंजर मत घोंपिए।”

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