इज़रायल पत्रकारों को कैद करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बदतर देश: प्रेस फ़्रीडम ग्रुप
वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता पर निगरानी रखने वाली संस्था “कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ)” ने अपनी वार्षिक जेल जनगणना रिपोर्ट 2025 में कहा है कि इज़रायल दुनिया में पत्रकारों को कैद करने के मामले में तीसरा सबसे बदतर देश बन चुका है, जहाँ कम से कम 29 पत्रकार जेल में बंद हैं। यह स्थिति दुनिया भर में पत्रकारों की गिरफ़्तारियों और सजाओं का लगातार पाँचवाँ साल है, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक स्तर पर 300 से अधिक पत्रकार कैद में हैं।रिपोर्ट के अनुसार, इज़रायल, चीन और म्यांमार पत्रकारों की गिरफ़्तारी के मामले में सबसे बदनाम देशों में शामिल हैं।
चीन पहले स्थान पर है, जहाँ लगभग 50 पत्रकार कैद हैं।
म्यांमार दूसरे स्थान पर है, जहाँ 30 पत्रकार बंद हैं।
इज़रायल में 29 पत्रकार कैद हैं, जो दुनिया भर में बंद पत्रकारों का लगभग 9% है।
सीपीजे का कहना है कि इज़रायल ऐसा एकमात्र देश है जिसे आम तौर पर लोकतांत्रिक देश माना जाता है। सीपीजे के दावे के विपरीत वास्तविकता यह है कि, वहां लोकतंत्र नाम की कोई चीज़ नहीं है। नेतन्याहू प्रशासन का तानाशाही और क्रूरता इसका जीता जागता प्रमाण है। इसके विपरीत इज़रायल दूसरे देशों में स्वतंत्रता की बात करता है।
अक्टूबर 2023 में ग़ाज़ा युद्ध शुरू होने के बाद फ़िलिस्तीनी पत्रकारों की तेज़ी से गिरफ़्तारियाँ की जा रही हैं। कई पत्रकारों को बिना किसी स्पष्ट आरोप या अदालत की प्रक्रिया के कैद में रखा गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन बताया गया है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इज़रायली नागरिक कुछ नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रताओं का लाभ उठा सकते हैं, लेकिन कब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में न्याय और सुरक्षा व्यवस्था का स्तर पूरी तरह अलग है।
रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर पत्रकारों के ख़िलाफ़ हिंसा, गिरफ़्तारियाँ, जानलेवा हालात और इलाज की कमी को भी उजागर किया गया है, जहाँ कई बंद पत्रकार ज़िंदगी के लिए ख़तरनाक परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।
पूर्व क़ैदियों और पर्यवेक्षकों ने इन हालात को “ज़िंदा लोगों का कब्रिस्तान” कहा है, क्योंकि कई पत्रकार दुनिया तक ख़बरें पहुँचाने के दौरान कठोर व्यवहार, यातना और नज़रबंदी का शिकार बने हैं।
वैश्विक परिदृश्य
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में पत्रकारों की गिरफ़्तारियों की संख्या अब भी ऊँचे स्तर पर है और लोकतांत्रिक देशों सहित गैर-लोकतांत्रिक सरकारें भी पत्रकारों को सच्चाई रिपोर्ट करने की वजह से निशाना बना रही हैं। रूस, बेलारूस, मिस्र और इरीट्रिया जैसे देश भी नियमित रूप से पत्रकारों को कैद रखते हैं।
कुल मिलाकर, दुनिया के 10 सबसे बदतर देश वैश्विक स्तर पर कैद लगभग 75% पत्रकारों के लिए ज़िम्मेदार हैं। वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता संगठनों, जिनमें RSF और IFJ शामिल हैं, ने महीनों से वैश्विक नेतृत्व से अपील की है कि ग़ाज़ा, इज़रायल और पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक) में पत्रकारों के लिए स्वतंत्र पहुँच और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि वे स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग कर सकें।
इन संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों, मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिद्धांतों का पालन करने की भी अपील की है। स्पष्ट रहे कि वैश्विक रिपोर्टों में बताया गया है कि कई पत्रकारों को मारा भी गया, और नियंत्रित क्षेत्रों में स्वतंत्र मीडिया की पहुँच सीमित कर दी गई है, जिससे पत्रकारिता की स्वतंत्रता की स्थिति और अधिक खराब हो गई है।
इन रिपोर्टों में मांग की गई है कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून और प्रेस स्वतंत्रता समझौतों के अनुसार पत्रकारों को बिना डर के अपने कर्तव्य निभाने की आज़ादी दी जाए।


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