‘सोमालीलैंड’ में इज़रायल हमारे लिए वैध लक्ष्य है: अल-हूती
यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने घोषणा की है कि सोमालिया में इज़रायली शासन की किसी भी प्रकार की मौजूदगी को यमन की सशस्त्र सेनाएँ एक वैध सैन्य लक्ष्य मानेंगी।
फार्स न्यूज़ एजेंसी, अंतरराष्ट्रीय डेस्क:
यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने इज़रायली शासन द्वारा सोमालीलैंड को मान्यता देने की प्रतिक्रिया में तेल अवीव के ख़िलाफ़ कड़ा रुख अपनाया और इस क़दम को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए प्रत्यक्ष खतरा बताया है। उनके ये बयान ग़ाज़ा के लोगों के प्रति यमनियों के पूर्ण समर्थन की निरंतरता को दर्शाते हैं।
अल-जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अल-हूती ने कहा:
“सोमालीलैंड की भूमि पर इज़रायल की कोई भी मौजूदगी हमारी सशस्त्र सेनाओं के लिए एक वैध सैन्य लक्ष्य होगी।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस क़दम को वे सोमालिया और यमन, दोनों के ख़िलाफ़ एक साथ किया गया आक्रमण मानेंगे।
अंसारुल्लाह के नेता ने इज़रायल द्वारा सोमालीलैंड को मान्यता देने को “शत्रुतापूर्ण रुख” बताया और कहा कि, यह न केवल सोमालिया और उसके अफ्रीकी परिवेश के ख़िलाफ़ है, बल्कि यमन, लाल सागर और इस रणनीतिक जलमार्ग से जुड़े सभी देशों की सुरक्षा को भी निशाना बनाता है। उनके अनुसार, यह गतिविधि “सोमालिया में पैर जमाने और पूरे क्षेत्र को सीधे तौर पर धमकी देने की एक सोची-समझी कोशिश” है।
अल-हूती ने चेतावनी दी कि इज़रायल का यह कदम केवल सोमालिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह “क्षेत्र के देशों को विभाजित करने” की एक व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसे उनके शब्दों में “मध्य पूर्व को बदलने” के नाम से आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा:
“दुश्मन इज़रायल इस घोषणा के ज़रिए ऐसे शत्रुतापूर्ण कदम उठाना चाहता है जो लाल सागर और अदन की खाड़ी की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं।” अंसारुल्लाह के नेता ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन “सोमाली जनता के समर्थन में हर संभव कदम” उठाएगा और यह अनुमति नहीं देगा कि इज़रायल की मौजूदगी अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय नौवहन के महत्वपूर्ण मार्गों में और अधिक अस्थिरता का कारण बने।
अरब लीग ने इज़रायली कदम को अवैध बताते हुए निंदा की
यह बयान ऐसे समय में सामने आए हैं जब इज़रायल द्वारा सोमालीलैंड को मान्यता दिए जाने पर क्षेत्रीय स्तर पर नकारात्मक प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं और लाल सागर तथा अदन की खाड़ी में इसके सुरक्षा परिणामों को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। अरब लीग ने इस इज़रायली कदम को अवैध और निरस्त बताते हुए इसकी निंदा की और कहा कि सोमालीलैंड के उत्तरी बंदरगाहों का सैन्य अड्डों के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जाना पूरी तरह निंदनीय है।
अरब देशों ने फ़िलिस्तीनी जनता के जबरन विस्थापन की किसी भी योजना को आसान बनाने वाले हर क़दम को अस्वीकार करते हुए कहा कि, सोमालिया का उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र, यानी सोमालीलैंड, संघीय गणराज्य सोमालिया का अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि इसे मान्यता देना वैश्विक सुरक्षा और शांति को अस्थिर करने के लिए इज़रायल के प्रयासों का हिस्सा है। अरब लीग ने यह भी कहा कि यह क़दम अरब राष्ट्रीय सुरक्षा पर हमला है और इसके ख़िलाफ़ कानूनी, आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।


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