इस्राईल ने नेतन्याहू की ख़ुफ़िया और अघोषित यूएई यात्रा की पुष्टि की

इस्राईल ने नेतन्याहू की ख़ुफ़िया और अघोषित यूएई यात्रा की पुष्टि की

इस्राईल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोमवार शाम पुष्टि की कि, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की ख़ुफ़िया और अघोषित यात्रा की थी। यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी WAM के अनुसार, नेतन्याहू ने अबू धाबी में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान से मुलाक़ात की।

नेतन्याहू की अबू धाबी यात्रा ने एक बार फिर पश्चिम एशिया की कूटनीति के उस असहज विरोधाभास को सामने ला दिया है, जिसमें ग़ाज़ा के मानवीय संकट पर अरब सरकारें सार्वजनिक रूप से कड़ी आपत्ति जताती हैं, लेकिन साथ ही इस्राईल के साथ उच्च-स्तरीय राजनयिक और सुरक्षा संपर्क भी बनाए रखती हैं।

28 सितंबर 2026 को यूएई ने भी पुष्टि की कि, इस्राईली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अबू धाबी में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद से मुलाकात की। आधिकारिक विवरण के अनुसार दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने और क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा की। रिपोर्टों में ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण विषय बताया गया है।

यह मुलाक़ात ऐसे समय हुई है जब ग़ाज़ा में मानवीय संकट लगातार अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ है। अगस्त में यूएई, मिस्र, क़तर, जॉर्डन और सऊदी अरब समेत कई देशों ने इस्राईली कार्रवाइयों, नागरिक मौतों और चिकित्सा ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की थी। सितंबर में भी इन्हीं देशों ने ग़ाज़ा में मानवीय पीड़ा पर चिंता जताते हुए युद्ध-विराम और निर्बाध मानवीय सहायता की मांग दोहराई।

यहीं अरब सरकारों की नीति पर सबसे तीखा सवाल उठता है: अगर ग़ाज़ा में नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन इतना गंभीर मुद्दा है, तो इस्राईली नेतृत्व के साथ रणनीतिक संवाद और सुरक्षा संपर्क कितनी दूर तक जायज़ ठहराए जा सकते हैं? सार्वजनिक निंदा और पर्दे के पीछे जारी रणनीतिक संपर्कों के बीच यह अंतर उनकी कूटनीति की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।

हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी किसी गुप्त समझौते या नई सुरक्षा व्यवस्था का प्रमाण नहीं देती। इसलिए अटकलों को तथ्य बनाना उचित नहीं होगा। लेकिन इतना स्पष्ट है कि 2020 के अब्राहम समझौते के बाद बने यूएई-इस्राईल संबंध अब भी सक्रिय हैं।

ग़ाज़ा संकट के बीच यह तस्वीर अरब कूटनीति की कठोर वास्तविकता दिखाती है: सार्वजनिक बयान फिलिस्तीन के पक्ष में हो सकते हैं, लेकिन रणनीतिक हित, ईरान की चिंता, आर्थिक संबंध और अमेरिका के साथ साझेदारी कई सरकारों को इस्राईल के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए प्रेरित करती हैं।

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