ईरान की दो टूक, परमाणु वार्ता में हमें कोई जल्दबाज़ी नहीं
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनआनी का परमाणु वार्ता के मामले में बड़ा महत्वपूर्ण बयान सामने आया है कि परमाणु वार्ता में हमें कोई जल्दबाज़ी नहीं, और किसी दबाव में आकर अपने राष्ट्रीय हितों को क़ुरबान नहीं कर सकते हैं? उनके इस बयान साफ़ तौर पे यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच यूरोपीय संघ के माध्यम से होने वाली वार्ता की इस समय की क्या स्थिति है?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ़ शब्दों में कहा है कि ईरान परमाणु मुद्दे और पाबंदियां हटाने के विषय में वार्ता में किसी भी जल्दबाज़ी में नहीं पड़ेगा और अगर पश्चिमी देशों की तरफ़ से लाख दबाव डाला जाए तब भी ईरान अपने मूल हितों की क़ुरबानी नहीं देगा। ईरान और पश्चिमी देशों के मध्य होने वाली परमाणु वार्ता और उससे जुड़ी ख़बरों व समीक्षाओं को अगर ग़ौर से देखा जाए तो यह बात साफ़ तौर पर नज़र आती है कि पश्चिमी मीडिया और अधिकारी यह माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं कि जैसे अमेरिका की जो बाइडन सरकार परमाणु समझौते में वापस आने में दिलचस्पी तो रखती है लेकिन वह ईरान को अधिक समय हरगिज़ नहीं देना चाहती बल्कि ईरान इस वार्ता के बारे में जल्दी फैसला सुनाये।
उन्होंने कहा कि वास्तव में देखा जाये तो ये अमेरिका की चाल दिखाई दे रही है। पहले तो अमेरिकी सरकार और वहां कि गोदी मीडिया ने यह माहौल बनाना शुरू किया कि जो बाइडन सरकार, ट्रम्प सरकार के फ़ैसले से राज़ी नहीं है और परमाणु समझौते को बहाल करना चाहती है ताकि ईरान अमेरिका की नई सरकार को अलग नज़र से देखे और यह बयान बार बार न दे कि अमेरिका भरोसा करने के क़ाबिल नहीं है। दूसरी बात यह कि ईरान जो बाइडन सरकार के इसी एलान पर यक़ीन कर ले कि अमेरिका परमाणु समझौते में वापस आना जाता है वरना तेहरान के हाथ से परमाणु समझौते की बहाली का मौक़ा निकल जाएगा।
वहीं दूसरी तरफ इब्राहीम रईसी की सरकार, उनके विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान और परमाणु वार्ताकार अली बाक़ेरी ने परमाणु समझौते के मोर्चे कि कमान अपने ऊपर ले रखा है। इन अधिकारियों के बयानों को सुनें तो साफ़ तौर पर ज़ाहिर होगा कि देश के अंदर उत्पादन को बढ़ावा देना उनकी पहली प्राथमिकता है, क्षेत्रीय और पड़ोसी मुल्कों के साथ व्यापार को बढ़ावा देना उनकी दूसरी प्राथमिकता है। पड़ोसी देशों के साथ हर तरह का तनाव दूर करके सहयोग का माहौल मज़बूत करना भी रईसी सरकार की अहम प्राथमिकता में से एक है। जबकि ईरान की प्राथमिकता परमाणु वार्ता और परमाणु समझौता भी है लेकिन तेहरान सरकार की नज़र में यह ऐसी प्राथमिकता हरगिज़ नहीं है कि किसी भी क़ीमत पर उसे अंजाम देना ही है। ईरान ने साफ़ कर दिया है कि वह इस बात के लिए बिलकुल तैयार नहीं है कि अमेरिका फिर धोखा दे। बल्कि ईरान मज़बूत समझौते की बात कर रहा है ताकि अमेरिका धोखा न दे सके।
इस बात से यह भी समझा जा सकता है कि अमेरिका द्वारा पाबंदियां ईरान की अर्थ व्यवस्था को नाकाम और ध्वस्त नहीं कर पाईं जैसे कि अमेरिका को उम्मीद थी। ईरान पहले से और अधिक मज़बूत स्थिति में है और इसी मज़बूत स्थिति में मज़बूत स्वर में मज़बूत समझौता करना चाहता है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हालिया बयान से इस विश्वास की झलक साफ़ नज़र आती है।


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