एक महीने से भी कम समय में ईरान की अरबों डॉलर की तेल आय
अमेरिका और इज़रायल के हमलों के बाद सामान्य तौर पर यह उम्मीद की जाती है कि किसी देश की तेल आय पर असर पड़ेगा, लेकिन ईरान के मामले में इसके उलट स्थिति देखने को मिली। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध जैसी परिस्थितियों के बावजूद ईरान ने एक महीने से भी कम समय में करीब 3.9 अरब डॉलर की तेल आय हासिल कर ली, जो यह दिखाता है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में उसकी भूमिका अभी भी मजबूत बनी हुई है।
इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। तनाव और सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण कई देशों की आवाजाही प्रभावित हुई, लेकिन ईरान अपेक्षाकृत इस मार्ग का इस्तेमाल जारी रखने में सक्षम रहा। इससे वह कुछ समय के लिए मुख्य और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा, जिससे उसकी बिक्री और आय दोनों में इज़ाफा हुआ।
दूसरा बड़ा कारण रहा तेल की कीमतों में तेज़ उछाल। हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ी, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। जब वैश्विक कीमत बढ़ती है, तो निर्यात करने वाले देशों की आय अपने आप बढ़ जाती है—ईरान ने भी इसका सीधा लाभ उठाया।
इसके अलावा, ईरान अपने तेल को पहले अक्सर छूट (discount) देकर बेचता था, खासकर प्रतिबंधों के कारण। लेकिन हालिया परिस्थितियों में उसे अपने तेल पर कम छूट देनी पड़ी, यानी वह बाजार के दाम के ज्यादा करीब कीमत पर तेल बेच सका। इससे उसकी प्रति बैरल कमाई और बढ़ गई।
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में ईरान की दैनिक तेल आय लगभग 139 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई, जबकि फरवरी में यह करीब 115 मिलियन डॉलर प्रतिदिन थी। यानी कुछ ही समय में उसकी रोज़ाना कमाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
कुल मिलाकर, यह स्थिति दिखाती है कि:
भू-राजनीतिक तनाव कभी-कभी तेल उत्पादक देशों के लिए आर्थिक अवसर भी पैदा कर सकता है
वैश्विक सप्लाई में कमी या जोखिम से कीमतें बढ़ती हैं, जिसका सीधा फायदा निर्यातकों को मिलता है
और ईरान जैसे देश, जो पहले से प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं, ऐसे समय में अपने नुकसान की कुछ हद तक भरपाई कर लेते हैं
हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यह बढ़त लंबे समय तक स्थिर रहेगी या नहीं, यह पूरी तरह क्षेत्रीय हालात, प्रतिबंधों और वैश्विक बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।


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