ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने में सक्षम है: पूर्व फ्रांसीसी विदेश मंत्री

ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने में सक्षम है: पूर्व फ्रांसीसी विदेश मंत्री

ईरान के पास ट्रंप के प्रस्तावों को ठुकराने का पूरा अधिकार है—यह बात फ्रांस के पूर्व विदेश मंत्री के बयान से और स्पष्ट हो जाती है। उन्होंने साफ तौर पर संकेत दिया कि मौजूदा हालात में ईरान का रुख केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है।

पूर्व फ्रांसीसी विदेश मंत्री ने कहा कि होरमुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने की ईरान की क्षमता और उसका संकेत देना, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। यह केवल एक सैन्य या सामरिक कदम नहीं था, बल्कि यह दिखाता है कि ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने में सक्षम है। ऐसे समय में जब अमेरिका बातचीत की बात करता है, लेकिन उसी दौरान हमले भी जारी रहते हैं, तो ईरान का अविश्वास पूरी तरह जायज़ माना जा सकता है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ईरान की रणनीति अब पहले से ज्यादा परिपक्व और बहुस्तरीय हो चुकी है। शासन ने अपनी संरचना को इस तरह व्यवस्थित किया है कि किसी एक केंद्र पर दबाव डालने से पूरे सिस्टम को कमजोर नहीं किया जा सकता। इससे यह संकेत मिलता है कि बाहरी दबाव के बावजूद ईरान की आंतरिक स्थिरता बनी हुई है, बल्कि कुछ हद तक और मजबूत हुई है।

पूर्व मंत्री के अनुसार, मौजूदा संकट में दो ही रास्ते हैं—या तो वास्तविक और सम्मानजनक बातचीत, जिसमें सभी पक्षों के हितों का ध्यान रखा जाए, या फिर टकराव और बढ़ेगा, जिसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यमन के हूती बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद करने जैसे कदम उठाते हैं, तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। यह दर्शाता है कि ईरान और उसके सहयोगियों के पास अब भी कई रणनीतिक विकल्प मौजूद हैं।

उन्होंने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि होरमुज़ जैसे महत्वपूर्ण जलमार्ग को लेकर पर्याप्त तैयारी का अभाव दिखाता है कि वाशिंगटन ने स्थिति की गंभीरता को सही तरीके से नहीं समझा। यही कारण है कि अब ट्रंप के लिए यह कहना आसान नहीं रह गया है कि “युद्ध खत्म हो गया है।”

हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ट्रंप प्रशासन अब इज़रायल की तुलना में अधिक व्यावहारिक रुख अपनाने की कोशिश कर रहा है और किसी न किसी समाधान की तलाश में है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह समझ बन रही है कि ईरान को नजरअंदाज करके या केवल दबाव बनाकर कोई स्थायी समाधान संभव नहीं है।
कुल मिलाकर, यह बयान इस बात को मजबूत करता है कि मौजूदा हालात में ईरान का रुख केवल प्रतिरोध नहीं, बल्कि रणनीतिक संतुलन और आत्मरक्षा की नीति का हिस्सा है।

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