अगर प्रतिरोध न होता तो इज़रायल बेरूत तक पहुँच गया होता: नईम क़ासिम

अगर प्रतिरोध न होता तो इज़रायल बेरूत तक पहुँच गया होता: नईम क़ासिम

हिज़बुल्लाह के उप महासचिव शेख नईम क़ासिम ने कहा कि प्रतिरोध (मुक़ावमत) लेबनान की रक्षा और उसे कब्ज़ा करने वालों के चंगुल से आज़ाद कराने के लिए बना था और यह आज भी इज़रायल के सामने एक मज़बूत ढाल और किला है, जो उसे अपने मंसूबों में कामयाब होने से रोकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि “जो कोई निशस्त्रीकरण की बात करता है, वह हमारी जान लेना चाहता है और अगर ऐसा हुआ तो दुनिया हमारी ताक़त का प्रदर्शन देखेगी।”

यह बयान उन्होंने बैरुत के “रिसालात–ग़बीरी” हॉल में आयोजित उस कार्यक्रम में दिया जो मशहूर विद्वान सैयद अब्बास अली अल-मूसवी की याद में आयोजित हुआ। सैयद अब्बास मूसवी लेबनान की सर्वोच्च शिया इस्लामी परिषद और “तजम्मु अुलमा-ए-मुस्लिमीन” के सदस्य थे। वे लेबनान और पूरे क्षेत्र में एकता के समर्थक और प्रतिरोध के मज़बूत पैरोकार थे।

शेख नईम क़ासिम ने कहा:
इमाम मूसा सद्र ने लेबनान में बुनियादी बदलाव लाए, वे प्रतिरोध के सच्चे नेता और राष्ट्रीय एकता के हिमायती थे। आज हम इमाम मूसा सद्र से नवीनीकृत वादा करते हैं कि हम सब प्रतिरोध के झंडे तले खड़े हैं। उन्होंने इज़रायल को यमन पर बमबारी करने और हमेशा नागरिकों को निशाना बनाने वाला देश बताया और कहा:

“हम यमन के उस सम्मानजनक और शानदार रुख़ को सलाम करते हैं जो उन्होंने ग़ाज़ा के लोगों की मदद में अपनाया।”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि लेबनान को अपनी सरज़मीन पर पूर्ण संप्रभुता वापस लानी होगी क्योंकि हमारी तमाम मुश्किलों की जड़ दुश्मन का क़ब्ज़ा और उसका अमेरिकी सरपरस्त है। उन्होंने लेबनानी सरकार से अपील की कि वह संप्रभुता की बहाली के लिए स्पष्ट योजना बनाए, गहन बैठकों का आयोजन करे, सेना को मज़बूत करे और एक राष्ट्रीय रक्षा रणनीति तैयार करे। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों और बुद्धिजीवियों से भी इसमें सरकार की मदद करने की अपील की।

शेख क़ासिम ने प्रतिरोध की बुनियाद और उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा:
प्रतिरोध, जनता, ईमान, इरादे, राष्ट्रीयता, इज़्ज़त और स्थिरता का नाम है। यह अपमान और विदेशी दबावों के सामने झुकने से इनकार करता है और सेना का सहारा है, उसका विकल्प नहीं। प्रतिरोध ने दुश्मन को 17 साल तक रोके रखा और उसे रोका, यह असाधारण उपलब्धि है।

अगर प्रतिरोध न होता तो इज़रायल बेरूत तक पहुँच गया होता, जैसे वह दमिश्क तक पहुँच गया था। उन्होंने लेबनानी सरकार को चेतावनी दी कि प्रतिरोध के खिलाफ लिए गए फैसले अमेरिकी और इज़रायली डिक्टेट पर आधारित हैं और यह लेबनान के हित में नहीं है।

उन्होंने साफ़ कहा:
“अमेरिका की सारी गतिविधियाँ लेबनान को तोड़ने और फसाद फैलाने के लिए हैं। सारी आर्थिक तबाही अमेरिकी निगरानी में हो रही है। आप लोग (सरकार और उसके समर्थक) उन लोगों को निशस्त्र करना चाहते हैं जिन्होंने मुल्क को आज़ाद कराया? ट्रंप ग़ाज़ा और दक्षिण लेबनान के लोगों को बेदखल करना चाहता है और नेतन्याहू ‘ग्रेटर इज़रायल’ बनाने का सपना देख रहा है। लेकिन हम कभी उस हथियार को नहीं छोड़ेंगे जिसने हमें दुश्मन से बचाया है और कभी इज़रायल को लेबनान में मनमानी नहीं करने देंगे।”

अंत में उन्होंने दोहराया:
“जो लोग निशस्त्रीकरण की मांग करते हैं, वे दरअसल हमारी जान लेना चाहते हैं। और अगर ऐसा हुआ, तो दुनिया हमारी असली ताक़त का नज़ारा देखेगी।”

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