दुश्मन ईरानी क़ौम के ईमान, ज्ञान और एकता से चिढ़ता है: अली ख़ामेनेई

दुश्मन ईरानी क़ौम के ईमान, ज्ञान और एकता से चिढ़ता है: अली ख़ामेनेई

इस्लामी क्रांति ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई ने तेहरान में मंगलवार को आयोजित एक स्मृति समारोह में कहा कि, ईरान विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रगति जारी रखेगा, और पश्चिमी दबाव, देश को उस स्वतंत्र रास्ते से नहीं हटा सकता जिसे उसने 46 साल पहले अपनाया था। इस समारोह में हालिया 12-दिवसीय ईरान-इज़रायल  युद्ध में शहीद हुए वैज्ञानिकों, कमांडरों और नागरिकों के परिवारों के साथ-साथ कई अधिकारी भी मौजूद थे।

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने इस थोपे गए युद्ध को इस्लामी गणराज्य की इच्छाशक्ति और ताक़त का प्रतीक बताया और इसे उसके मज़बूत बुनियादी ढांचे का एक असाधारण प्रमाण करार दिया। उन्होंने कहा कि दुश्मनों की दुश्मनी की असली वजह ईरानी क़ौम का मज़बूत ईमान, ज्ञान और एकता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा:

“ईरानी राष्ट्र, ख़ुदा के करम से, न तो अपने धार्मिक विश्वास को कमज़ोर करेगा और न ही ज्ञान के क्षेत्रों का विस्तार करने से पीछे हटेगा; और दुश्मनों की नाराज़गी के बावजूद, ईरान को प्रगति और सम्मान की बुलंदी तक पहुंचाएगा।”

उन्होंने शहीदों के परिवारों के प्रति एक बार फिर संवेदना प्रकट की और कहा:
“इन 12 दिनों में इस्लामी गणराज्य ने जो कुछ हासिल किया — जिनका पूरी दुनिया में आज लोग सम्मान कर रहे हैं — वह यह था कि ईरानी जनता ने अपनी ताक़त, संकल्प, दृढ़ता और क्षमता को दुनिया के सामने उजागर कर दिया। अब उन्होंने इस्लामी गणराज्य की ताक़त को क़रीब से देखा है।”

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने यह भी कहा कि इस्लामी गणराज्य की ताक़त का स्पष्ट प्रदर्शन इस युद्ध का एक महत्वपूर्ण परिणाम रहा। उन्होंने बताया कि इस्लामी क्रांति के पिछले 45 वर्षों में ऐसे कई षड्यंत्र, युद्ध, फसाद, और तख्तापलट की कोशिशें हो चुकी हैं, मगर देश हर बार उनसे उबर गया है। उन्होंने कहा कि इस्लामी गणराज्य दो बुनियादी स्तंभों पर खड़ा है: “ईमान और ज्ञान।”

उन्होंने कहा:
“लोगों की धार्मिकता और हमारे युवाओं का ज्ञान दुश्मनों को कई क्षेत्रों में पीछे हटने पर मजबूर कर चुका है, और भविष्य में भी यही जारी रहेगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अमेरिका के नेतृत्व वाला वैश्विक अहंकार, ईरानी क़ौम के ईमान, ज्ञान और क़ुरआन और इस्लाम के झंडे तले एकता से चिढ़ता है।

उन्होंने कहा:
“उनकी सारी बातें — परमाणु मुद्दे, यूरेनियम संवर्धन, मानवाधिकार आदि — महज़ बहाने हैं। उन्हें जो चीज़ परेशान करती है, वह यह है कि इस्लामी गणराज्य विज्ञान, मानविकी, तकनीकी और धार्मिक ज्ञान के क्षेत्रों में नई सोच और विचार उत्पन्न करने की क्षमता रखता है।”

अंत में उन्होंने दोहराया:
“हम अपने धार्मिक विश्वास को और मज़बूत करेंगे और अपने ज्ञान के विविध क्षेत्रों को और अधिक गहराई और विस्तार देंगे।”

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