अमीरात का आरोप: ट्रंप ने हमें युद्ध में झोंक दिया: वॉल स्ट्रीट जर्नल
वॉल स्ट्रीट जर्नल: यूएई अधिकारियों ने हाल ही में अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत में साफ तौर पर कहा है कि, ट्रंप के ईरान पर हमले के फैसले ने उन्हें इस विनाशकारी युद्ध में घसीट लिया है। अब वॉशिंगटन को एक “मुद्रा स्वैप लाइन” (Currency Swap Line) स्थापित करके उनकी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
फ़ार्सं न्यूज़ ने वाल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से लिखा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के वरिष्ठ अधिकारियों ने अमेरिका के साथ बंद कमरे में हुई बातचीत में अपनी गहरी नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई का निर्णय केवल एक क्षेत्रीय कदम नहीं था, बल्कि उसने खाड़ी के देशों, खासकर अमीरात, को सीधे तौर पर एक बड़े और विनाशकारी संघर्ष के खतरे में डाल दिया।
अमीराती अधिकारियों का मानना है कि इस युद्ध का असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव उनकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है, तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है और पूंजी का बहिर्गमन (capital outflow) तेज हो सकता है। यही वजह है कि अमीरात ने अमेरिका से मांग की है कि वह एक “मुद्रा स्वैप लाइन” (Currency Swap Line) की व्यवस्था करे, ताकि जरूरत पड़ने पर डॉलर की तरलता (liquidity) उपलब्ध कराई जा सके और वित्तीय संकट से बचाव हो सके।
“मुद्रा स्वैप लाइन” एक ऐसा वित्तीय तंत्र होता है, जिसके तहत अमेरिकी फेडरल रिजर्व अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों को अस्थायी रूप से डॉलर उपलब्ध कराता है। इसका उद्देश्य संकट के समय बाजारों में स्थिरता बनाए रखना होता है। अमीरात चाहता है कि उसे भी इस सुविधा का लाभ मिले, जिससे वह अपने बैंकिंग और वित्तीय सिस्टम को झटकों से बचा सके।
हालांकि, विशेषज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि फेडरल रिजर्व इस मांग को आसानी से स्वीकार नहीं करेगा। आमतौर पर यह सुविधा केवल उन देशों को दी जाती है, जिनके साथ अमेरिका के गहरे वित्तीय संबंध होते हैं या जहां वित्तीय संकट का सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए अमीरात को यह सुविधा मिलना निश्चित नहीं माना जा रहा।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम दिखाता है कि ईरान से जुड़े तनाव का असर केवल सैन्य या राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खाड़ी क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता को भी गहराई से प्रभावित कर रहा है, और अमेरिका से उसके सहयोगियों की अपेक्षाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं।


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