बहरीन में शिया समुदाय के खिलाफ कार्रवाई तेज़, 41 आलिम अब भी लापता

बहरीन में शिया समुदाय के खिलाफ कार्रवाई तेज़, 41 आलिम अब भी लापता

बहरीन में शिया समुदाय और सरकार के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। विपक्षी शिया संगठन अल-विफाक इस्लामिक सोसाइटी ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों ने पिछले दिनों 41 शिया आलिमों को उनके घरों पर छापेमारी करके गिरफ्तार किया, लेकिन 72 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उनके बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

संगठन का कहना है कि गिरफ्तार किए गए धार्मिक विद्वानों के परिवारों को भी उनसे मिलने या उनकी स्थिति जानने की अनुमति नहीं दी जा रही।

अल-विफाक ने इस कार्रवाई को धार्मिक और राजनीतिक दमन की नई लहर बताया है। संगठन के अनुसार बहरीन सरकार लगातार उन आवाज़ों को दबाने की कोशिश कर रही है जो ईरान के समर्थन या क्षेत्रीय घटनाओं पर सरकार की नीतियों के विरोध में बोलती हैं।

इसी क्रम में बहरीन की अदालत ने “बदूर अब्दुल हमीद” नामक एक ब्लॉगर को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है। उस पर आरोप लगाया गया कि उसने सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट साझा किए थे जिनमें ईरान के समर्थन और बहरीन सरकार की आलोचना की गई थी। सरकारी पक्ष ने इसे “जासूसी” और “राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ गतिविधि” बताया, जबकि मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है।

इसके अलावा अदालत ने 10 अन्य नागरिकों को भी 10-10 साल की जेल की सज़ा सुनाई है। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर ईरान के प्रति सहानुभूति जताई और इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई की शहादत पर शोक संदेश प्रकाशित किए थे। विपक्षी समूहों का कहना है कि केवल सोशल मीडिया पोस्ट और धार्मिक भावनाओं के आधार पर इतनी कठोर सज़ाएँ देना राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।

बता दें कि, मिडिल ईस्ट में बहरीन में अमेरिका का सबसे बड़ा एयर बेस है। ईरान का आरोप है कि मीनाब के स्कूल पर हमला, जिसमें 170 छात्राएं शहीद हुई थीं बहरीन स्थिति अमेरिकी एयरबेस से किए गए थे, जिंसके कारण ईरान ने अमेरिकी एयरबेस पर हमले किए थे।

बहरीन में शिया समुदाय लंबे समय से राजनीतिक भेदभाव और दमन की शिकायत करता रहा है। वर्ष 2011 के जनआंदोलन के बाद से अनेक धार्मिक नेताओं, कार्यकर्ताओं और विपक्षी सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है तथा कई संगठनों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। वर्तमान घटनाक्रम को उसी नीति की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।

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