ग़ज़्ज़ा पट्टी पर कब्जा करना इज़रायल की बड़ी गलती होगी: बाइडन
इज़रायल ग़ज़्ज़ा पट्टी पर लगातार हमले कर रहा है। इस हमले से पहले वहां की बिजली, पानी और ईंधन की सप्लाई भी बंद है। बेगुनाह औरतों, मर्दों और बच्चों की लाशें मलबों के ढेर के नीचे दबी हुई हैं। जो ज़िंदा हैं और हमले में मरने से बच गए हैं तो वह भूख के कारण मर रहे हैं। उन्हें यह भी पता नहीं कि कितनी देर ज़िंदा रहेंगे।वह कब इस हमले का शिकार हो जाएं कुछ पता नहीं। जो घायल हैं वह अस्पताल में बिना उपचार के मौत का इंतेज़ार कर रहे हैं।
पूरी दुनियां इज़रायल के इस अत्याचार पर ख़ामोश है। पूरी दुनिया इज़रायल के अत्याचार के बाद भी उसका समर्थन कर रहा है। इजरायल को पूरा समर्थन देने बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने बड़ा बयान दिया है। बाइडन नेे कहा है किग़ज़्ज़ा पट्टी पर कब्जा करना इज़रायल की एक बड़ी गलती होगी।
जब बाइडन से पूछा गया कि वे गाजा पर इज़रायल के कब्जा करने से सहमत हैं तो उन्होंने कहा,
“मुझे लगता है कि ये एक बड़ी गलती होगी। मेरे विचार में ग़ज़्ज़ा में जो हुआ, वो हमास के कारण हुआ। हमास के लड़ाके सभी फिलीस्तीनियों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। मुझे लगता है इजरायल के लिए ग़ज़्ज़ा पर दोबारा कब्जा करना एक बड़ी गलती होगी।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र (UN) और अमेरिका में इजरायल के राजदूतों गिलाड एर्डान और माइकल हर्ज़ोग ने कहा है कि उनके देश को ग़ज़्ज़ा पर कब्जा करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। हर्ज़ोग ने कहा कि हमारी ग़ज़्ज़ा पर कब्जा या दोबारा कब्जा करने की कोई इच्छा नहीं है। न हम 20 लाख से ज्यादा फिलीस्तीनियों के जीवन पर शासन करना चाहते हैं।
दरअसल, ग़ज़्ज़ा पट्टी इज़रायल के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है. इसकी चौड़ाई 6-10 किलोमीटर है, जबकि लंबाई 45 किलोमीटर है। इसके तीन ओर इज़रायल का कंट्रोल है। दक्षिण में मिस्र है, जबकि पश्चिम की दिशा में भूमध्यसागर में इसकी जलीय सीमा इज़रायल सरकार कंट्रोल करती है। ग़ज़्ज़ा पट्टी में रहने वाले फ़िलिस्तीनी कहलाते हैं।
ग़ज़्ज़ा पट्टी के इतिहास की बात करें तो इसकी शुरुआत 1948 में इजरायल के बनने के साथ ही हुई। 1948 में जब इज़रायल बन गया तो यहां बसे अरबों के लिए अर्मिस्टाइस रेखा बनाई गई, मिलकर यह तय किया गया कि ग़ाज़ा पट्टी में अरब, मुस्लिम रहेंगे, जबकि यहूदियों को इज़रायल मे रहना होगा। 1948 से लेकर 1967 तक इस पर मिस्र ने अधिकार जमाए रखा, लेकिन जून 1967 में हुए युद्ध के बाद इज़रायल ने ग़ज़्ज़ा पट्टी पर अपना कब्जा जमा लिया।
बता दें कि 7 अक्टूबर को हमले के बाद इज़रायल के पीएम ने ग़ज़्ज़ा पट्टी पर कब्जा करने और यहां से हमास को खत्म करने के नाम पर ग़ज़्ज़ा को बर्बाद करना शुरू कर दिया है। उनके सैनिकों ने यहां हमले तेज कर दिए हैं। 9 दिन के संघर्ष के बाद अब इज़रायल की सेना ग़ज़्ज़ा पट्टी को चारों तरफ से घेर चुकी है। हालांकि इस हमले में हजारों बेगुनाह भी मारे गए हैंऔर अभी भी मारे जा रहे हैं।


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