बहरीन ने युद्ध के दौरान ईरान के प्रति “हमदर्दी” जताने के आरोप पर 69 लोगों की नागरिकता रद्द कर दी
बहरीन ने सोमवार को घोषणा की कि उसने 69 लोगों की नागरिकता रद्द कर दी है, जिनमें उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई हालिया युद्ध के दौरान ईरान के प्रति सहानुभूति और प्रशंसा व्यक्त करने के कारण की गई।
बहरीन समाचार एजेंसी के मुताबिक, “इन लोगों की नागरिकता इसलिए समाप्त की गई क्योंकि उन्होंने ईरान के तथाकथित विरोधी और आपराधिक कदमों के प्रति सहानुभूति और प्रशंसा का प्रदर्शन किया था।” एजेंसी ने आगे बताया कि उनके परिवारों को मिलाकर प्रभावित लोगों की कुल संख्या अब 69 हो गई है।
गौरतलब है कि मार्च में बहरीन की उच्च आपराधिक अदालत में उन लोगों के खिलाफ पहली सुनवाई हुई थी, जिन पर ईरान के हमलों को बढ़ावा देने और उनकी प्रशंसा करने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, एजेंसी ने आरोपित लोगों की सटीक संख्या स्पष्ट नहीं की।विश्लेषकों के अनुसार इस बहरीन सरकार इस तरह की कठोर कार्रवाईयों से बहरीन में अमेरिकी एयरबेस के ख़िलाफ़ होने वाले विरोध प्रदर्शन को कुचलना चाहती है।
उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल की ओर से ईरान पर संयुक्त हमला शुरू किया गया था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई सहित कई वरिष्ठ नेताओं के शहीद होने की खबर सामने आई थी। इसके जवाब में ईरान ने इज़रायल और क्षेत्र के उन अन्य देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जहां अमेरिकी सैन्य संपत्तियां मौजूद थीं।
इनमें वे सभी खाड़ी देश शामिल थे जिन्होंने अमेरिकी हमले में किसी न किसी रूप में सहयोग किया था, जैसे क़तर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कुवैत आदि। इसके अतिरिक्त, उस समय ईरानी हमलों का मुख्य निशाना अमेरिकी सैन्य अड्डे थे, जिनके नष्ट होने पर लोगों ने खुशी का इज़हार किया। यह प्रतिक्रिया उनके देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी के प्रति जनता की नाराज़गी और विरोध को दर्शाती है। बहरीन सरकार का हालिया कदम भी इसी तरह के सार्वजनिक खुशी के प्रदर्शन को आधार बनाकर उठाया गया है।
यह भी याद रहे कि अमेरिकी और इज़रायली सैन्य कार्रवाइयों में 3300 से अधिक ईरानी मारे गए थे। इसके बाद वॉशिंगटन और तेहरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में 8 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की थी। हालांकि यह युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होना था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 21 अप्रैल को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के अनुरोध पर इसे अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने की घोषणा की।

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