बाब-अल-मंदब प्रतिरोधी मोर्चे (रेज़िस्टेंस) के हाथों में मोम की तरह है: सरदार क़ानी

बाब-अल-मंदब प्रतिरोधी मोर्चे (रेज़िस्टेंस) के हाथों में मोम की तरह है: सरदार क़ानी

ईरान की कुद्स फ़ोर्स के कमांडर इस्माइल क़ानी ने क्षेत्रीय घटनाक्रम, प्रतिरोधी संगठनों की क्षमता और हालिया राजनीतिक-सैन्य परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य प्रतिरोधी शक्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बिंदु है। उनके अनुसार यह केवल एक ऐसा क्षेत्र नहीं है जिस पर प्रतिरोधी मोर्चे का प्रभाव है, बल्कि मध्य पूर्व में कई अन्य संवेदनशील स्थान भी हैं जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर सक्रिय किया जा सकता है।

सरदार क़ानी ने कहा कि प्रतिरोधी मोर्चा केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके राजनीतिक और कूटनीतिक प्रतिनिधि भी उसी विचारधारा और दृढ़ता के साथ कार्य करते हैं। उन्होंने कहा, “जो व्यक्ति मिसाइल लॉन्चर के पीछे खड़ा है और जो वार्ता की मेज़ पर बैठा है, दोनों प्रतिरोध की एक ही भावना से प्रेरित हैं।” उनका आशय यह था कि सैन्य और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर ईरान और उसके सहयोगी एक साझा रणनीति के तहत काम करते हैं।

ईरान की ओर से एक शब्द का भी अनुरोध किए बिना, प्रतिरोध मोर्चे (रेज़िस्टेंस फ़ोर्सेज़) ने हालिया युद्ध में ईरान का साथ दिया। लेबनान, यमन और इराक़ में हमारे सभी भाइयों ने कहा कि अमेरिका के साथ संघर्ष में पहल हमें ही करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रतिरोध धुरी के ये समूह स्वयं इस निष्कर्ष पर पहुँचे थे कि उन्हें ईरान की रक्षा के लिए आगे बढ़ना चाहिए और इस बारे में उनसे किसी ने कोई अनुरोध नहीं किया था।

उन्होंने आगे दावा किया कि पिछली रात ईरान ज़ायोनी शासन (इज़रायल) के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार था, लेकिन साथ ही उसने शक्ति और दृढ़ता के साथ अपने राजनीतिक उद्देश्यों को भी आगे बढ़ाया। क़ानी के अनुसार, ईरान ने वार्ताओं में ऐसी बात मनवा ली जिसे दूसरा पक्ष स्वीकार करने को तैयार नहीं था।

लेबनान की स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे ही इज़रायल ने लेबनान के विरुद्ध आक्रामक कदम उठाया, ईरानी वार्ताकार दल ने भी कड़ा रुख़ अपनाया। उनके अनुसार, वार्ता के दौरान ईरानी प्रतिनिधियों ने न केवल प्रत्यक्ष विरोधियों बल्कि मध्यस्थों के सामने भी स्पष्ट और दृढ़ रुख़ रखा तथा यह संदेश दिया कि क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिरोधी समूहों के हितों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

क़ानी के इन बयानों को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब क्षेत्र में युद्ध-विराम, ईरान-अमेरिका वार्ताओं और लेबनान तथा फ़िलिस्तीन से जुड़े घटनाक्रमों पर व्यापक चर्चा चल रही है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि ईरान और उसके सहयोगी स्वयं को सैन्य, राजनीतिक और कूटनीतिक—तीनों स्तरों पर प्रभावी स्थिति में मानते हैं और आवश्यकता पड़ने पर क्षेत्रीय रणनीतिक बिंदुओं का उपयोग दबाव बनाने के लिए कर सकते हैं।

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