असद की ‘छाया सेना’ जूलानी के ख़िलाफ़ विद्रोह की तैयारी में: न्यूयॉर्क टाइम्स
एक अमेरिकी समाचार पत्र ने दावा किया है कि, बशर अल-असद की एक छाया सेना, जिसमें 1 लाख 68 हज़ार लड़ाके शामिल हैं, जूलानी की विद्रोही सरकार के ख़िलाफ़ विद्रोह की तैयारी कर रही है। यह योजना मॉस्को और बेरूत से संचालित की जा रही है। फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के अंतरराष्ट्रीय समूह के अनुसार, अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक खोजी रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें यह दावा किया गया है कि, रूस और लेबनान में मौजूद नेटवर्कों के समर्थन से, सीरिया के पूर्व जनरलों द्वारा एक सशस्त्र विद्रोह को संगठित करने की योजना बनाई जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना हैक किए गए फ़ोन कॉल, संदेशों, साक्षात्कारों और विभिन्न विश्लेषणों पर आधारित है। इसमें कहा गया है कि असद शासन के पतन के बाद, उसके कई सैन्य और सुरक्षा कमांडर निर्वासन से अपने प्रभाव को फिर से स्थापित करने में लगे हैं। उनका उद्देश्य अबू मोहम्मद जूलानी के नेतृत्व वाली विद्रोही सरकार को अस्थिर करना और यहां तक कि स्वतंत्र प्रभाव क्षेत्र बनाना है।
मुख्य चेहरे
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, बशर अल-असद के शासनकाल में विशिष्ट बलों के कमांडर सुहैल अल-हसन (जिन्हें “अल-निम्र” कहा जाता है) और पूर्व सैन्य खुफिया प्रमुख कमाल अल-हसन इस नेटवर्क के केंद्र में हैं। दावे के मुताबिक, रूस समर्थित और अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात सुहैल अल-हसन ने 2025 की वसंत ऋतु से मॉस्को में निर्वासन के दौरान एक गुप्त सैन्य ढांचा खड़ा करना शुरू किया। उसने सीरिया के तटीय क्षेत्रों में अलवी समुदाय से जुड़े 1 लाख 68 हज़ार से अधिक लड़ाकों को संगठित किया है, जिनमें 20 हज़ार भारी हथियारों से लैस हैं, सैकड़ों के पास वायु-रोधी और टैंक-रोधी हथियार हैं और दर्जनों प्रशिक्षित स्नाइपर शामिल हैं।
वित्तीय और राजनीतिक भूमिका
बशर अल-असद के चचेरे भाई और प्रभावशाली व्यापारी रामी मखलूफ़ इस योजना का वित्तपोषण मॉस्को से कर रहे हैं। वह लड़ाकों को प्रतिमाह 200 से 1000 डॉलर तक भुगतान करते हैं और खुद को “अलवी समुदाय का उद्धारकर्ता” बताते हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, रामी मखलूफ़ की पूंजी और सुहैल अल-हसन के क्रूर सैन्य अनुभव का यह गठजोड़ उस संरचना की मूल इकाई है जिसे “छाया सेना” कहा जा सकता है। यह सेना दमिश्क़ में शासक विद्रोही सरकार की कमजोरी के क्षण की प्रतीक्षा कर रही है। अख़बार ने लिखा कि हैरानी की बात यह है कि सुहैल अल-हसन अब अपने पत्राचार में खुद को “आपका सेवक, मुजाहिद के पद के साथ” लिखते हैं और सामने वाले व्यक्ति को “हमारी सेना और सशस्त्र बलों का सर्वोच्च कमांडर” कहकर संबोधित करते हैं। मजबूत सबूत बताते हैं कि यह व्यक्ति रामी मखलूफ़ है।
रिपोर्ट में हथियारों की खरीद, संभावित लड़ाकों को वेतन देने और क्षेत्रीय अर्धसैनिक समूहों के साथ हथियार तस्करी के समन्वय के प्रयासों का भी उल्लेख है। हालांकि, बाद में आंतरिक मतभेदों और व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण यह नेटवर्क कमजोर पड़ गया।
प्रभाव के अन्य रास्ते
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, पूर्व सैन्य खुफिया प्रमुख कमाल अल-हसन प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई की तुलना में विदेशी राजनीतिक प्रभाव बनाने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वह “वेस्टर्न सीरिया डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट” नामक संस्था के पीछे हैं, जो बेरूत से मानवीय गतिविधियों की आड़ में काम करती है, लेकिन वास्तव में उसने अलवी क्षेत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के उद्देश्य से अमेरिकी लॉबिंग कंपनियों के साथ 10 लाख डॉलर के अनुबंध किए हैं।
अमेरिकी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में इस संस्था ने अमेरिकी लॉबिंग कंपनी टाइगर हिल पार्टनर्स तथा डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सलाहकार और ब्लैकवॉटर के पूर्व कार्यकारी निदेशक जोसेफ श्मिट्ज़ के साथ अनुबंध किया। राजनयिकों के अनुसार, यह राजनीतिक मार्ग स्वयं विद्रोह योजनाओं से भी अधिक चिंताजनक है, क्योंकि वाशिंगटन में संगठित दबाव धीरे-धीरे सीरिया के भीतर एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र की मांग को जन्म दे सकता है।
अख़बार ने यह भी दावा किया कि जनरलों की महत्वाकांक्षाएं केवल सैद्धांतिक नहीं हैं। चौथी डिवीजन के पूर्व कमांडर ग़यास दल्ला (54 वर्ष) लेबनान से लॉजिस्टिक अभियानों का संचालन कर रहे हैं। दावे के अनुसार, वह ईरान से जुड़े इराकी अर्धसैनिक समूहों के सहयोग से ड्रोन और टैंक-रोधी मिसाइलों सहित हथियारों की तस्करी का प्रबंधन कर रहे हैं।
एक लीक हुए संदेश में, उन्होंने संभावित लड़ाकों को 3 लाख डॉलर के भुगतान की जानकारी दी और 1 लाख 36 हज़ार डॉलर मूल्य के उपग्रह संचार उपकरण खरीदने का अनुरोध किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान ने लेबनान में कुछ पूर्व सीरियाई पायलटों, जिनमें मोहम्मद अल-हसूरी शामिल हैं, को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराए हैं।
सीमाएँ और दरारें
रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि अलवी समुदाय पूरी तरह से इस योजना के समर्थन में नहीं है और कई लोग लंबे व विनाशकारी युद्ध से थक चुके हैं। साथ ही, विद्रोही नेटवर्क आंतरिक मतभेदों, संसाधनों की कमी और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय दबावों का सामना कर रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट के अंत में पूर्व सीरियाई राजनयिक बस्साम बरबंदी के हवाले से चेतावनी दी कि यदि नई सीरियाई सरकार अगले दो या तीन वर्षों में विफल रहती है, तो अमेरिकी नेता बातचीत के लिए वैकल्पिक विकल्पों की तलाश कर सकते हैं।


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