5 कारणों से यमन, इस्राईल के लिए रणनीतिक चुनौती बना
इस्राईल के शोध और सुरक्षा केंद्रों की रिपोर्टों से पता चलता है कि अंसारुल्लाह (हूती) का रणनीतिक इलाकों पर नियंत्रण इस्राईल की उस रणनीति और गणना को पूरी तरह बदल रहा है, जिसके आधार पर वह तथाकथित ‘प्रतिरोध की धुरी’ से निपटता रहा है। यमनियों की लगातार मिल रही सफलताओं को तेल अवीव के लिए एक रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
यमन में हाल के घटनाक्रमों को इस्राईली राजनीतिक और सुरक्षा अधिकारियों के साथ-साथ प्रमुख शोध संस्थानों के विश्लेषकों और विशेषज्ञों ने इस्राईल के लिए एक चिंताजनक और ‘बुरी खबर’ के रूप में देखा है। उनके अनुसार, इन घटनाओं से क्षेत्र के सुरक्षा और रणनीतिक समीकरण इस्राईल के प्रतिकूल दिशा में बदल रहे हैं।
इस्राईली वेबसाइट अरब-48 ने इस संबंध में एक लेख प्रकाशित किया, जिसमें तेल अवीव के नजरिए से इसके कारणों की चर्चा की गई। रिपोर्ट के अनुसार, इस्राईल में मौजूदा आकलन मुख्य रूप से पाँच प्रमुख बिंदुओं पर आधारित हैं।
पहला: बाब-अल-मंदब पर नियंत्रण
पहला कारण यह है कि बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य के महत्वपूर्ण इलाकों पर अंसारुल्लाह का नियंत्रण यह दिखाता है कि ईरान के नेतृत्व वाला तथाकथित ‘धड़ा’ अभी भी मज़बूत है। इसके अलावा, उसके पास वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव डालने वाले दो महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों—हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदब—से जुड़े प्रभाव के साधन मौजूद हैं।
दूसरा: स्थानीय संगठन से क्षेत्रीय शक्ति तक
दूसरा कारण यह है कि यमन के सशस्त्र बलों की लाल सागर में बढ़ती सैन्य क्षमता ने अंसारुल्लाह के स्थानीय प्रतिरोध संगठन से एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शक्ति बनने की प्रक्रिया को स्पष्ट कर दिया है।
अरब-48 के अनुसार, कई वर्षों तक ‘हूतियों’ को मुख्य रूप से एक स्थानीय संगठन के रूप में देखा जाता था, जिसे ईरान का समर्थन प्राप्त है, जो यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है और सऊदी अरब तथा खाड़ी देशों के लिए ख़तरा है। लेकिन आज स्थिति बदल गई है। ‘हूतियों’ ने अपनी सैन्य क्षमताएँ, युद्ध का अनुभव और क्षेत्रीय संबंध विकसित किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अब ऐसी शक्ति बन चुके हैं जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के रास्तों को प्रभावित कर सकती है।
क्षेत्रीय स्तर का महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनने के लिए उन्हें पूरे यमन पर नियंत्रण करने की आवश्यकता नहीं है। बाब-अल-मंदब के आसपास के रणनीतिक इलाकों पर नियंत्रण और समुद्री यातायात को खतरे में डालने की क्षमता उनके लिए पर्याप्त है।
तीसरा: तेल और वैश्विक व्यापार पर असर
तीसरा कारण तेल बाजार और समुद्री व्यापार से जुड़ा है। पिछले कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। इसके पीछे तीन ऐसे ख़तरे बताए गए, जो एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
पहला, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाला समुद्री यातायात अभी भी सीमित है।
दूसरा, सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन, जो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बायपास करने का विकल्प देती है, ड्रोन हमले के बाद अभी भी बंद है।
तीसरा, लाल सागर में अंसारुल्लाह ने बाब-अल-मंदब क्षेत्र और मयून द्वीप में अपनी मौजूदगी मज़बूत की है।
चौथा: ईरान बिना सीधे युद्ध में उतरे लाभ उठा सकता है
चौथा कारण यह है कि ईरान इस नई स्थिति का लाभ सीधे युद्ध में शामिल हुए बिना उठा सकता है। ईरान को लड़ाई में प्रभाव डालने के लिए अपनी विशेष सैन्य इकाइयों को यमन भेजना ज़रूरी नहीं है। वह अंसारुल्लाह को सैन्य ज्ञान, हथियार, ख़ुफ़िया जानकारी और राजनीतिक समर्थन उपलब्ध करा सकता है।
इस तरह अंसारुल्लाह जमीन और समुद्र—दोनों जगह दबाव बना सकता है, जबकि ईरान को युद्ध की पूरी क़ीमत खुद नहीं चुकानी पड़ती। इससे ईरान अपने विरोधियों के सामने एक अतिरिक्त मोर्चा खोल सकता है।
पाँचवाँ: अमेरिका की भूमिका पर इस्राएल की चिंता
पाँचवाँ मुद्दा केवल बाब-अल-मंदब पर अंसारुल्लाह के नियंत्रण, वैश्विक समुद्री व्यापार पर उसके नकारात्मक प्रभाव और ईरान की क्षेत्रीय स्थिति मजबूत होने तक सीमित नहीं है। मामला इस समय अमेरिका की भूमिका से भी जुड़ा हुआ है।
एक वरिष्ठ इस्राईली सैन्य विश्लेषक ने अमेरिका की मौजूदा स्थिति का वर्णन करते हुए कहा कि अमेरिका संघर्ष में प्रवेश करने से हिचक रहा है और वास्तव में अपने सहयोगियों को अकेला छोड़ रहा है। इस विश्लेषक ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “हूती हमारे साथ लड़ना नहीं चाहते।”
उसके अनुसार, यह अमेरिका की उस भूमिका से पीछे हटने का चिंताजनक संकेत है, जिसमें वह लंबे समय से खुद को ‘दुनिया की पुलिस’ के रूप में पेश करता रहा है।
हालाँकि, विश्लेषक के अनुसार ट्रंप की इस स्थिति को एक हद तक समझा जा सकता है, क्योंकि रिपोर्टों में अमेरिकी सेना के सामने उपकरणों से जुड़ी समस्याओं और हथियारों की कमी का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिका के लिए एक और सैन्य मोर्चा खोलना भी मुश्किल हो सकता है।
अमेरिका के रुख से सऊदी अरब को लेकर चिंता
इस विश्लेषक के अनुसार, ट्रंप ने पिछले वर्ष अंसारुल्लाह के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा की थी, लेकिन कुछ ही सप्ताह बाद उससे पीछे हट गए और इस्राईल को इस संघर्ष में अकेला छोड़ दिया। अब, उनके अनुसार, अमेरिका सऊदी अरब को भी ऐसी स्थिति में छोड़ रहा है, जहाँ वह दो तरफ से दबाव में है—एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ अंसारुल्लाह। विश्लेषक का दावा है कि विशेष रूप से रक्षा के क्षेत्र में सऊदी अरब की सैन्य क्षमताएँ सीमित हैं।
अरब-48 के अनुसार, इस्राईल में अब यह चिंता भी बढ़ रही है कि कहीं सऊदी अरब ईरान के साथ संबंध सुधारने का रास्ता न अपनाए या कम से कम तुर्की, पाकिस्तान और क़तर जैसे अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ अपने संबंधों और गठबंधनों को मज़बूत न करने लगे।
इस्राईल यमन में सीधे हस्तक्षेप से बचना चाहता है
इन सबके बावजूद, इस्राईली सुरक्षा हलकों में यह जोर दिया जा रहा है कि यमन में मौजूदा घटनाक्रम में इस समय इस्राईल को सीधे हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। कुछ इस्राईली विश्लेषकों ने यह भी स्वीकार किया है कि इस्राईल ने पिछले वर्ष अंसारुल्लाह से जुड़े कई राजनीतिक और सैन्य कमांडरों को निशाना बनाकर मार दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसने यमन के भीतर शक्ति संतुलन और अंसारुल्लाह की वास्तविक ताक़त का सही आकलन नहीं किया।
इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में इस्राईल को इस संभावना के लिए तैयार रहना चाहिए कि, अंसारुल्लाह के साथ संघर्ष फिर शुरू हो सकता है—चाहे इसकी पहल इस्राईल की ओर से हो या परिस्थितियाँ उसे दोबारा इस युद्ध में खींच लें।
इस्राईली ख़ुफ़िया तंत्र भी पहले हमले के खिलाफ
इसी बीच, इस्राईली वेबसाइट वाला ने आज एक वरिष्ठ इस्राईली ख़ुफ़िया अधिकारी के हवाले से बताया कि, इस्राईल की सुरक्षा व्यवस्था यमन में अंसारुल्लाह के खिलाफ पहले से हमला शुरू करने के पक्ष में नहीं है। इस इस्राईली मीडिया रिपोर्ट में भी कहा गया है कि, इस्राईल को यमन-सऊदी मोर्चे के कमजोर पड़ने और हूतियों द्वारा दिखाई जा रही सैन्य क्षमताओं को लेकर गहरी चिंता है।
हालाँकि, स्थिति बिगड़ने पर इस्राईल अपना रुख़ बदल सकता है। लेकिन फिलहाल इस्राईली सेना की सलाह यह है कि, हूतियों के ख़िलाफ़ एक क्षेत्रीय गठबंधन बनाने पर ध्यान दिया जाए, न कि तुरंत यमन में सैन्य कार्रवाई शुरू की जाए।


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