बाबुल मंदब बंद हुआ तो सऊदी अरब और दुनिया के तेल बाजार पर पड़ेगा बुरा असर

मीडिया और समुद्री परिवहन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो सऊदी अरब और वैश्विक ऊर्जा बाजार को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

रिपोर्टों के अनुसार, यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब हुर्मुज जलडमरूमध्य में भी जहाजों की आवाजाही को लेकर समस्याएं बढ़ रही हैं। बाब अल-मंदब में तनाव की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई।

ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 1.12 डॉलर बढ़कर लगभग 89.22 डॉलर प्रति बैरल हो गई।

अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 74 सेंट बढ़कर 83.23 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर बाबुल-मंदब पूरी तरह बंद हो जाता है, तो दुनिया में तेल की सप्लाई लगभग 7 प्रतिशत तक कम हो सकती है। इसका सबसे बड़ा असर सऊदी अरब पर पड़ेगा, क्योंकि उसके तेल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है।

समुद्री डेटा कंपनी कपलर के अनुसार, बाबुल-मंदब में खतरा बढ़ने से अब जोखिम होर्मुज जलडमरूमध्य से हटकर लाल सागर क्षेत्र में आ गया है। यह रास्ता सऊदी अरब के कच्चे तेल, रिफाइनरी उत्पादों और यूरोप-एशिया के बीच व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

सऊदी अरब की यनबू बंदरगाह से तेल निर्यात हाल के समय में बढ़कर लगभग 42 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था। होर्मुज में परेशानी के बाद सऊदी अरब ने ज्यादा तेल लाल सागर के रास्ते भेजना शुरू किया था।

लेकिन अगर बाबुल-मंदब बंद होता है, तो सऊदी तेल टैंकरों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ेगा। उन्हें अफ्रीका के चारों ओर घूमकर और स्वेज नहर के रास्ते जाना पड़ सकता है।

यनबू से दक्षिण कोरिया तक तेल पहुंचने का समय 24 दिन से बढ़कर करीब 54 दिन हो सकता है और जहाजों की मांग लगभग तीन गुना बढ़ सकती है। साथ ही ईंधन और परिवहन खर्च काफी बढ़ जाएगा।

बड़े तेल टैंकर स्वेज नहर की गहराई की सीमा के कारण पूरी क्षमता से नहीं चल पाएंगे। इससे छोटे जहाजों की जरूरत बढ़ेगी और समुद्री यातायात को नए तरीके से व्यवस्थित करना पड़ेगा।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बाबुल-मंदब की रुकावट का मतलब यह नहीं है कि सऊदी तेल निर्यात पूरी तरह बंद हो जाएगा। तेल को लंबे वैकल्पिक रास्तों से भेजा जा सकता है, लेकिन इससे परिवहन खर्च बढ़ेगा और एशियाई देशों के लिए तेल महंगा हो सकता है।

कुल मिलाकर, बाबुल-मंदब में किसी भी लंबे संकट का असर केवल सऊदी अरब पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों पर पड़ सकता है।

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